बंडी भागीरथ से पॉक्सो मामले में पूछताछ शुरू, चेरलापल्ली जेल से लाया गया पुलिस स्टेशन
सारांश
मुख्य बातें
साइबराबाद पुलिस ने बुधवार, 27 मई को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भागीरथ से पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामले में औपचारिक पूछताछ शुरू की। मलकाजगिरी की ट्रायल कोर्ट द्वारा तीन दिन की पुलिस हिरासत मंजूर किए जाने के एक दिन बाद, पेट बशीरबाद पुलिस स्टेशन की टीम उन्हें चेरलापल्ली जेल से हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए ले गई।
मुख्य घटनाक्रम
चिकित्सा परीक्षण के बाद भागीरथ को पुलिस स्टेशन लाया गया, जहाँ कुकटपल्ली के पुलिस उपायुक्त ऋतिराज पीड़िता के बयान और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ कर रहे थे। पुलिस ने आरोपी, पीड़िता, उसकी माँ और उसके दोस्तों के बयान पहले ही दर्ज कर लिए हैं।
इस मामले में 8 मई 2026 को एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न को लेकर यौन अपराधों से बाल संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 11, 12, 5(1) और 6 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और 75 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीड़िता से जांच अधिकारी द्वारा बात किए जाने के बाद पॉक्सो की धारा 5(1) और 6 — जो अपेक्षाकृत गंभीर प्रावधान हैं — बाद में जोड़ी गईं।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
पुलिस ने भागीरथ को 13 मई को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का नोटिस जारी किया था। वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने पत्र लिखकर दो दिन का अतिरिक्त समय माँगा। इसके बाद उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय में अंतरिम सुरक्षा की याचिका दायर की, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
16 मई की रात को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। उनके पिता बंडी संजय कुमार ने दावा किया कि उनके बेटे ने दो वकीलों के साथ पुलिस के सामने स्वयं आत्मसमर्पण किया था। हालाँकि पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से पूर्व भागीरथ ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न का अपराध स्वीकार किया था। उसी रात उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अदालत का आदेश और हिरासत की अवधि
मंगलवार को मलकाजगिरी की निचली अदालत ने पुलिस की हिरासत याचिका पर सुनवाई की। पुलिस ने एक सप्ताह की हिरासत माँगी थी, परंतु अदालत ने केवल तीन दिन की हिरासत मंजूर की। इस सीमित अवधि में पुलिस को अपनी जांच के प्रमुख सूत्र खंगालने होंगे।
राजनीतिक संदर्भ और संवेदनशीलता
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि आरोपी एक केंद्रीय मंत्री के पुत्र हैं। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में जहाँ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार शामिल हों, जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। तेलंगाना में सत्तारूढ़ दल और केंद्र में भागीरथ के पिता की पार्टी के बीच राजनीतिक भिन्नता को देखते हुए, यह मामला कथित तौर पर राज्य और केंद्र के बीच तनाव का भी बिंदु बन सकता है।
आगे क्या होगा
तीन दिन की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद भागीरथ को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा। जांच दल पीड़िता के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोप-पत्र की तैयारी में जुटा है। पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(1) और 6 के तहत दोषसिद्धि होने पर कठोर दंड का प्रावधान है।