महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर BJP सांसद प्रकाश चिक बाराइक की विपक्ष से अपील
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रकाश चिक बाराइक ने 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक सहित मानसून सत्र में लाए जा रहे सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर विपक्ष को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से सहयोग की अपील के बाद बाराइक ने कहा कि यह मुद्दा सभी के हित का है और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर विपक्ष से सहयोग की माँग
BJP सांसद प्रकाश चिक बाराइक ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को संसद में व्यापक समर्थन मिलना चाहिए। उनके अनुसार, 'महिला आरक्षण होना चाहिए और इस विधेयक को समर्थन मिलना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब सरकार ने विपक्ष से सहयोग माँगा है, तो विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सकारात्मक प्रतिक्रिया दे। गौरतलब है कि महिला आरक्षण विधेयक लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है और इसके क्रियान्वयन के लिए परिसीमन प्रक्रिया को पूर्ण किया जाना अनिवार्य माना जाता है।
मोहन भागवत की 'जेनजी' टिप्पणी पर BJP का बचाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की 'जेनजी' पीढ़ी से संबंधित टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर बाराइक ने कहा कि इस बयान में कोई आपत्तिजनक बात नहीं कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना संदेश देते हुए आंदोलन में शामिल छात्रों को माफ़ कर दिया है। उनके अनुसार, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
FCRA विधेयक पर BJP का समर्थन
मानसून सत्र में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA से जुड़े विधेयक पर भी बाराइक ने सरकार के कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला यह विधेयक महत्वपूर्ण है और इसे संसद से पारित किया जाना चाहिए ताकि सरकार का विधायी एजेंडा आगे बढ़ सके। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में विधायी गतिविधियाँ तेज़ हैं और सरकार कई बड़े बिल पारित कराने की तैयारी में है।
आगे क्या होगा
संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक, परिसीमन और FCRA विधेयक पर आगामी दिनों में बहस और मतदान की संभावना है। विपक्ष की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि ये विधेयक इस सत्र में पारित हो पाते हैं या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक पर सर्वदलीय सहमति बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।