उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की नई लहर: 9 वर्षों में 17,841 नए कारखाने पंजीकृत
सारांश
Key Takeaways
- पिछले 9 वर्षों में 17,841 नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं।
- प्रदेश में कुल कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंची।
- योगी सरकार ने निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
- औद्योगिक विकास ने रोजगार के अवसरों में वृद्धि की है।
- महिलाओं की कार्यशक्ति में लगातार वृद्धि हो रही है।
लखनऊ, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले नौ वर्षों में औद्योगिक विकास की दिशा में एक नवीन पहचान स्थापित की है। सरकार के सशक्त प्रशासन, स्पष्ट नीतियों और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है कि अप्रैल 2017 से अब तक 17,841 नए कारखाने पंजीकृत किए गए हैं।
यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की स्वतंत्रता के बाद, मार्च 2017 तक लगभग 70 वर्षों में केवल 14,178 कारखाने पंजीकृत किए गए थे। वर्तमान में प्रदेश में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच चुकी है। प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है।
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए योगी सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाने, निवेश के अनुकूल वातावरण और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर जोर दिया। इसके साथ ही, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एकल खिड़की प्रणाली, ऑनलाइन मंजूरी, भूमि बैंक, बेहतर कानून-व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाओं का विकास किया गया। यही कारण है कि देश-विदेश के निवेशकों का विश्वास उत्तर प्रदेश पर बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2017 के बाद 17,841 कारखाने पंजीकृत हुए हैं, जो राज्य में औद्योगिक गतिविधियों की तेज रफ्तार को दर्शाते हैं। केवल सितंबर 2023 से अब तक, 10,194 कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं। अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत इन कारखानों में वर्तमान में 16,53,179 लोग कार्यरत हैं, जिनमें 15,29,907 पुरुष और 1,23,272 महिलाएं शामिल हैं।
प्रमुख सचिव ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10,895, मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखाने पंजीकृत हुए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार ने क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करते हुए हर क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इन कारखानों के माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन भी तेजी से हुआ है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कारखानों में कार्यरत महिलाओं की भागीदारी भी निरंतर बढ़ रही है, जो प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का संकेत है। प्रदेश में 14,412 कारखाने ऐसे हैं जिनमें 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं जबकि 3,213 कारखानों में 101 से 1000 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी तरह 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं जिनमें 1000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। यह दर्शाता है कि योगी सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी समान रूप से प्रोत्साहित किया है। इससे प्रदेश की औद्योगिक संरचना मजबूत हुई है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि औद्योगिक विकास में कानून-व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
योगी सरकार ने इस क्षेत्र में सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को नई गति दी है। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि तेजी से औद्योगिक राज्य के रूप में उभर रहा है। नए कारखानों ने न केवल रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है, जिससे प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।