यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में 'पंडित' शब्द पर विवाद, नेताओं ने दी प्रतिक्रियाएँ
सारांश
Key Takeaways
- 'पंडित' शब्द के उपयोग पर विवाद ने सामाजिक मुद्दों को उजागर किया है।
- भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने इस पर अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं।
- जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- जातिगत भेदभाव का मुद्दा समाज में प्रासंगिक है।
देवरिया, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में 'पंडित' शब्द के उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, जिस पर भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
राष्ट्र प्रेस को दिए गए बयान में उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर इसे उनके संज्ञान में लाया। इस मामले की जांच भी शुरू हो चुकी है।
शलभ मणि त्रिपाठी ने आगे बताया कि पुलिस भर्ती बोर्ड ने जांच के संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने इसे इरादतन किया गया कृत्य करार दिया और कहा कि कुछ समय से सामाजिक वातावरण को खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जो भी अपराधी है, उसे चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा विधायक राकेश गोस्वामी ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में एक प्रश्न में 'अवसरवादी' के विकल्प के रूप में 'पंडित' शब्द का उपयोग किया गया था। यह गलत मानसिकता का परिणाम है। ऐसी सोच वाला व्यक्ति समाज के हित में कार्य नहीं कर सकता। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी ने कहा कि जब कोई विशेष जाति को निशाना बनाता है, तो इससे समाज में विभाजन उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि हर वर्ग और धर्म के लोग हर जगह मौजूद हैं। इस मामले की जांच होनी चाहिए और जांच के परिणामों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पंडितों को बदनाम क्यों किया जा रहा है? उन्होंने सवाल किया कि क्या यह कोई साजिश है? जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और जनता को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।