टीएमसी नेता ज्योतिप्रिय मलिक का सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा, NWC सदस्यता के सात दिन बाद लिया फैसला
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उल्लेखनीय है कि उन्हें महज एक सप्ताह पूर्व ही TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति (नेशनल वर्किंग कमेटी) में शामिल किया गया था, लेकिन सदस्यता मिलने के सात दिन के भीतर ही उन्होंने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से स्वयं को अलग कर लिया। इस्तीफे की वजह उन्होंने अपनी बिगड़ती सेहत को बताया है।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला
मलिक ने अपने इस्तीफे के संदर्भ में कहा, 'मैं लंबे समय से हाई ब्लड शुगर का मरीज हूं। डायबिटीज की वजह से मेरी किडनी भी प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टरों के अनुसार मेरे लिए पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़े रहना संभव नहीं है। इसी कारण मैंने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है।' यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी ने उन्हें हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंपी थी।
राजनीतिक सफर: गैघाटा से हाबरा तक
ज्योतिप्रिय मलिक पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। वह 2001 से 2011 तक उत्तर 24 परगना जिले की गैघाटा विधानसभा सीट से लगातार विधायक रहे। इसके बाद 2011 से 2026 तक उन्होंने हाबरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालाँकि, हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबदास मंडल के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।
राशन घोटाले में गिरफ्तारी और जमानत
अक्टूबर 2023 में मलिक का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित राशन वितरण घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय वह राज्य के वन मंत्री के पद पर थे। इससे पूर्व वह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने एक वर्ष से अधिक समय ED और न्यायिक हिरासत में बिताया।
जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली। जमानत के बाद वह सत्तारूढ़ दल के विधायक तो बने रहे, परंतु मंत्रिमंडल में उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई — जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह TMC के भीतर एक असामान्य घटनाक्रम है — जहाँ किसी नेता को राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल किए जाने के एक सप्ताह के भीतर ही इस्तीफा देना पड़े। अब देखना यह होगा कि पार्टी इस रिक्त स्थान को किस प्रकार भरती है और मलिक की भविष्य की भूमिका क्या रहती है।