उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण: योगी सरकार के 9 साल में 1 करोड़ महिलाएं SHG से जुड़ीं, अपराध दर में गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2017 से लागू 'डबल इंजन' शासन मॉडल ने महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव लाए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के अपहरण के मामले 2016 के 13,014 से घटकर 2024 में 7,919 रह गए हैं। केंद्र की योजनाओं और राज्य के प्रभावी क्रियान्वयन के इस समन्वय ने लाखों महिलाओं के जीवन में ठोस परिवर्तन किए हैं।
महिला सुरक्षा: पुलिस बल से पिंक पेट्रोलिंग तक
योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही महिला सुरक्षा को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया। प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन किया गया, महिला हेल्पलाइन 1090 को सुदृढ़ किया गया और महिला हेल्प डेस्क की स्थापना की गई। पुलिस भर्ती में महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के परिणामस्वरूप प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 2017 के लगभग 10,000 से बढ़कर अब 44,000 से अधिक हो गई है।
आज प्रदेश के लगभग हर जिले में महिला बीट पुलिसिंग, पिंक पेट्रोलिंग और महिला हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाएं सक्रिय हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार दहेज उत्पीड़न और हत्या की दर 2016 में प्रति लाख महिलाओं पर 2.4 थी, जो 2024 में घटकर 1.8 रह गई है। इसी प्रकार रेप की दर 2016 की 4.6 से घटकर 2.8 पर आ गई है।
उज्ज्वला योजना और स्वास्थ्य सुरक्षा
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य बनाता है। पहले ग्रामीण महिलाएं लकड़ी, उपले और कोयले से खाना बनाती थीं, जिससे आंखों और फेफड़ों की गंभीर बीमारियाँ होती थीं। इस योजना ने न केवल उनके स्वास्थ्य की रक्षा की, बल्कि समय और श्रम की भी बचत की, जिससे महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है।
स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी अभियान
आर्थिक आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में लगभग 1 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ा गया है। ये महिलाएं डेयरी, कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प और सिलाई-कढ़ाई जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से आय अर्जित कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए लखपति दीदी अभियान — जिसका उद्देश्य SHG से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक करना है — को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू किया गया। अब तक 18.55 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह पहल महिलाओं को सहायता प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।
कन्या सुमंगला योजना और बेटियों का भविष्य
योगी सरकार की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक विभिन्न चरणों में कुल ₹25,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। अब तक 27.37 लाख से अधिक बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है। इस योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकना और बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।
मिशन शक्ति और सामाजिक जागरूकता
मिशन शक्ति अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग हुई हैं। आगे की राह में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतिगत उपलब्धियाँ जमीनी स्तर पर महिलाओं के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक उत्थान में किस हद तक परिवर्तित होती हैं।