टोरेस ज्वैलर्स पोंजी घोटाला: ₹177 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी सागर मेहता दुबई में गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पुष्टि की है कि टोरेस ज्वैलर्स से जुड़े ₹177 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी सागर मेहता को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। भारतीय एजेंसी के अनुरोध पर जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर दुबई अधिकारियों ने यह कार्रवाई की। मेहता 24 दिसंबर 2024 को भारत से फरार हो गए थे और कई महीनों तक जाँच एजेंसियों की पहुँच से बाहर रहे।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
मेहता के वकील ने विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ चल रही उद्घोषणा कार्यवाही वापस लेने की अर्जी दी, जिसमें अदालत को बताया गया कि दुबई अधिकारियों ने ईडी के अनुरोध पर जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर मेहता को गिरफ्तार किया। ईडी ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी कई महीनों तक फरार रहने के बाद अब हिरासत में है।
मामले में अन्य आरोपी
अदालत ने इससे पहले मेहता के साथ-साथ तीन यूक्रेनी नागरिकों — ओलेना स्टोइयन, ओलेक्जेंडर जापिचेंको और विक्टोरिया कोवालेन्को — के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। जाँचकर्ताओं के अनुसार, जापिचेंको और स्टोइयन ने कथित तौर पर इस योजना के वित्तीय ढाँचे और मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके तैयार करने में भूमिका निभाई। इन पर अवैध तरीकों से शुरुआती फंड जुटाने और बिना हिसाब-किताब वाले धन को वैध निवेश में बदलने में सहायता करने का भी आरोप है।
टोरेस ज्वैलर्स पोंजी स्कीम क्या थी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, टोरेस ज्वैलर्स का संचालन करने वाली कंपनी प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड ने निवेशकों को सोना, चाँदी, हीरे के गहनों और कीमती रत्नों में निवेश पर हर हफ्ते 2 से 9 फीसदी तक रिटर्न देने का वादा किया था। कंपनी ने कथित तौर पर सिंथेटिक मोइसैनाइट को असली कीमती रत्न बताकर निवेशकों को गुमराह किया। ईडी का आरोप है कि स्कीम में नए निवेशक लाने पर 20 फीसदी का 'इन्वेस्टमेंट बोनस' दिया जाता था, जिससे एक रेफरल-आधारित तंत्र बन गया — जो पोंजी स्कीम की विशिष्ट पहचान है।
सागर मेहता की भूमिका
जाँचकर्ताओं का आरोप है कि मेहता ने कथित धोखाधड़ी से अर्जित रकम को एकत्र करने और स्थानांतरित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। वे इस ऑपरेशन में सक्रिय रूप से शामिल थे, लेकिन कानूनी कार्यवाही शुरू होने से पहले ही देश छोड़ गए। दुबई में उनकी गिरफ्तारी को कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और इस मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जाँच के लिए अहम माना जा रहा है।
आगे की कार्यवाही
मेहता की दुबई में गिरफ्तारी के बाद अब प्रत्यर्पण प्रक्रिया और विशेष पीएमएलए अदालत में आगे की सुनवाई पर नज़रें टिकी हैं। यह मामला इस बात की भी मिसाल है कि भारतीय जाँच एजेंसियाँ किस तरह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के ज़रिये विदेश फरार आरोपियों तक पहुँच रही हैं।