TMC विधायक प्रिया पॉल पर चुनावी हलफनामे में पति की संपत्ति छिपाने का आरोप, हावड़ा में शिकायत दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की विधायक प्रिया पॉल के खिलाफ 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल थाना में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में अपने पति अमित पॉल और बेटी के नाम पर दर्ज संपत्तियों का उल्लेख नहीं किया।
शिकायत का आधार
यह शिकायत संकराइल क्षेत्र के स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता संजीत जाना ने दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि प्रिया पॉल ने 2021 में पहली बार विधायक बनने के बाद से कथित तौर पर राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का उपयोग करते हुए करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। शिकायत में कहा गया है कि विधायक बनने से पूर्व उनका परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से था, लेकिन पिछले पाँच वर्षों में उनके पति और बेटी के नाम पर संपत्ति में तेज़ी से वृद्धि हुई।
शिकायतकर्ता का बयान
शिकायतकर्ता संजीत जाना ने कहा, 'विधायक और उनके परिवार की संपत्ति में पिछले पाँच वर्षों में अत्यधिक वृद्धि हुई है, लेकिन इसे चुनावी हलफनामे में नहीं दिखाया गया। इसी आधार पर मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की उचित जाँच का आश्वासन दिया है।' गौरतलब है कि यह आरोप केवल शिकायतकर्ता के दावे पर आधारित हैं और अभी तक न्यायिक या जाँच एजेंसी द्वारा सत्यापित नहीं किए गए हैं।
चुनावी पृष्ठभूमि
प्रिया पॉल ने 2026 के विधानसभा चुनाव में संकराइल सीट से BJP की बरनाली ढाली को 16,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया और लगातार दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुईं। वे 2021 में पहली बार इसी सीट से जीती थीं।
विधायक और TMC की प्रतिक्रिया
शिकायत दर्ज होने के समय तक प्रिया पॉल या उनके परिवार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट — चाहे वह ममता बनर्जी के प्रति निष्ठावान हो या निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट — की ओर से भी कोई बयान नहीं आया।
आगे क्या होगा
पुलिस ने मामले की जाँच का आश्वासन दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण है और विपक्षी दल सत्तारूढ़ TMC के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर कई मोर्चों पर दबाव बना रहे हैं। यदि जाँच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो चुनाव आयोग के नियमों के तहत हलफनामे में गलत जानकारी देना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।