तमलुक निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक उत्थान: कांग्रेस से टीएमसी और अब भाजपा की चुनौती

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तमलुक निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक उत्थान: कांग्रेस से टीएमसी और अब भाजपा की चुनौती

सारांश

पश्चिम बंगाल का तमलुक निर्वाचन क्षेत्र, जो राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है, अब भाजपा की चुनौती का सामना कर रहा है। जानें इस क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास और हाल के चुनावी परिणामों के बारे में।

Key Takeaways

  • तमलुक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक इतिहास में कई उतार-चढ़ाव शामिल हैं।
  • कांग्रेस, वामपंथी, टीएमसी और अब भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
  • तमलुक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था कृषि और मत्स्य पालन पर निर्भर है।
  • हाल के चुनावों में भाजपा ने तमलुक से महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है।
  • यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, जिसमें प्राचीन ताम्रलिप्ति शामिल है।

कोलकाता, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमलुक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण सीट है, जो पूर्व मेदिनीपुर (पुरब मेदिनीपुर) जिले में स्थित है। इस क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं: तमलुक, हल्दिया, महिसादल, मोयना, नंदकुमार, नंदीग्राम और पांसकुड़ा पूर्व। ये सभी विधानसभा क्षेत्र कृषि, मत्स्य पालन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध पूर्व मेदिनीपुर जिले का हिस्सा हैं।

तमलुक शहर, जो जिले का मुख्यालय है, प्राचीन ताम्रलिप्ति के लिए जाना जाता है और इसे ह्वेन त्सांग जैसे प्रसिद्ध चीनी यात्री ने भी उल्लेखित किया था। यह शहर रूपनारायण नदी के किनारे स्थित है और इसका ऐतिहासिक महत्व है।

2011 की जनगणना के अनुसार, तमलुक शहर की जनसंख्या लगभग 65,306 थी, जिसमें पुरुषों की संख्या 33,260 और महिलाओं की 32,046 थी। इस लोकसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या लाखों में है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र प्रमुख हैं और मतदाता मुख्यतः किसान, मछुआरे और छोटे व्यापारी हैं।

राजनीतिक इतिहास में, तमलुक पहले कांग्रेस का गढ़ रहा, जहाँ 1951 में सीट बनी और प्रारंभिक चुनावों में कांग्रेस के समांता सतीश चंद्र जैसे नेताओं ने जीत हासिल की। बाद में सीपीआई(एम) ने यहाँ अपनी मजबूत पकड़ बनाई। 2009 से, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का वर्चस्व रहा। 2009 के चुनाव में टीएमसी ने जीत दर्ज की और 2014 में सुवेंदु अधिकारी ने सीपीआई(एम) के शेख इब्राहिम अली को लगभग 2.46 लाख वोटों से हराया। सुवेंदु को 55.54 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सीपीआई(एम) को 40.47 प्रतिशत वोट मिले।

2019 में, दिव्येंदु अधिकारी (सुवेंदु के भाई) ने टीएमसी के लिए जीत हासिल की, उन्हें 7,24,433 वोट मिले और भाजपा के सिद्धार्थ नस्कर को 5,34,268 वोटों से हराया, जिसका अंतर 1,90,165 वोटों का था।

2024 के लोकसभा चुनाव में, तमलुक ने एक बड़ा उलटफेर देखा। भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय, जो पूर्व कलकत्ता हाई कोर्ट के जज हैं, ने टीएमसी के देबांगशु भट्टाचार्य को 77,733 वोटों के अंतर से हराया। अभिजीत को 7,65,584 वोट (48.54 प्रतिशत) मिले, जबकि टीएमसी को 6,87,851 वोट (43.61 प्रतिशत) और सीपीआई(एम) के सायन बनर्जी को 85,389 वोट (5.41 प्रतिशत) मिले।

कुल मतदान 14,04,353 रहा और भाजपा ने टीएमसी के पारंपरिक गढ़ से सीट छीन ली। यह जीत भाजपा के लिए पूर्व मेदिनीपुर में मजबूत प्रदर्शन का प्रतीक बन गई, जहाँ नंदीग्राम जैसे क्षेत्र पहले से ही विवादास्पद रहे हैं।

यह क्षेत्र राजनीतिक बदलाव का गवाह रहा है, जिसमें कांग्रेस से वामपंथी, फिर टीएमसी और अब भाजपा की चुनौती शामिल है।

Point of View

फिर टीएमसी और अब भाजपा की बढ़ती चुनौती दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक समीकरण बदलते हैं। यह क्षेत्र एक ऐसे लोकतंत्र का प्रतीक है जो लगातार बदल रहा है।
NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

तमलुक निर्वाचन क्षेत्र कब बना?
तमलुक निर्वाचन क्षेत्र 1951 में स्थापित हुआ।
तमलुक में हाल के चुनावों का परिणाम क्या रहा?
2024 के चुनाव में भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय ने टीएमसी के देबांगशु भट्टाचार्य को हराया।
तमलुक क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक गतिविधियाँ क्या हैं?
यह क्षेत्र कृषि, मत्स्य पालन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
तमलुक का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
तमलुक प्राचीन ताम्रलिप्ति के नाम से प्रसिद्ध है और इसका ऐतिहासिक महत्व है।
तमलुक की जनसंख्या कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार, तमलुक की जनसंख्या लगभग 65,306 थी।
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