यूपीआई चार्ज पर कांग्रेस के दावे गलत, ग्राहक की जेब पर कोई बोझ नहीं: शिवसेना के संजय निरुपम
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 16 सितंबर को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क को लेकर कांग्रेस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ग्राहकों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं डाला जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने दिशा सालियान मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर भी अपना पक्ष रखा।
यूपीआई शुल्क पर कांग्रेस के दावे और निरुपम का खंडन
निरुपम ने कहा कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई (UPI) लेनदेन पर कोई कर या सरचार्ज नहीं लगेगा। उनके अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता किसी व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान करता है और उस पर कोई निर्धारित शुल्क लागू होता है, तो उस शुल्क का वहन व्यापारी द्वारा किया जाएगा — ग्राहक की जेब से अतिरिक्त राशि नहीं कटेगी।
निरुपम ने यह भी कहा कि कांग्रेस और उससे जुड़े राजनीतिक तंत्र द्वारा यह प्रचार किया जा रहा है कि ऐसे शुल्क से प्राप्त धन विदेशी कंपनियों के पास चला जाएगा। उन्होंने इस दावे को निराधार बताते हुए कहा कि भारत में यूपीआई का पूरा भुगतान ढाँचा भारतीय बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
फोन पे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्मों में विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए निरुपम ने स्पष्ट किया कि यूपीआई लेनदेन में धन का प्रवाह भारतीय बैंकों के माध्यम से होता है। उनके अनुसार, भुगतान करने वाले व्यक्ति के बैंक, व्यापारी के बैंक और संबंधित यूपीआई प्लेटफॉर्म से जुड़े बैंकिंग ढाँचे के बीच होने वाले लेनदेन को केवल इस आधार पर 'अमेरिका जाने वाला पैसा' बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
दिशा सालियान मामले में CBI जांच पर स्थिति
दिशा सालियान की मृत्यु के मामले में CBI द्वारा दर्ज एफआईआर पर निरुपम ने कहा कि कुछ राजनीतिक पक्ष इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले दिशा सालियान के परिवार की न्याय की लड़ाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि उनके पिता पिछले कई वर्षों से अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
निरुपम ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से वह दोषी सिद्ध नहीं हो जाता। जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच करनी होती है और उसके बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होती है।
गौरतलब है कि निरुपम के अनुसार, CBI को जांच का निर्देश महाराष्ट्र सरकार ने नहीं, बल्कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने दिशा सालियान के पिता की याचिका पर दिया है। इसलिए इस जांच को विशुद्ध राजनीतिक निर्णय बताना उचित नहीं है। पुलिस की पिछली जांच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब पहले मामले की जांच की गई और उसे बंद किया गया, उस समय उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे और उस दौरान पुलिस पर राजनीतिक प्रभाव रहा होगा।
PM मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन पर निरुपम का आकलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए निरुपम ने उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने और करीब 12 वर्षों तक राज्य का नेतृत्व किया। इसके बाद वे पिछले करीब 13 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री हैं।
निरुपम ने कहा कि राजनीति में लंबे समय तक जनता का विश्वास बनाए रखना सरल नहीं होता और लगातार चुनावी सफलता इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व को जनसमर्थन मिला है। यह उनका व्यक्तिगत आकलन है।
निरुपम की मोदी से पुरानी मुलाकात का ज़िक्र
प्रधानमंत्री के साथ अपनी पुरानी मुलाकातों को याद करते हुए निरुपम ने बताया कि 2003-04 के दौरान अहमदाबाद में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात हुई थी। उस समय उद्धव ठाकरे भी उनके साथ थे और उन्होंने अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया था। निरुपम के अनुसार, उस मुलाकात में मोदी की बातचीत में स्पष्टता और आम लोगों तक लाभ पहुँचाने का दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई दिया।
आगे क्या होगा
CBI की जांच पूरी होने के बाद दिशा सालियान मामले में स्थिति स्पष्ट होगी। यूपीआई शुल्क विवाद पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। निरुपम की प्रेस कॉन्फ्रेंस से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ गठबंधन डिजिटल भुगतान नीति पर विपक्ष के आरोपों का सक्रिय रूप से प्रतिवाद करने की रणनीति पर चल रहा है।