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विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल बढ़ा, अगले आदेश तक पद पर रहेंगे — ACC ने दी मंजूरी

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विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल बढ़ा, अगले आदेश तक पद पर रहेंगे — ACC ने दी मंजूरी

सारांश

भारत के कई जटिल कूटनीतिक मोर्चों के बीच केंद्र सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। 14 जुलाई को समाप्त होने वाला कार्यकाल अब अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा — ब्रिक्स अध्यक्षता और प्रमुख द्विपक्षीय बैठकों से पहले यह निर्णय नीतिगत निरंतरता का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ाने की मंजूरी दी।
मिस्री का मौजूदा कार्यकाल 14 जुलाई 2025 को समाप्त होना था।
आदेश DoPT द्वारा मूलभूत नियम 56(D) के प्रावधानों के तहत जारी किया गया।
मिस्री 1989 बैच के IFS अधिकारी हैं और 2024 से विदेश सचिव पद पर हैं।
वह चीन और म्यांमार में भारत के राजदूत रह चुके हैं।
यह निर्णय ब्रिक्स अध्यक्षता , जी20 कदमों और प्रमुख द्विपक्षीय बैठकों की तैयारी के बीच आया है।

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल तय समय से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी मिस्री को अगले आदेश तक इस पद पर बनाए रखने की मंजूरी दी है — उनका मौजूदा कार्यकाल 14 जुलाई 2025 को समाप्त होना था। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत कई जटिल कूटनीतिक मोर्चों पर एक साथ सक्रिय है।

आदेश का आधार और प्रक्रिया

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश मूलभूत नियम 56(D) के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्यकाल विस्तार सरकार के मिस्री के नेतृत्व पर भरोसे और भारत की विदेश नीति में निरंतरता बनाए रखने की आवश्यकता को देखते हुए लिया गया निर्णय है।

विक्रम मिस्री: अनुभव और भूमिका

विक्रम मिस्री 2024 में विदेश सचिव नियुक्त हुए थे और तब से भारत की विदेश नीति को दिशा देने वाली प्रमुख भूमिका में हैं। वह म्यांमार और चीन में भारत के राजदूत रह चुके हैं और पाकिस्तान तथा यूरोप में भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं। क्वाड देशों, अमेरिका और यूरोपीय भागीदारों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।

संकट प्रबंधन में भी मिस्री की साख मजबूत रही है — संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी और रक्षा एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच निर्णय का महत्व

गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब दुनिया में कई बड़े भू-राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं — पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी तनाव, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती स्थिति, ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका, तथा चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दे। ऐसे में एक अनुभवी और संस्थागत समझ रखने वाले राजनयिक की निरंतरता नीति-निर्माण के लिहाज से अहम मानी जाती है।

आगामी कूटनीतिक कार्यक्रम

भारत इस समय कई बड़े कूटनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी में है, जिनमें ब्रिक्स की मौजूदा अध्यक्षता से जुड़े आयोजन, जी20 से संबंधित संभावित कदम और कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें शामिल हैं। इन सभी मोर्चों पर मिस्री की निरंतर उपस्थिति को नीतिगत स्थिरता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पूर्व मिसालें और संदर्भ

यह पहली बार नहीं है जब मौजूदा सरकार के कार्यकाल में किसी वरिष्ठ अधिकारी का कार्यकाल बढ़ाया गया हो। महत्वपूर्ण पदों पर दीर्घ अनुभव और संस्थागत स्मृति वाले अधिकारियों को बनाए रखने की यह प्रवृत्ति सरकार की स्थापित नीतिगत पद्धति का हिस्सा रही है। मिस्री का कार्यकाल विस्तार इसी परंपरा की अगली कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकार की कूटनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत है — खासतौर पर तब जब ब्रिक्स अध्यक्षता, इंडो-पैसिफिक समीकरण और पड़ोसी देशों के साथ नाजुक रिश्ते एक साथ प्रबंधित करने हैं। 'अगले आदेश तक' की अनिश्चित अवधि यह भी बताती है कि सरकार फिलहाल उत्तराधिकार की कोई समयसीमा तय नहीं करना चाहती। यह लचीलापन रणनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन वरिष्ठ राजनयिक पदों पर संस्थागत योजना और पारदर्शिता के सवाल भी उठाता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम मिस्री का कार्यकाल क्यों बढ़ाया गया?
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय सरकार के मिस्री के नेतृत्व पर भरोसे और भारत की विदेश नीति में निरंतरता बनाए रखने की आवश्यकता को देखते हुए लिया गया है। ब्रिक्स अध्यक्षता और कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों की पृष्ठभूमि में यह कदम कूटनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विक्रम मिस्री का नया कार्यकाल कब तक है?
ACC के आदेश के अनुसार मिस्री अब 'अगले आदेश तक' विदेश सचिव पद पर बने रहेंगे। उनका पूर्व निर्धारित कार्यकाल 14 जुलाई 2025 को समाप्त होना था।
विक्रम मिस्री कौन हैं और उनका अनुभव क्या है?
विक्रम मिस्री 1989 बैच के IFS अधिकारी हैं जो 2024 से विदेश सचिव हैं। वह चीन और म्यांमार में भारत के राजदूत रह चुके हैं और पाकिस्तान, यूरोप तथा अमेरिका में भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं।
यह आदेश किस नियम के तहत जारी हुआ?
DoPT द्वारा जारी यह आदेश मूलभूत नियम 56(D) के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। यह नियम सरकार को सेवानिवृत्ति की उम्र या कार्यकाल सीमा के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा में बनाए रखने का अधिकार देता है।
इस फैसले का भारत की विदेश नीति पर क्या असर होगा?
मिस्री का कार्यकाल विस्तार भारत की विदेश नीति में निरंतरता सुनिश्चित करेगा, विशेषकर ब्रिक्स अध्यक्षता, इंडो-पैसिफिक रणनीति और चीन, पाकिस्तान व बांग्लादेश के साथ संवेदनशील द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में। अनुभवी राजनयिक नेतृत्व की यह निरंतरता नीतिगत स्थिरता की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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