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टीएमसी नेता ज्योतिप्रिय मलिक का सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा, NWC सदस्यता के सात दिन बाद लिया फैसला

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टीएमसी नेता ज्योतिप्रिय मलिक का सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा, NWC सदस्यता के सात दिन बाद लिया फैसला

सारांश

TMC के वरिष्ठ नेता ज्योतिप्रिय मलिक ने राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के ठीक सात दिन बाद सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। डायबिटीज और किडनी की समस्या का हवाला देने वाले मलिक राशन घोटाले में ED की गिरफ्तारी और हाबरा से चुनावी हार के बाद पहले से ही हाशिये पर थे।

मुख्य बातें

ज्योतिप्रिय मलिक ने 19 जून 2026 को TMC के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया।
TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के महज सात दिन के भीतर यह फैसला लिया गया।
इस्तीफे का कारण डायबिटीज और किडनी की बीमारी बताई गई है।
मलिक 2001 से 2026 तक लगातार विधायक रहे — पहले गैघाटा , फिर हाबरा से।
विधानसभा चुनाव 2026 में BJP उम्मीदवार देबदास मंडल से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
अक्टूबर 2023 में ED ने उन्हें राशन वितरण घोटाले में गिरफ्तार किया था; जनवरी 2025 में जमानत मिली।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उल्लेखनीय है कि उन्हें महज एक सप्ताह पूर्व ही TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति (नेशनल वर्किंग कमेटी) में शामिल किया गया था, लेकिन सदस्यता मिलने के सात दिन के भीतर ही उन्होंने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से स्वयं को अलग कर लिया। इस्तीफे की वजह उन्होंने अपनी बिगड़ती सेहत को बताया है।

स्वास्थ्य कारणों का हवाला

मलिक ने अपने इस्तीफे के संदर्भ में कहा, 'मैं लंबे समय से हाई ब्लड शुगर का मरीज हूं। डायबिटीज की वजह से मेरी किडनी भी प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टरों के अनुसार मेरे लिए पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़े रहना संभव नहीं है। इसी कारण मैंने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया है।' यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी ने उन्हें हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंपी थी।

राजनीतिक सफर: गैघाटा से हाबरा तक

ज्योतिप्रिय मलिक पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। वह 2001 से 2011 तक उत्तर 24 परगना जिले की गैघाटा विधानसभा सीट से लगातार विधायक रहे। इसके बाद 2011 से 2026 तक उन्होंने हाबरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालाँकि, हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबदास मंडल के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।

राशन घोटाले में गिरफ्तारी और जमानत

अक्टूबर 2023 में मलिक का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित राशन वितरण घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय वह राज्य के वन मंत्री के पद पर थे। इससे पूर्व वह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने एक वर्ष से अधिक समय ED और न्यायिक हिरासत में बिताया।

जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली। जमानत के बाद वह सत्तारूढ़ दल के विधायक तो बने रहे, परंतु मंत्रिमंडल में उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई — जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह TMC के भीतर एक असामान्य घटनाक्रम है — जहाँ किसी नेता को राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल किए जाने के एक सप्ताह के भीतर ही इस्तीफा देना पड़े। अब देखना यह होगा कि पार्टी इस रिक्त स्थान को किस प्रकार भरती है और मलिक की भविष्य की भूमिका क्या रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सात दिन में इस्तीफा यह दर्शाता है कि या तो दबाव था या स्वीकृति अधूरी। हाबरा में चुनावी हार और राशन घोटाले की कानूनी छाया — दोनों मिलकर एक ऐसे नेता की तस्वीर बनाते हैं जिसकी पार्टी के भीतर स्थिति अभी भी अनिश्चित है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्योतिप्रिय मलिक ने TMC के पदों से इस्तीफा क्यों दिया?
मलिक ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने बताया कि लंबे समय से डायबिटीज के कारण उनकी किडनी प्रभावित हो चुकी है और डॉक्टरों ने पार्टी की सक्रिय संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेने से मना किया है।
TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने के कितने दिन बाद उन्होंने इस्तीफा दिया?
ज्योतिप्रिय मलिक को TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति (नेशनल वर्किंग कमेटी) में शामिल किए जाने के केवल सात दिन बाद ही उन्होंने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया।
ज्योतिप्रिय मलिक को राशन घोटाले में कब गिरफ्तार किया गया था?
अक्टूबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें पश्चिम बंगाल के राशन वितरण घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय वह राज्य के वन मंत्री थे। जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली।
ज्योतिप्रिय मलिक का विधायक के रूप में क्या राजनीतिक इतिहास रहा है?
वह 2001 से 2011 तक उत्तर 24 परगना की गैघाटा विधानसभा सीट से और 2011 से 2026 तक हाबरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। हालाँकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में वह BJP उम्मीदवार देबदास मंडल से हार गए।
इस्तीफे के बाद TMC में ज्योतिप्रिय मलिक की क्या भूमिका रहेगी?
फिलहाल इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। चुनावी हार और स्वास्थ्य समस्याओं के मद्देनजर पार्टी में उनकी सक्रिय भूमिका अनिश्चित बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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