यूपी-जापान हेल्थकेयर साझेदारी: 400 एकड़ मेडिकल टेक पार्क और रोबोटिक्स में निवेश की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 21 अगस्त को आयोजित यूपी-जापान हेल्थकेयर एंड केयर इकॉनामी पार्टनरशिप के सेक्टोरल सेशन में उत्तर प्रदेश और जापान के बीच हेल्थकेयर, मेडिकल एजुकेशन, रोबोटिक्स, फार्मा और कुशल मानव संसाधन के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विशाल युवा आबादी और जापान की अत्याधुनिक तकनीक का संयोजन दोनों देशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में नए द्वार खोल सकता है।
उपमुख्यमंत्री का संबोधन: बुनियादी ढाँचे से बना निवेश का माहौल
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे, एयर कनेक्टिविटी, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के विकास ने प्रदेश को निवेश के लिए अनुकूल बनाया है।
पाठक ने बताया कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 47 से बढ़कर 83 से अधिक हो चुकी है और नर्सिंग कॉलेज भी तेज़ी से विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस, एमडी, नर्सिंग और पैरामेडिकल सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जापान में प्रशिक्षित मानव संसाधन की बढ़ती माँग को देखते हुए उत्तर प्रदेश डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल तकनीशियन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जापानी कंपनियों की ज़रूरतों के अनुरूप युवाओं को जापानी भाषा और कार्य संस्कृति का प्रशिक्षण देने की योजना भी रखी गई।
मेडिकल टेक पार्क और रोबोटिक्स: अपर मुख्य सचिव का खाका
अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित घोष ने बताया कि हाल के निवेश कार्यक्रम में फार्मा क्षेत्र में एक ही दिन 12 कंपनियों के साथ एमओयू किए गए। जापानी कंपनियाँ उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए इच्छुक हैं और प्रदेश जापानी तकनीक को यहाँ लाने के प्रयास में है। उन्होंने कहा कि जापान के सहयोग से रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी की नई संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
घोष ने बताया कि करीब 400 एकड़ में मेडिकल टेक पार्क विकसित करने की योजना है। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में जापानी निवेशकों और कंपनियों की भागीदारी की संभावनाएँ भी तलाशी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जापान की कार्य संस्कृति और तकनीकी दक्षता के साथ उत्तर प्रदेश का विकसित होता हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर एक मज़बूत मॉडल तैयार कर सकता है।
कौशल विकास और भाषा प्रशिक्षण: युवाओं के लिए वैश्विक अवसर
व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल का उत्तर प्रदेश आना दोनों देशों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि निवेशकों के लिए वन-विंडो सिस्टम के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है और युवाओं को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कौशल विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क है और प्रदेश हर वर्ष लाखों युवाओं को प्रशिक्षित करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि जापान से माँग-आधारित स्पष्ट प्रस्ताव मिलने पर जापानी भाषा, तकनीकी कौशल, केयरगिविंग और कार्यस्थल व्यवहार पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि जापानी उद्योगों की ज़रूरतों को समझते हुए डिमांड बेस्ड ट्रेनिंग, आधुनिक ट्रेड, भाषा प्रशिक्षण और कार्य संस्कृति को प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है।
जापान की वृद्ध होती आबादी और भारत की युवा शक्ति: एक पूरक समीकरण
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम ने रेखांकित किया कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है, जबकि जापान तेज़ी से वृद्ध होती आबादी और श्रमिकों की कमी की चुनौती से जूझ रहा है। आने वाले वर्षों में जापान में केयरगिविंग, कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित श्रमिकों की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि ई-श्रम पोर्टल पर देश और प्रदेश के करोड़ों श्रमिक पंजीकृत हैं और सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रवासन के ज़रिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोज़गार बाज़ार से जोड़ा जा सकता है।
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि 'हर हाथ को काम' सरकार का संकल्प है और इसे देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोज़गार के अवसरों से जोड़कर पूरा किया जाएगा। स्टेप फाउंडेशन की डायरेक्टर मानसी कसलीवाल ने केयर स्किल्स टेस्ट, जापानी भाषा, नर्सिंग केयर लैंग्वेज और वर्कप्लेस बिहेवियरल रेडिनेस पर आधारित प्रशिक्षण मॉडल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। सी2सी इंडिया के सीईओ राणा धीरज ने कहा कि उत्तर प्रदेश जापान के लिए प्रतिभाशाली और प्रशिक्षित मानव संसाधन का बड़ा स्रोत बन सकता है।
यह सेक्टोरल सेशन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत-जापान द्विपक्षीय संबंध नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। निवेश, तकनीकी हस्तांतरण, मेडिकल शिक्षा, रोबोटिक्स और रोज़गार के क्षेत्रों में प्रस्तावित सहयोग से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत-जापान आर्थिक संबंधों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।