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त्रिपुरा में पहली बार मीठे अंगूर की सफल खेती, 18 नई किस्मों का होगा परीक्षण

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त्रिपुरा में पहली बार मीठे अंगूर की सफल खेती, 18 नई किस्मों का होगा परीक्षण

सारांश

त्रिपुरा पूर्वोत्तर का पहला राज्य बना जहाँ मीठे अंगूर की सफल खेती हुई है। कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने 18 नई किस्मों के परीक्षण, किसान प्रशिक्षण और क्लस्टर आधारित जूस प्रसंस्करण इकाइयों की घोषणा कर 'अंगूर क्रांति' की नींव रखी।

मुख्य बातें

मंत्री रतन लाल नाथ ने त्रिपुरा में अंगूर की 18 नई किस्मों के परीक्षण की घोषणा की।
उनाकोटी जिले के चांदीपुर में पूर्वोत्तर भारत में पहली बार मीठे अंगूर की सफल खेती हुई।
केवीके उनाकोटी ने वर्ष 2024 में दो दशक के अंतराल के बाद अंगूर अनुसंधान फिर शुरू किया।
अब तक चार किस्मों की सफल खेती हुई है, जिनमें दो वाइन अंगूर की किस्में शामिल हैं।
भारत में अंगूर की औसत उत्पादकता 24 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है; योजना नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित है।

त्रिपुरा सरकार ने राज्य में अंगूर की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है, और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने 4 जून 2026 को घोषणा की कि राज्य में अंगूर की 18 नई किस्मों का परीक्षण किया जाएगा। यह पहल ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर भारत में पहली बार उनाकोटी जिले के चांदीपुर में मीठे अंगूर की सफल खेती हो चुकी है।

मुख्य घोषणा और कार्यक्रम

मंत्री ने यह घोषणा चांदीपुर में आयोजित व्यावसायिक अंगूर खेती जागरूकता कार्यक्रम और नाबार्ड (कृषि और ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय बैंक) वित्तपोषित परियोजनाओं के शुभारंभ समारोह में की। उन्होंने उस बाग का दौरा किया जहाँ पूर्वोत्तर राज्य में पहली बार मीठे अंगूर की सफल खेती हुई है, और किसानों के बीच बिजली संचालित कृषि उपकरण भी वितरित किए।

उत्पादकता का लक्ष्य और वैज्ञानिक आधार

रतन लाल नाथ के अनुसार, भारत में अंगूर की औसत उत्पादकता लगभग 24 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है, और वैज्ञानिक हस्तक्षेप तथा किसानों के सहयोग से त्रिपुरा भी अंगूर उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य के वैज्ञानिक कई वर्षों से शोध कर रहे हैं और अब तक चार किस्मों की सफल खेती हो चुकी है, जिनमें दो वाइन अंगूर की किस्में भी शामिल हैं।

दो दशक बाद फिर शुरू हुआ अनुसंधान

लगभग दो दशक के अंतराल के बाद वर्ष 2024 में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) उनाकोटी ने अंगूर की खेती पर अनुसंधान और विकास कार्य फिर से शुरू किया। शुरुआती परिणामों में मिठास, उत्पादन और फलों की गुणवत्ता में उत्साहजनक सफलता मिली है। सितंबर 2024 में आईसीएआर-अंगूर के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र से अंगूर की छह किस्में त्रिपुरा लाई गई थीं और उन्हें प्रायोगिक आधार पर लगाया गया।

चुनौतियाँ और समाधान

मंत्री ने माना कि राज्य में बड़े पैमाने पर खेती के सामने कई चुनौतियाँ हैं — फलों में पर्याप्त मिठास की कमी, अधिक वर्षा, उच्च आर्द्रता, कुछ आवश्यक कृषि रसायनों की अनुपलब्धता और किसानों में तकनीकी जानकारी का अभाव। इनसे निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने विशेष उपचार और प्रबंधन तकनीकें अपनाई हैं; बेहतर पोषक तत्व प्रबंधन और वृद्धि नियामकों के उपयोग से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

आगे की रणनीति और किसानों की आय

योजना के तहत किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, अंगूर उत्पादन क्लस्टर, उपयुक्त क्षेत्रों में बाग स्थापित करना, और कृषि सामग्री व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा अंगूर के जूस और रेडी-टू-सर्व (आरटीएस) पेय पदार्थ बनाने का प्रशिक्षण, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और क्लस्टर आधारित लघु अंगूर जूस प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर भी काम किया जाएगा, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टिंकु रॉय, बागवानी निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और किसान उपस्थित रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ चाय, रबर और अनानास के परे की पहचान बनाने की कोशिश दशकों से अटकी रही है। असली परीक्षा यह नहीं कि 18 किस्मों में से कितनी जलवायु में टिकती हैं, बल्कि यह कि क्या राज्य उच्च आर्द्रता और अनियमित वर्षा वाले क्षेत्र में अंगूर को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बना पाता है — जो महाराष्ट्र के नासिक मॉडल से मौलिक रूप से अलग चुनौती है। प्रसंस्करण इकाइयों और आरटीएस पेय पर ज़ोर सही दिशा है, क्योंकि बिना मूल्य-संवर्धन के सिर्फ ताज़ा अंगूर पूर्वोत्तर के बाज़ार लॉजिस्टिक्स में टिक नहीं पाएँगे।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में अंगूर की खेती की नई योजना क्या है?
त्रिपुरा सरकार ने राज्य में अंगूर की 18 नई किस्मों का परीक्षण करने और किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रशिक्षण व तकनीकी सहायता देने की घोषणा की है। यह योजना नाबार्ड वित्तपोषित परियोजनाओं के तहत शुरू की गई है।
पूर्वोत्तर भारत में पहली बार मीठे अंगूर कहाँ उगाए गए?
उनाकोटी जिले के चांदीपुर में पूर्वोत्तर भारत में पहली बार मीठे अंगूर की सफल खेती की गई है। मंत्री रतन लाल नाथ ने स्वयं इस बाग का दौरा किया।
त्रिपुरा में अंगूर की खेती की मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
मंत्री के अनुसार, फलों में पर्याप्त मिठास की कमी, अधिक वर्षा, उच्च आर्द्रता, कुछ आवश्यक कृषि रसायनों की अनुपलब्धता और किसानों में तकनीकी जानकारी का अभाव प्रमुख चुनौतियाँ हैं। वैज्ञानिक विशेष उपचार और वृद्धि नियामकों से इन्हें दूर करने में जुटे हैं।
केवीके उनाकोटी ने अनुसंधान कब फिर शुरू किया?
लगभग दो दशक के अंतराल के बाद वर्ष 2024 में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) उनाकोटी ने अंगूर की खेती पर अनुसंधान और विकास कार्य फिर से शुरू किया। सितंबर 2024 में आईसीएआर-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र से छह किस्में लाकर प्रायोगिक रूप से लगाई गईं।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे?
योजना में अंगूर उत्पादन क्लस्टर विकसित करना, अंगूर के जूस और रेडी-टू-सर्व (आरटीएस) पेय पदार्थ बनाने का प्रशिक्षण, फसल कटाई के बाद प्रबंधन की तकनीक और क्लस्टर आधारित लघु जूस प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना शामिल है। इससे मूल्य-संवर्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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