तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर और नई एसओपी की शुरुआत की

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तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर और नई एसओपी की शुरुआत की

सारांश

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने सिनेमाघरों में फिल्म पायरेसी के खिलाफ एक नई पहल की है। एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर और नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) से दर्शकों को कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा। जानिए इस पहल के पीछे का उद्देश्य और इसके प्रभाव।

मुख्य बातें

पायरेसी के खिलाफ जागरूकता: नई पहल दर्शकों को पायरेसी के कानूनी परिणामों के बारे में जानकारी देगी।
टीजीसीएसबी की भूमिका: तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने एंटी-पायरेसी यूनिट स्थापित की है।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: पायरेसी के कारण फिल्म उद्योग को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है।
नवीनतम प्रक्रियाएं: नई एसओपी में पायरेसी मामलों की जांच के लिए विस्तृत उपाय शामिल हैं।
दर्शकों को चेतावनी: फिल्म पायरेसी और अवैध रिकॉर्डिंग दंडनीय अपराध हैं।

हैदराबाद, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (टीजीसीएसबी) की एंटी-पायरेसी इकाई ने सोमवार को सिनेमाघरों में फिल्म स्क्रीनिंग से पहले प्रदर्शित किए जाने वाले नए एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर और फिल्म पायरेसी मामलों की जांच के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की शुरुआत की।

इस डिस्क्लेमर का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को फिल्म पायरेसी के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक करना है। इसके साथ ही, सिनेमाघरों में कैमकॉडिंग (फिल्म की अवैध रिकॉर्डिंग) के खिलाफ एक व्यापक अभियान भी चलाया जा रहा है।

टीजीसीएसबी की निदेशक शिखा गोयल और तेलुगु फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स (टीएफसीसी) के अध्यक्ष दग्गुबाती सुरेश बाबू ने इस महत्वपूर्ण पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम टीजीसीएसबी और टीएफसीसी के सहयोग से आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान हुआ, जिसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों और फिल्म उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ाकर डिजिटल पायरेसी की समस्या का समाधान करना है।

जनवरी में, टीजीसीएसबी ने टीएफसीसी के साथ मिलकर फिल्म पायरेसी पर अंकुश लगाने के लिए एक एंटी-पायरेसी इकाई स्थापित की थी।

बैठक में उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने फिल्म पायरेसी के प्रभाव और इसके दायरे पर चर्चा की। टीजीसीएसबी के अनुसार, उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि तेलुगु फिल्म उद्योग को हर साल लगभग ३,७०० करोड़ रुपये और भारतीय फिल्म उद्योग को २२,४०० करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पायरेसी के कारण होता है।

जांच में यह सामने आया है कि पायरेसी मुख्य रूप से दो स्रोतों से होती है- फिल्म रिलीज से पहले पोस्ट-प्रोडक्शन या डिजिटल सेवा प्रदाताओं के स्तर पर एचडी गुणवत्ता सामग्री का लीक होना और सिनेमाघरों में फिल्म की कैमकॉडिंग, जो अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार है।

शिखा गोयल ने बताया कि नई एसओपी में पायरेसी मामलों की जांच के लिए विस्तृत ढांचा तैयार किया गया है। इसमें कॉपीराइट अधिनियम, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम और आईटी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने, पायरेटेड सामग्री की फॉरेंसिक जांच, वॉटरमार्किंग और सर्वर डेटा विश्लेषण के माध्यम से स्रोत थिएटर की पहचान, डिजिटल सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने और आईटी नियमों के तहत उल्लंघनकारी यूआरएल को ब्लॉक करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

बैठक में प्रस्तुत किया गया एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म स्क्रीनिंग से पहले दर्शकों को दिखाया जाएगा और इसे डिजिटल सेवा प्रदाताओं एवं प्रदर्शकों के स्क्रीनिंग पैकेज में भी शामिल किया जाएगा।

इस डिस्क्लेमर में दर्शकों को चेतावनी दी जाएगी कि फिल्म पायरेसी या बिना अनुमति फिल्म रिकॉर्ड करना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की सजा, तीन लाख रुपये तक का जुर्माना या फिल्म की उत्पादन लागत का 5 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

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RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर का उद्देश्य क्या है?
एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर का उद्देश्य दर्शकों को फिल्म पायरेसी के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक करना है।
टीजीसीएसबी ने फिल्म पायरेसी के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
टीजीसीएसबी ने एंटी-पायरेसी यूनिट की स्थापना की है और नई एसओपी की शुरुआत की है।
पायरेसी के कारण फिल्म उद्योग को कितना नुकसान होता है?
पायरेसी के कारण तेलुगु फिल्म उद्योग को हर साल लगभग ३,७०० करोड़ रुपये और भारतीय फिल्म उद्योग को २२,४०० करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है।
नए एसओपी में क्या प्रक्रियाएं शामिल हैं?
नई एसओपी में एफआईआर दर्ज करने, फॉरेंसिक जांच, वॉटरमार्किंग, और उल्लंघनकारी यूआरएल को ब्लॉक करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
क्या एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर सभी सिनेमाघरों में दिखाया जाएगा?
हाँ, एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म स्क्रीनिंग से पहले दिखाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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