UP में 31,000 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द: शिया धर्मगुरुओं ने जताई चिंता, 5 जून तक दोबारा आवेदन की अपील
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उम्मीद पोर्टल पर 31,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद शिया धर्मगुरुओं ने गहरी चिंता व्यक्त की है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने 23 मई को सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे 5 जून की अंतिम तिथि से पहले दोबारा ऑनलाइन आवेदन करें, अन्यथा ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार, उम्मीद पोर्टल पर कुल 1.25 लाख आवेदन दाखिल किए गए थे, जिनमें से लगभग 31,000 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय पर सही दस्तावेज और आवेदन नहीं किए गए, तो कई सदियों पुरानी वक्फ संपत्तियाँ कानूनी संरक्षण खो सकती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ तत्व वक्फ संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने और उन्हें आसानी से बेचे जाने योग्य बनाने की कोशिश में हैं।
शिया धर्मगुरु की सतर्क प्रतिक्रिया
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने इस मामले पर अधिक सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पंजीकरण रद्द किए जाने के कारणों की पहले पूरी जाँच और स्पष्टता होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक पूरी जाँच नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
नकवी ने यह भी रेखांकित किया कि अनेक वक्फ संपत्तियाँ कई सौ साल पुरानी हैं और उनके पास आधुनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उनका तर्क है कि दस्तावेजों की कमी को आधार बनाकर इन संपत्तियों को वक्फ व्यवस्था से बाहर करना उचित नहीं है — बल्कि प्रणाली को ही मजबूत किया जाए ताकि दुरुपयोग भी रुके और वास्तविक संपत्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार के वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर पहले से ही विभिन्न मुस्लिम संगठनों में बेचैनी है। उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण रद्द होने से मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और मदरसों सहित कई सामाजिक-धार्मिक महत्व की संपत्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं। गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियाँ देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी भूमि-संपदाओं में से एक मानी जाती हैं।
क्या होगा आगे
मौलाना यासूब अब्बास ने सभी संबंधित पक्षों — मुतवल्लियों, ट्रस्टियों और स्थानीय समितियों — से आग्रह किया है कि वे 5 जून 2025 की समय-सीमा से पहले आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा ऑनलाइन आवेदन करें। उन्होंने लापरवाही को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में देरी भविष्य में कानूनी जटिलताएँ पैदा कर सकती है।