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यूपीआई चार्ज पर कांग्रेस भ्रम फैला रही है, ग्राहक की जेब से पैसा नहीं जाएगा: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम

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यूपीआई चार्ज पर कांग्रेस भ्रम फैला रही है, ग्राहक की जेब से पैसा नहीं जाएगा: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने साफ़ कहा — यूपीआई पर कांग्रेस भ्रम फैला रही है। ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतान पर शुल्क ग्राहक नहीं, व्यापारी देगा। साथ ही दिशा सालियान CBI जांच को बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश बताते हुए राजनीतिकरण को नकारा।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई लेनदेन पर कोई टैक्स या सरचार्ज नहीं लगेगा; ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतान पर शुल्क ग्राहक नहीं, व्यापारी देगा।
निरुपम ने कांग्रेस के 'विदेशी कंपनियों को पैसा जाने' के दावे को खारिज किया; कहा — यूपीआई भुगतान ढाँचा भारतीय बैंकों से जुड़ा है।
दिशा सालियान मामले में CBI जांच का आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया है, न कि महाराष्ट्र सरकार ने।
PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर निरुपम ने उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन शुल्क को लेकर कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया और स्पष्ट किया कि ग्राहकों की जेब से कोई अतिरिक्त राशि नहीं जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने दिशा सालियान मामले में सीबीआई (CBI) जांच और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर भी अपनी राय रखी।

यूपीआई चार्ज पर कांग्रेस के दावे और निरुपम का खंडन

निरुपम ने कहा कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर कोई टैक्स या सरचार्ज नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई ग्राहक किसी व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान करता है और उस पर कोई निर्धारित शुल्क लागू होता है, तो उसकी अदायगी व्यापारी की ओर से की जाएगी — ग्राहक से कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई शुल्क को लेकर सोशल मीडिया और विपक्षी दलों में बड़ी बहस छिड़ी हुई है। कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों को निरुपम ने 'राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश' बताया।

विदेशी कंपनियों को पैसा जाने के दावे को खारिज किया

निरुपम ने कांग्रेस के उस दावे को भी नकारा, जिसमें कहा गया था कि यूपीआई शुल्क से प्राप्त धनराशि विदेशी कंपनियों के पास चली जाएगी। उन्होंने कहा कि फोन पे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म में विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी ज़रूर है, लेकिन यूपीआई लेनदेन में धन का प्रवाह भारतीय बैंकों के माध्यम से होता है।

निरुपम के अनुसार, भुगतानकर्ता के बैंक, व्यापारी के बैंक और संबंधित यूपीआई प्लेटफॉर्म से जुड़े बैंकिंग ढाँचे में होने वाले लेनदेन को केवल इस आधार पर 'अमेरिका जाने वाला पैसा' बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। गौरतलब है कि भारत में यूपीआई का पूरा भुगतान ढाँचा भारतीय बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

दिशा सालियान मामले में सीबीआई जांच पर रुख

दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज सीबीआई एफआईआर पर निरुपम ने कहा कि इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जांच का आदेश महाराष्ट्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी (BJP)-शिवसेना सरकार ने नहीं, बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा के पिता की याचिका पर दिया है।

निरुपम ने कहा कि एफआईआर में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से वह दोषी नहीं हो जाता — जाँच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करनी होती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पहले जब मामले की जाँच बंद की गई थी, उस समय उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे और उस दौरान पुलिस पर राजनीतिक प्रभाव रहा होगा — यह उनका व्यक्तिगत आकलन है।

PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर निरुपम ने उनकी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने और लगभग 12 वर्षों तक राज्य की सत्ता संभाली। इसके बाद वे पिछले करीब 13 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री हैं।

निरुपम ने अपनी पुरानी मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि 2003-04 के दौरान अहमदाबाद में उन्हें मोदी से मिलने का अवसर मिला था, जब उद्धव ठाकरे भी उनके साथ थे और उन्होंने अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया था। यह निरुपम का व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन है।

आगे क्या

दिशा सालियान मामले में सीबीआई की जाँच जारी है और निरुपम के अनुसार जाँच पूरी होने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। यूपीआई शुल्क विवाद पर सरकार और विपक्ष के बीच नीतिगत बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने के आसार हैं, विशेषकर डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे को देखते हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि व्यापारियों पर पड़ने वाले इस शुल्क का बोझ अंततः उपभोक्ता कीमतों में तब्दील होगा या नहीं — यह पहलू प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनुत्तरित रहा। दिशा सालियान मामले में पूर्व सरकार पर 'राजनीतिक प्रभाव' का आरोप लगाते हुए निरुपम खुद एक राजनीतिक बयान दे रहे हैं — जो उनके 'राजनीतिकरण न करें' के आह्वान से विरोधाभासी लगता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के अनुसार, व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई लेनदेन पर कोई टैक्स या सरचार्ज नहीं लगेगा। ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतान पर यदि कोई शुल्क लागू होता है, तो उसका भुगतान व्यापारी की ओर से किया जाएगा, ग्राहक की जेब से नहीं।
क्या यूपीआई का पैसा विदेशी कंपनियों के पास जाता है?
निरुपम ने इस दावे को खारिज किया है। उनके अनुसार फोन पे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म में विदेशी हिस्सेदारी होने के बावजूद यूपीआई लेनदेन में धन का प्रवाह भारतीय बैंकों के माध्यम से होता है और पूरा भुगतान ढाँचा भारतीय बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ा है।
दिशा सालियान मामले में सीबीआई जांच का आदेश किसने दिया?
निरुपम ने बताया कि यह आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान के पिता की याचिका पर दिया है, न कि महाराष्ट्र सरकार या BJP-शिवसेना सरकार ने। जांच पूरी होने के बाद ही साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
संजय निरुपम ने पहले की पुलिस जांच पर क्या कहा?
निरुपम ने कहा कि जब दिशा सालियान मामले की पहले जांच हुई और उसे बंद किया गया, उस समय उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। उनके अनुसार उस दौरान पुलिस पर राजनीतिक प्रभाव रहा होगा — हालांकि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है।
PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष कब पूरे हुए?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और तब से लगभग 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन पूरा हो गया है। इनमें करीब 12 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री और करीब 13 वर्ष देश के प्रधानमंत्री के रूप में शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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