तमिलनाडु जनगणना 2026: 1.40 लाख एन्यूमरेटर को जून अंत से प्रशिक्षण, अगस्त में 2.80 करोड़ घरों की गिनती
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में जनगणना 2026 की तैयारियां पूरे जोर पर हैं। 1 अगस्त से 30 अगस्त के बीच प्रस्तावित घरों की गिनती से पहले, राज्य सरकार जून के अंतिम सप्ताह से लगभग 1.40 लाख गणनाकर्मियों (एन्यूमरेटर) के लिए एक महीने का व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। यह अभियान राज्य के लगभग 2.80 करोड़ घरों को कवर करेगा, जो इसे देश के सबसे बड़े डेटा-संग्रह अभियानों में से एक बनाता है।
प्रशिक्षण की रूपरेखा
फिलहाल लगभग 2,700 जिला-स्तरीय फील्ड ट्रेनर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ये ट्रेनर आगे चलकर 1.40 लाख एन्यूमरेटर को घर-घर डेटा संग्रह के तरीकों और तकनीकों में प्रशिक्षित करेंगे। तमिलनाडु में जनगणना कार्यों के निदेशक एम. सुंदरेश बाबू ने बताया कि फील्ड ट्रेनरों को जनगणना कार्य निदेशालय के अनुरोध पर नियुक्त किया गया है और वे डेटा संग्रह में एकरूपता तथा सटीकता सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा, 'इस सप्ताह लगभग 2,700 फील्ड-स्तरीय ट्रेनर को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके बाद वे लगभग 1.40 लाख एन्यूमरेटर को प्रशिक्षण देंगे, जो पूरे तमिलनाडु में घरों की जनगणना में शामिल होंगे।'
कौन करेगा गिनती
इस विशाल अभियान में स्कूल शिक्षक, नगर निगम कर्मचारी और विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारी एन्यूमरेटर की भूमिका निभाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक एन्यूमरेटर को एक महीने के सर्वेक्षण के दौरान लगभग 200 घर सौंपे जाएंगे। इस अनुपात के आधार पर, राज्यभर के लगभग 2.80 करोड़ घरों को कवर किए जाने का अनुमान है।
स्व-गणना का अवसर
फील्ड गणना शुरू होने से पहले, नागरिकों को 17 जुलाई से 31 जुलाई के बीच 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' चरण में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस अवधि में घर के सदस्य अपनी जानकारी स्वेच्छा से ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं, जिससे फील्ड सत्यापन में लगने वाला समय घटेगा और सर्वेक्षण की समग्र दक्षता बढ़ेगी।
क्या-क्या दर्ज होगा
घरों का सूचीकरण जनगणना का पहला और महत्वपूर्ण चरण है। एन्यूमरेटर घर में निवासियों की संख्या, मकान की विशेषताएं, बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच, वाहनों और संपत्ति का स्वामित्व तथा अन्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का विवरण एकत्र करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जनगणना को लेकर लंबे समय से प्रतीक्षा थी — 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टाली गई थी।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में संग्रहीत डेटा आने वाले वर्षों में नीति-निर्माण, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यक्रमों की योजना बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। गौरतलब है कि जनगणना के आंकड़े चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन और केंद्रीय अनुदान के वितरण में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।