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उदित राज ने एचआईवी टेस्ट अनिवार्यता, इसरो, जयशंकर-यूक्रेन और महिला भागीदारी पर रखा कांग्रेस का पक्ष

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उदित राज ने एचआईवी टेस्ट अनिवार्यता, इसरो, जयशंकर-यूक्रेन और महिला भागीदारी पर रखा कांग्रेस का पक्ष

सारांश

कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने एक ही प्रेस वार्ता में छह अलग-अलग मुद्दों पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया — एचआईवी टेस्ट की धार्मिक अनिवार्यता का विरोध, इसरो की सराहना के साथ वैज्ञानिक स्वायत्तता की मांग, और एफसीआरए विधेयक को अनुचित बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने 4 सितंबर को नई दिल्ली में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा।
मलंकारा मार थोमा सीरियन चर्च द्वारा विवाह-पूर्व एचआईवी टेस्ट अनिवार्य करने की मांग को उदित राज ने अनुचित बताया; जागरूकता और स्वैच्छिक जांच का समर्थन किया।
इसरो के नए सैटेलाइट लॉन्च पर वैज्ञानिकों को बधाई दी, साथ ही राजनीतिक हस्तक्षेप न करने की मांग की।
एफसीआरए संशोधन विधेयक को उन्होंने अनावश्यक बताया और सभी संगठनों की समान जांच की मांग की।
जयशंकर की यूक्रेन यात्रा को भारत की गुटनिरपेक्ष विदेश नीति के अनुरूप बताया।
तेलंगाना कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व के सवाल पर सामाजिक रूढ़िवाद और पारिवारिक जिम्मेदारियों को बाधा बताया।

कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने 4 सितंबर को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कई अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया — जिनमें केरल में शादी से पहले एचआईवी टेस्ट अनिवार्य करने की मांग, इसरो की उपलब्धि, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यूक्रेन यात्रा, एफसीआरए संशोधन विधेयक और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी कई सवाल खड़े किए।

एचआईवी टेस्ट अनिवार्यता पर कांग्रेस का रुख

मलंकारा मार थोमा सीरियन चर्च के पादरी और ट्रस्टी रेव. डॉ. के. थॉमस की ओर से विवाह-पूर्व जोड़ों के लिए एचआईवी टेस्ट अनिवार्य किए जाने की मांग पर उदित राज ने कहा कि समाज में एचआईवी के प्रति जागरूकता फैलाना ज़रूरी है और लोगों को स्वेच्छा से जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एचआईवी अब ऐसी बीमारी नहीं है जिससे केवल डरने की ज़रूरत हो — बचाव और उपचार के लिए पर्याप्त उपाय उपलब्ध हैं।

हालांकि उदित राज ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी धार्मिक संस्था द्वारा विवाह से पहले एचआईवी प्रमाणपत्र अनिवार्य करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, सलाह देना और बाध्यता थोपना — दोनों में बुनियादी फ़र्क है। डॉक्टर जागरूकता फैला सकते हैं, लेकिन किसी संस्था द्वारा इसे शर्त बनाना व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अतिक्रमण है।

इसरो की उपलब्धि और वैज्ञानिकों की स्वायत्तता

इसरो के नए सैटेलाइट लॉन्च और अंतरिक्ष से पृथ्वी की मैपिंग करने वाली तकनीक पर उदित राज ने इसरो के चेयरमैन और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने देश का गौरव बढ़ाया है और ऐसी उपलब्धियां निश्चित रूप से प्रशंसनीय हैं।

साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वैज्ञानिकों को अपना काम और उसकी तकनीकी जानकारी खुद समझाने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक नेतृत्व को वैज्ञानिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

जयशंकर की यूक्रेन यात्रा और भारत की विदेश नीति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यूक्रेन के राष्ट्रपति से मुलाकात पर उदित राज ने कहा कि यूक्रेन को भारत का शत्रु देश नहीं माना जा सकता और भारत के कई देशों के साथ राजनयिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें विभिन्न देशों से संबंध बनाए रखते हुए राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए।

उदित राज ने याद दिलाया कि गुटनिरपेक्षता की नींव पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में रखी गई थी और आज भी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने की परंपरा बनाए रखना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समीकरण समय के साथ बदलते हैं, इसलिए भारत को लचीले लेकिन सिद्धांत-आधारित रुख के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

