8 जुलाई 2026
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बकरीद पर सार्वजनिक नमाज पर उत्तराखंड के निर्देश का VHP ने किया स्वागत, विनोद बंसल बोले — शक्ति प्रदर्शन नहीं चलेगा

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बकरीद पर सार्वजनिक नमाज पर उत्तराखंड के निर्देश का VHP ने किया स्वागत, विनोद बंसल बोले — शक्ति प्रदर्शन नहीं चलेगा

सारांश

उत्तराखंड सरकार ने बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर नमाज को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए — VHP के विनोद बंसल ने इसे 'समय की माँग' बताया और कहा कि सड़कों पर नमाज के नाम पर शक्ति प्रदर्शन या यातायात बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य बातें

उत्तराखंड सरकार ने बकरीद के दौरान सार्वजनिक स्थलों पर नमाज न पढ़ने के दिशा-निर्देश जारी किए।
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस फैसले को 'सही और समय की माँग' बताते हुए स्वागत किया।
बंसल ने कहा कि नमाज के लिए मस्जिद और मदरसे जैसे निर्धारित स्थान पहले से उपलब्ध हैं।
उन्होंने वक्फ संपत्ति और सड़कों पर नमाज के संबंध में भी सवाल उठाए।
बंसल ने गौ-संरक्षण और सामाजिक सद्भाव पर भी जोर दिया, कहा — कानून का सम्मान सभी की जिम्मेदारी है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उत्तराखंड सरकार के उस निर्देश का खुलकर स्वागत किया है, जिसमें बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों पर नमाज अदा करने पर रोक लगाने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बंसल ने कहा कि यह निर्णय 'सही और समय की माँग' के अनुरूप है, क्योंकि सार्वजनिक स्थानों का उपयोग धार्मिक प्रदर्शन या यातायात बाधित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्य बयान और तर्क

विनोद बंसल ने कहा, 'नमाज के नाम पर शक्ति प्रदर्शन नहीं किया जा सकता और न ही यातायात के लिए बनी सड़कों को बाधित करके वहाँ किसी प्रकार के अड्डे बनाए जा सकते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि नमाज के लिए मस्जिद और मदरसे जैसे निर्धारित स्थल पहले से मौजूद हैं, इसलिए सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह का आयोजन उचित नहीं है।

उन्होंने आगे कहा, 'ये लोग कहते हैं कि जहाँ एक बार नमाज हो जाती है, वह अल्लाह का घर बन जाता है — तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि जहाँ भी रोड पर नमाज पढ़ी जाए, उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाए?'

उत्तराखंड सरकार की सख्ती पर टिप्पणी

बंसल ने उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि वहाँ पहले से ही सख्त कानूनी प्रावधान हैं और इस तरह के निर्देश यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि देश भर में एक नई जागरूकता आई है, जिसमें नागरिक और प्रशासन दोनों कानून के पालन के प्रति अधिक सचेत हो रहे हैं।

गौवंश और बकरीद का मुद्दा

बंसल ने गौ हत्या के विषय पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में यह पहले से प्रतिबंधित है और संविधान में भी गौ-संरक्षण का उल्लेख है। उनके अनुसार, कुछ लोग बकरीद या अन्य अवसरों पर गौवंश से जुड़े विवाद जानबूझकर पैदा करते हैं, जो सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक है।

सामाजिक सद्भाव पर जोर

बंसल ने कहा कि कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए, अन्यथा समाज में तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाईचारा तभी संभव है जब सभी वर्ग एक-दूसरे की आस्था और भावनाओं का आदर करें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में बकरीद से पहले सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संवाद का हिस्सा भी हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि क्या ऐसे निर्देश समान रूप से सभी धार्मिक समूहों पर लागू होते हैं — जैसे कि धार्मिक जुलूस, सड़क पर पूजा-पाठ आदि। जब तक यह स्पष्टता नहीं होगी, ऐसे फैसले सामाजिक सद्भाव की बजाय विभाजन की राजनीति का औजार बनने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड सरकार ने बकरीद पर सार्वजनिक नमाज को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?
उत्तराखंड सरकार ने बकरीद के दौरान सार्वजनिक स्थलों पर नमाज न पढ़ने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और यातायात बाधा से बचना बताया गया है।
विनोद बंसल ने उत्तराखंड के निर्देश का स्वागत क्यों किया?
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे 'समय की माँग' बताया। उनका तर्क है कि नमाज के लिए मस्जिद और मदरसे जैसे निर्धारित स्थल पहले से मौजूद हैं, इसलिए सार्वजनिक सड़कों का उपयोग धार्मिक प्रदर्शन के लिए नहीं होना चाहिए।
VHP का वक्फ संपत्ति पर क्या कहना है?
विनोद बंसल ने सवाल उठाया कि यदि सड़क पर एक बार नमाज पढ़ी जाए तो क्या उस स्थान को वक्फ संपत्ति घोषित किया जा सकता है। यह बयान सार्वजनिक भूमि और धार्मिक दावों के बीच की बहस को उजागर करता है।
क्या उत्तराखंड में गौ हत्या पर भी कोई कड़े प्रावधान हैं?
विनोद बंसल के अनुसार, देश के कई हिस्सों में गौ हत्या पहले से प्रतिबंधित है और संविधान में भी गौ-संरक्षण का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि बकरीद के अवसर पर इस विषय को लेकर जानबूझकर विवाद पैदा करना सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक है।
इस विवाद का सामाजिक सद्भाव पर क्या असर पड़ सकता है?
बंसल ने कहा कि भाईचारा तभी संभव है जब सभी वर्ग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करें और कानून का पालन करें। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दों पर संतुलित संवाद और समान कानूनी प्रयोग जरूरी है, ताकि सामाजिक तनाव न बढ़े।
राष्ट्र प्रेस
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