वाइब्रेंट विलेज योजना-2: जैसलमेर के 30 सरहदी गांवों में ₹90 लाख प्रति गांव से बदलेगी तस्वीर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संचालित वाइब्रेंट विलेज योजना-2 के तहत राजस्थान के जैसलमेर जिले के भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 30 गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, 4जी मोबाइल नेटवर्क, टेलीविजन कनेक्टिविटी और रोजगार सुविधाओं के विस्तार को मंजूरी दे दी गई है। प्रत्येक गांव में ₹90 लाख की लागत से स्मार्ट क्लास, डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाएंगे, जिससे सरहदी क्षेत्रों में बसे ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर होगा।
मुख्य घटनाक्रम और कवरेज
जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, इस योजना के तहत देशभर में कुल 184 गांवों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से करीब 30 गांव अकेले जैसलमेर जिले से हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, पलायन रोकना और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
कौन-कौन से गांव शामिल
जिले के सम, मोहनगढ़ और नाचना ब्लॉक के कुल 30 गांव इस योजना का हिस्सा बनाए गए हैं। सम ब्लॉक से सर्वाधिक 26 गांव चयनित किए गए हैं, जिनमें किशनगढ़, तेजपाला, तनोट, साधेवाला, रतड़ाऊ, बछिया छोर, लिलोई, पीराऊ, गणेशिया, हरनाऊ, धनाना, मीठराऊ खारा, म्याजलार, लुनार, गुंजनगढ़, पोछीना, बड्डा, घोटारू, लोंगेवाला, कोलूतला, गमनेवाला, मुकने का तला, गजुओं की बस्ती, केरला, करड़ा और बींजराज का तला शामिल हैं। इसके अलावा नाचना ब्लॉक के भारेवाला और मोहनगढ़ ब्लॉक के शास्त्रीनगर, बाहला तथा भूटोवाला गांव भी इस सूची में हैं।
क्रियान्वयन की रणनीति
कलेक्टर जोरवाल ने बताया कि प्रत्येक गांव के लिए अलग-अलग ‘विलेज एक्शन प्लान’ तैयार किया जाएगा और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थानीय इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। यह दृष्टिकोण सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्र में नागरिक विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।
गृह मंत्री शाह की प्राथमिकता
हाल ही में बीकानेर दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती गांवों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। उन्होंने विशेष रूप से मोबाइल नेटवर्क कवरेज और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि सीमा पर बसे लोग अपने गांवों में रहकर ही बेहतर जीवनयापन कर सकें और परोक्ष रूप से देश की सुरक्षा में भी सहभागी बने रहें।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम मूलतः उत्तरी सीमा (चीन सीमा से सटे गांवों) के लिए शुरू किया गया था, और इसका दूसरा चरण अब पश्चिमी सीमा को भी कवर कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से हुआ तो ये सरहदी गांव केवल सीमा क्षेत्र की पहचान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पर्यटन और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बनकर उभर सकते हैं। आने वाले महीनों में विलेज एक्शन प्लान की रूपरेखा और फंड वितरण की पहली किस्त पर सबकी नज़र रहेगी।