तमिलनाडु: सभी सरकारी दफ्तरों में लगेंगे भ्रष्टाचार विरोधी बोर्ड, मुख्य सचिव का आदेश जारी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 20 जुलाई 2026 को सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार विरोधी सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाने का आदेश दिया है। मुख्य सचिव एम. साई कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस सरकारी आदेश के तहत सभी विभागों, जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) और सरकारी कंपनियों को ये बोर्ड प्रमुख स्थानों पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में क्या है
सरकारी आदेश के अनुसार, प्रत्येक कार्यालय में तमिल और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में द्विभाषी बोर्ड ऐसी जगह लगाए जाएंगे जहाँ आम नागरिकों की नज़र आसानी से पड़ सके। इन बोर्डों पर स्पष्ट रूप से अंकित होगा कि 'रिश्वत देना और रिश्वत लेना दोनों दंडनीय अपराध हैं'। साथ ही, सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) का पता, टेलीफोन नंबर, व्हाट्सएप नंबर, फैक्स नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी भी प्रदर्शित की जाएगी।
इसके अलावा सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे यही संदेश अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर भी प्रकाशित करें और डीवीएसी पोर्टल का सीधा लिंक उपलब्ध कराएँ।
पुराने निर्देशों की अनदेखी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि वर्ष 2006 से इस संबंध में कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अनेक कार्यालयों ने इनका पूरी तरह पालन नहीं किया। कई जगहों पर भ्रष्टाचार विरोधी बोर्ड लगाए ही नहीं गए, जबकि कुछ स्थानों पर इन्हें ऐसी जगह लगाया गया जहाँ जनता की नज़र नहीं पड़ती थी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही है।
नया आदेश इसी अनुपालन अंतराल को पाटने के उद्देश्य से जारी किया गया है, ताकि राज्य के सभी सरकारी प्रतिष्ठानों में यह व्यवस्था एकसमान रूप से लागू हो सके।
निगरानी और अनुपालन तंत्र
आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए विभिन्न विभागों की निरीक्षण शाखाओं और जिला कलेक्टर कार्यालयों के निरीक्षण प्रकोष्ठों को यह सत्यापित करने का दायित्व सौंपा गया है कि सभी कार्यालयों में निर्धारित प्रारूप के अनुसार बोर्ड लगाए गए हैं। विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के सभी कार्यालयों में अनुपालन की पुष्टि के बाद मानव संसाधन प्रबंधन विभाग को अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।
डीवीएसी की व्हाट्सएप हेल्पलाइन से जुड़ाव
यह पहल राज्य सरकार द्वारा हाल ही में डीवीएसी की समर्पित व्हाट्सएप हेल्पलाइन 9498180936 शुरू किए जाने के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। सरकार का मानना है कि इन दोनों कदमों से नागरिकों को भ्रष्टाचार की शिकायतें त्वरित रूप से दर्ज कराने में सुविधा होगी और सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही और मजबूत होगी।
आम जनता पर असर
इस आदेश के लागू होने के बाद नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में प्रवेश करते ही डीवीएसी के संपर्क विवरण सुलभ रूप में मिलेंगे, जिससे रिश्वतखोरी की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अधिक सुगम होगी। आलोचकों का कहना है कि बोर्ड लगाने से अधिक ज़रूरी है कि शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आने वाले हफ्तों में विभागीय अनुपालन रिपोर्टें यह स्पष्ट करेंगी कि यह आदेश ज़मीन पर कितना प्रभावी साबित होता है।