बकरीद पर सार्वजनिक नमाज पर उत्तराखंड के निर्देश का VHP ने किया स्वागत, विनोद बंसल बोले — शक्ति प्रदर्शन नहीं चलेगा
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उत्तराखंड सरकार के उस निर्देश का खुलकर स्वागत किया है, जिसमें बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों पर नमाज अदा करने पर रोक लगाने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बंसल ने कहा कि यह निर्णय 'सही और समय की माँग' के अनुरूप है, क्योंकि सार्वजनिक स्थानों का उपयोग धार्मिक प्रदर्शन या यातायात बाधित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्य बयान और तर्क
विनोद बंसल ने कहा, 'नमाज के नाम पर शक्ति प्रदर्शन नहीं किया जा सकता और न ही यातायात के लिए बनी सड़कों को बाधित करके वहाँ किसी प्रकार के अड्डे बनाए जा सकते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि नमाज के लिए मस्जिद और मदरसे जैसे निर्धारित स्थल पहले से मौजूद हैं, इसलिए सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह का आयोजन उचित नहीं है।
उन्होंने आगे कहा, 'ये लोग कहते हैं कि जहाँ एक बार नमाज हो जाती है, वह अल्लाह का घर बन जाता है — तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि जहाँ भी रोड पर नमाज पढ़ी जाए, उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाए?'
उत्तराखंड सरकार की सख्ती पर टिप्पणी
बंसल ने उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि वहाँ पहले से ही सख्त कानूनी प्रावधान हैं और इस तरह के निर्देश यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि देश भर में एक नई जागरूकता आई है, जिसमें नागरिक और प्रशासन दोनों कानून के पालन के प्रति अधिक सचेत हो रहे हैं।
गौवंश और बकरीद का मुद्दा
बंसल ने गौ हत्या के विषय पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में यह पहले से प्रतिबंधित है और संविधान में भी गौ-संरक्षण का उल्लेख है। उनके अनुसार, कुछ लोग बकरीद या अन्य अवसरों पर गौवंश से जुड़े विवाद जानबूझकर पैदा करते हैं, जो सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक है।
सामाजिक सद्भाव पर जोर
बंसल ने कहा कि कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए, अन्यथा समाज में तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाईचारा तभी संभव है जब सभी वर्ग एक-दूसरे की आस्था और भावनाओं का आदर करें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में बकरीद से पहले सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाई गई है।