शिउली पंचायत में TMC के 8 सदस्यों का इस्तीफा, बंगाल चुनाव नतीजों के बाद उत्तर 24 परगना में पार्टी कमज़ोर
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उत्तर 24 परगना जिले में एक और बड़ा झटका लगा है — शिउली ग्राम पंचायत के प्रधान अरुण कुमार घोष सहित TMC के 8 सदस्यों ने रविवार, 21 जून 2026 को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का आधार हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की सत्ता से विदाई को बताया गया है।
इस्तीफे की प्रक्रिया और पृष्ठभूमि
सभी 8 सदस्य बैरकपुर ब्लॉक-2 के बीडीओ कार्यालय पहुँचे और वहाँ अपना इस्तीफा औपचारिक रूप से सौंपा। शिउली ग्राम पंचायत में कुल 30 सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में 29 सदस्य कार्यरत थे — इनमें TMC के 24, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 3 और वाम मोर्चे के 2 सदस्य शामिल थे। प्रधान समेत 8 TMC सदस्यों के इस्तीफे के बाद पंचायत की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव आ गया है।
अरुण कुमार घोष का बयान
मीडिया से बात करते हुए पूर्व प्रधान अरुण कुमार घोष ने कहा, 'इस क्षेत्र के लोगों ने विधानसभा चुनाव में हमारे खिलाफ मतदान किया है। इसलिए जनता के फैसले का सम्मान करते हुए हमने स्वेच्छा से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में TMC के कुछ और सदस्य भी इस्तीफा दे सकते हैं।
नैहाटी नगरपालिका में भी इस्तीफे का सिलसिला
इसी क्रम में नैहाटी नगरपालिका के चेयरमैन अशोक चटर्जी ने शनिवार रात ईमेल के ज़रिए अपना इस्तीफा भेज दिया। यह नगरपालिका भी उत्तर 24 परगना जिले में स्थित है। इससे पहले इसी नगरपालिका के दो पार्षद भी अपना पद छोड़ चुके हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मोहनपुर पंचायत और बैरकपुर नगरपालिका के बोर्ड भी भंग किए जा चुके हैं।
राज्यभर में TMC के लिए बढ़ती चुनौतियाँ
राज्य में सरकार बदलने के बाद TMC एक के बाद एक स्थानीय निकायों पर अपना नियंत्रण खोती जा रही है। राज्यभर में विभिन्न नगर निगमों, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों में TMC के जनप्रतिनिधि अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके चलते मानसून के आने से पहले कई स्थानों पर नागरिक सेवाएँ लगभग ठप पड़ गई हैं।
आम जनता पर असर
स्थानीय निकायों में नेतृत्व शून्यता के कारण उत्तर 24 परगना के कई इलाकों में बुनियादी नागरिक सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं। मानसून से पहले जल निकासी, सफाई और सड़क मरम्मत जैसे ज़रूरी कार्य अधर में लटके हैं। यह स्थिति उन क्षेत्रों के निवासियों के लिए विशेष चिंता का विषय बन गई है जहाँ इस्तीफों की वजह से प्रशासनिक कामकाज रुक गया है।