पश्चिम बंगाल मंत्री उमेश राय का महाकाल मंदिर में वादा, पुजारियों का मानदेय होगा बहाल
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार के शहरी विकास राज्यमंत्री उमेश राय ने 13 जुलाई 2026 को उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर पहुँचकर पुजारियों से भेंट की और उन्हें आश्वासन दिया कि पश्चिम बंगाल में बंद किए गए पुजारियों के मानदेय को पुनः बहाल कराने के लिए वे मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब राज्य में मंदिरों के पुजारियों और मस्जिदों के मौलवियों दोनों के वेतन बंद किए जाने के निर्णय को लेकर धार्मिक समुदायों में असंतोष बढ़ रहा है।
मुलाकात का घटनाक्रम
मंत्री उमेश राय महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। इस अवसर का लाभ उठाते हुए पुजारी महासंघ ने उन्हें अपने आश्रम में आमंत्रित किया और पश्चिम बंगाल में पुजारियों का मानदेय बंद किए जाने का मुद्दा विस्तार से उनके सामने रखा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि मंत्री ने पश्चिम बंगाल लौटने के बाद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी से इस विषय पर चर्चा करने और सकारात्मक समाधान निकालने का भरोसा दिया है।
पुजारियों की मुख्य माँग
पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद मस्जिदों के मौलवियों के साथ-साथ मंदिरों के पुजारियों का वेतन भी बंद कर दिया गया, जिससे मंदिरों की नियमित पूजा-पद्धति प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई। उन्होंने तर्क दिया कि यह निर्णय सनातन धर्म की भावना के अनुरूप नहीं है और यदि सरकार स्वयं को सनातन परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध मानती है, तो पुजारियों का मानदेय पुनः शुरू किया जाना चाहिए।
सामाजिक समरसता का पहलू
महेश शर्मा ने इस मुद्दे को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में पुजारी के रूप में केवल ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि दलित, आदिवासी, गुर्जर और अन्य समाजों के लोग भी सेवाएँ देते हैं। ऐसे में मानदेय बंद होने का असर किसी एक वर्ग पर नहीं, बल्कि समाज के सभी तबकों से आए पुजारियों पर पड़ता है। यह दलील सामाजिक समरसता के उस तर्क को रेखांकित करती है जो इस विवाद को व्यापक जनसमुदाय से जोड़ती है।
मंत्री का आश्वासन और आगे की राह
मंत्री उमेश राय ने महाकाल मंदिर परिसर में पुजारियों को भरोसा दिलाया कि वे पश्चिम बंगाल लौटकर मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी से इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पुजारियों के मानदेय और उनकी समग्र व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार स्तर पर सकारात्मक प्रयास किए जाएँगे और एक उपयुक्त योजना तैयार करने पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि यह आश्वासन अभी मौखिक है और इसके क्रियान्वयन की कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई है। आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार के रुख पर पुजारी समुदाय की नज़र बनी रहेगी।