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डीएमके के 78वें स्थापना दिवस पर उद्धयनिधि स्टालिन बोले — राजनीति को आम जन तक पहुँचाया

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डीएमके के 78वें स्थापना दिवस पर उद्धयनिधि स्टालिन बोले — राजनीति को आम जन तक पहुँचाया

सारांश

DMK के 78वें स्थापना दिवस पर उद्धयनिधि स्टालिन ने एक्स पर पार्टी की जन-राजनीति की विरासत को याद किया — अन्नादुरई की बारिश भरी बैठक से शताब्दी की दहलीज़ तक का सफ़र।

मुख्य बातें

17 सितंबर 2026 को DMK का 78वाँ स्थापना दिवस मनाया गया।
उद्धयनिधि स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर पार्टी की विरासत को याद किया और कार्यकर्ताओं से निष्ठापूर्वक कार्य करने का आह्वान किया।
DMK की स्थापना 17 सितंबर 1949 को सी.एन.
अन्नादुरई ने चेन्नई के रोयापुरम में की थी; एम.
करुणानिधि तब मात्र 20 वर्ष के थे।
पार्टी ने 1967 में पहली बार तमिलनाडु में सरकार बनाई और कांग्रेस के दशकों के प्रभुत्व को समाप्त किया।
उद्धयनिधि ने सामाजिक न्याय , राज्यों के अधिकार , महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास को DMK के मूल सिद्धांत बताया।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के युवा विंग सचिव उद्धयनिधि स्टालिन ने 17 सितंबर 2026 को पार्टी के 78वें स्थापना दिवस पर कहा कि DMK ने राजनीति को कभी विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों की बपौती नहीं बनने दिया, बल्कि उसे आम लोगों के हाथों तक पहुँचाया। उन्होंने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये कही।

स्थापना दिवस का स्मरण

उद्धयनिधि ने अपने संदेश में DMK की स्थापना के ऐतिहासिक क्षण को याद किया। उन्होंने लिखा कि पार्टी की नींव बारिश से भीगे एक दिन रखी गई थी, जब 40 वर्ष के सी.एन. अन्नादुरई ने अपने युवा साथियों के साथ मिलकर इस आंदोलन की शुरुआत की थी। उन साथियों में 20 वर्ष के एम. करुणानिधि भी शामिल थे, जो आगे चलकर पार्टी के सबसे दीर्घकालीन नेता बने।

गौरतलब है कि 17 सितंबर 1949 को चेन्नई के रोयापुरम स्थित रॉबिन्सन पार्क में भारी बारिश के बीच पार्टी की पहली बैठक हुई थी। अन्नादुरई ने समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी के नेतृत्व वाले द्रविड़र कझगम से अलग होकर DMK की स्थापना की थी और वे इसके पहले महासचिव बने।

मूल सिद्धांत और ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

उद्धयनिधि ने रेखांकित किया कि DMK की राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय, राज्यों के अधिकार, महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास जैसे मूल सिद्धांतों पर टिकी रही है। उन्होंने मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने को पार्टी की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में याद किया।

यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी अपनी शताब्दी की ओर बढ़ रही है। द्रविड़र कझगम जहाँ मुख्यतः सामाजिक सुधार तक सीमित रहकर चुनावी राजनीति से दूर रहा, वहीं DMK ने विधायी शक्ति के ज़रिये अपने उद्देश्य आगे बढ़ाने का रास्ता चुना — और 1967 में अन्नादुरई के नेतृत्व में पहली बार तमिलनाडु में सरकार बनाकर राज्य में कांग्रेस के दशकों पुराने प्रभुत्व को समाप्त किया।

करुणानिधि से स्टालिन तक: नेतृत्व की विरासत

अन्नादुरई के निधन के बाद एम. करुणानिधि ने लगभग पाँच दशक तक पार्टी की कमान संभाली। वर्तमान में DMK का नेतृत्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हाथों में है। उद्धयनिधि ने कहा कि दमन, राजनीतिक संकट और नए विरोधियों के उभरने के बावजूद, एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में पार्टी लगातार आगे बढ़ रही है।

कार्यकर्ताओं को संदेश

उद्धयनिधि ने पार्टी के काले और लाल रंग का उल्लेख करते हुए कहा, 'काला और लाल सिर्फ रंग नहीं हैं, बल्कि हमारी ज़िंदगी हैं।' उन्होंने सत्ता में रहने और विपक्ष में रहने — दोनों परिस्थितियों में — DMK के 78 वर्षों के सफ़र को तमिल समाज को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की यात्रा बताया।

शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर इस पार्टी के लिए उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूरी निष्ठा के साथ काम करने का आह्वान किया और DMK के दीर्घ एवं मज़बूत भविष्य की कामना की। आगामी चुनावी चुनौतियों के बीच यह स्थापना दिवस पार्टी के लिए संगठनात्मक एकजुटता का अवसर बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ज़मीनी नीतिगत प्रदर्शन होगी।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK की स्थापना कब और किसने की थी?
DMK की स्थापना 17 सितंबर 1949 को सी.एन. अन्नादुरई ने चेन्नई के रोयापुरम स्थित रॉबिन्सन पार्क में की थी। उन्होंने पेरियार ई.वी. रामासामी के नेतृत्व वाले द्रविड़र कझगम से अलग होकर यह पार्टी बनाई और चुनावी राजनीति में उतरने का फ़ैसला किया।
उद्धयनिधि स्टालिन ने स्थापना दिवस पर क्या कहा?
उद्धयनिधि स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि DMK ने राजनीति को विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे आम लोगों के हाथों तक पहुँचाया। उन्होंने पार्टी के मूल सिद्धांतों — सामाजिक न्याय, राज्याधिकार, महिला सशक्तिकरण — की भी याद दिलाई और कार्यकर्ताओं से शताब्दी की ओर निष्ठापूर्वक काम करने का आह्वान किया।
DMK ने तमिलनाडु में पहली बार सरकार कब बनाई?
DMK ने 1967 में अन्नादुरई के नेतृत्व में पहली बार तमिलनाडु में सरकार बनाई। इस जीत ने राज्य में कांग्रेस के दशकों पुराने प्रभुत्व को समाप्त किया और द्रविड़ राजनीति के एक नए युग की शुरुआत की।
DMK के काले और लाल रंग का क्या महत्व है?
काला और लाल DMK के पारंपरिक पार्टी रंग हैं, जो द्रविड़ आंदोलन की पहचान से जुड़े हैं। उद्धयनिधि स्टालिन ने स्थापना दिवस पर कहा, 'काला और लाल सिर्फ रंग नहीं हैं, बल्कि हमारी ज़िंदगी हैं।'
अन्नादुरई के बाद DMK का नेतृत्व किसने संभाला?
अन्नादुरई के निधन के बाद एम. करुणानिधि ने लगभग पाँच दशक तक DMK का नेतृत्व किया। वर्तमान में पार्टी की कमान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हाथों में है।
राष्ट्र प्रेस
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