एफसीआरए संशोधन विधेयक और ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया

एफसीआरए संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के गठन पर उदित राज ने कहा कि उनकी दृष्टि में यह विधेयक ही उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एफसीआरए में पहले भी कई बार संशोधन हो चुके हैं और अब इसे और कड़ा करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन संस्थाओं की पहले से कड़ी जांच होती है, उन्हें बार-बार निगरानी के दायरे में लाया जा रहा है, जबकि सभी संगठनों के वित्तीय स्रोतों की समान रूप से जांच होनी चाहिए।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को व्यक्तिगत समर्थन की बात कही थी — उदित राज ने इसे क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसी ताकतों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई राजनीतिक समझौता हुआ है तो उसे उसी परिप्रेक्ष्य में समझा जाना चाहिए — राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी स्थिति न है, न होनी चाहिए।

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी

तेलंगाना कैबिनेट से महिला मंत्री कोंडा सुरेखा को हटाए जाने के सवाल पर उदित राज ने कहा कि यह कार्रवाई अनुशासनहीनता के आरोपों के संदर्भ में हुई है और राजनीति में पद स्थायी नहीं होते। जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी महिलाओं को आगे लाने की बात करते हैं, जबकि तेलंगाना कैबिनेट में महिला मंत्रियों की संख्या कम है, तो उन्होंने कहा कि दोनों प्रसंगों को अलग-अलग संदर्भ में देखना चाहिए।

उदित राज ने स्वीकार किया कि देश में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दर अभी भी कम है और इसमें बदलाव आने में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूढ़िवाद, पारिवारिक जिम्मेदारियां और बचपन से लड़कियों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां — ये सभी कारक महिलाओं के राजनीतिक प्रवेश को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रोत्साहित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए व्यापक सामाजिक बदलाव भी उतने ही अनिवार्य हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सैद्धांतिक रूप से सही है, पर यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि कांग्रेस-शासित राज्यों में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए पार्टी की अपनी नीति क्या है। महिला भागीदारी पर उनका बयान — जिसमें पारिवारिक जिम्मेदारियों को बाधा बताया गया — तेलंगाना कैबिनेट में महिला मंत्रियों की कम संख्या पर असुविधाजनक सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। मुख्यधारा की कवरेज इन अंतर्विरोधों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदित राज ने शादी से पहले एचआईवी टेस्ट अनिवार्य करने की मांग पर क्या कहा?
उदित राज ने कहा कि समाज में एचआईवी जागरूकता ज़रूरी है और लोगों को स्वेच्छा से जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, लेकिन किसी धार्मिक संस्था द्वारा विवाह से पहले एचआईवी प्रमाणपत्र अनिवार्य करना उचित नहीं है। उनके अनुसार सलाह देना और बाध्यता थोपना दो अलग बातें हैं।
एफसीआरए संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने एफसीआरए संशोधन विधेयक को ही अनुचित बताया और कहा कि इस कानून में पहले भी कई बार संशोधन हो चुके हैं, इसे और कड़ा करने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने मांग की कि सभी संस्थाओं और संगठनों के वित्तीय स्रोतों की समान रूप से जांच होनी चाहिए।
जयशंकर की यूक्रेन यात्रा पर उदित राज ने क्या कहा?
उदित राज ने कहा कि यूक्रेन भारत का शत्रु देश नहीं है और भारत की विदेश नीति को राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न देशों से संबंध बनाए रखने चाहिए। उन्होंने पंडित नेहरू की गुटनिरपेक्षता की परंपरा का हवाला देते हुए स्वतंत्र विदेश नीति की वकालत की।
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कम होने पर उदित राज ने क्या कहा?
उदित राज ने कहा कि देश में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दर अभी भी कम है और सामाजिक रूढ़िवाद, पारिवारिक जिम्मेदारियां तथा बचपन से लड़कियों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां राजनीतिक प्रवेश को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। उन्होंने कहा कि इसमें बदलाव के लिए व्यापक सामाजिक परिवर्तन ज़रूरी है।
ओवैसी के रेवंत रेड्डी को समर्थन वाले बयान पर कांग्रेस ने क्या कहा?
उदित राज ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर BJP और RSS जैसी ताकतों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई राजनीतिक समझौता हुआ है तो उसे उसी परिप्रेक्ष्य में समझा जाना चाहिए — राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
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