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UP में 31,000 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द: शिया धर्मगुरुओं ने जताई चिंता, 5 जून तक दोबारा आवेदन की अपील

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UP में 31,000 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द: शिया धर्मगुरुओं ने जताई चिंता, 5 जून तक दोबारा आवेदन की अपील

सारांश

उत्तर प्रदेश में 1.25 लाख में से 31,000 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द — और 5 जून की समय-सीमा सामने। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील है: अभी आवेदन करें, वरना सदियों पुरानी संपत्तियाँ कानूनी संरक्षण खो सकती हैं।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के उम्मीद पोर्टल पर दाखिल 1.25 लाख वक्फ आवेदनों में से 31,000 से अधिक खारिज किए गए।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने दोबारा आवेदन की अपील की।
दोबारा आवेदन की अंतिम तिथि 5 जून 2025 निर्धारित है।
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने पंजीकरण रद्द होने के कारणों की पूरी जाँच की माँग की।
कई प्रभावित वक्फ संपत्तियाँ सैकड़ों साल पुरानी हैं और उनके पास आधुनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश के उम्मीद पोर्टल पर 31,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद शिया धर्मगुरुओं ने गहरी चिंता व्यक्त की है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने 23 मई को सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे 5 जून की अंतिम तिथि से पहले दोबारा ऑनलाइन आवेदन करें, अन्यथा ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार, उम्मीद पोर्टल पर कुल 1.25 लाख आवेदन दाखिल किए गए थे, जिनमें से लगभग 31,000 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय पर सही दस्तावेज और आवेदन नहीं किए गए, तो कई सदियों पुरानी वक्फ संपत्तियाँ कानूनी संरक्षण खो सकती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ तत्व वक्फ संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने और उन्हें आसानी से बेचे जाने योग्य बनाने की कोशिश में हैं।

शिया धर्मगुरु की सतर्क प्रतिक्रिया

शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने इस मामले पर अधिक सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पंजीकरण रद्द किए जाने के कारणों की पहले पूरी जाँच और स्पष्टता होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक पूरी जाँच नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।

नकवी ने यह भी रेखांकित किया कि अनेक वक्फ संपत्तियाँ कई सौ साल पुरानी हैं और उनके पास आधुनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उनका तर्क है कि दस्तावेजों की कमी को आधार बनाकर इन संपत्तियों को वक्फ व्यवस्था से बाहर करना उचित नहीं है — बल्कि प्रणाली को ही मजबूत किया जाए ताकि दुरुपयोग भी रुके और वास्तविक संपत्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार के वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर पहले से ही विभिन्न मुस्लिम संगठनों में बेचैनी है। उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण रद्द होने से मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और मदरसों सहित कई सामाजिक-धार्मिक महत्व की संपत्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं। गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियाँ देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी भूमि-संपदाओं में से एक मानी जाती हैं।

क्या होगा आगे

मौलाना यासूब अब्बास ने सभी संबंधित पक्षों — मुतवल्लियों, ट्रस्टियों और स्थानीय समितियों — से आग्रह किया है कि वे 5 जून 2025 की समय-सीमा से पहले आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा ऑनलाइन आवेदन करें। उन्होंने लापरवाही को सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में देरी भविष्य में कानूनी जटिलताएँ पैदा कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 आवेदनों का खारिज होना महज एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है — यह वक्फ संपत्तियों की कानूनी स्थिति पर एक बड़े नीतिगत बदलाव का हिस्सा है जो वक्फ (संशोधन) अधिनियम के बाद और तेज हुआ है। असली सवाल यह है कि सैकड़ों साल पुरानी संपत्तियों के लिए आधुनिक दस्तावेजीकरण की शर्त कितनी व्यावहारिक है — और क्या यह शर्त जानबूझकर इतनी कठिन रखी गई है। सैयद सैफ अब्बास नकवी की जाँच की माँग वाजिब है, लेकिन 5 जून की समय-सीमा इतनी तंग है कि जाँच पूरी होने से पहले ही संपत्तियाँ कानूनी खतरे में आ सकती हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण क्यों रद्द किया गया?
उम्मीद पोर्टल पर दाखिल 1.25 लाख आवेदनों में से लगभग 31,000 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर रद्द होने के कारणों की अभी पूरी जाँच होनी बाकी है।
वक्फ संपत्तियों के लिए दोबारा आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार, दोबारा ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 5 जून 2025 है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया है कि वे समय-सीमा से पहले आवश्यक दस्तावेज जमा करें।
क्या पुराने दस्तावेज न होने पर वक्फ संपत्तियाँ खो सकती हैं?
सैयद सैफ अब्बास नकवी ने कहा है कि कई वक्फ संपत्तियाँ सैकड़ों साल पुरानी हैं और उनके पास आधुनिक दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें वक्फ व्यवस्था से बाहर कर दिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि दस्तावेजीकरण की समस्या को वक्फ प्रणाली के भीतर ही हल किया जाए।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने क्या अपील की है?
बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने सभी मुतवल्लियों, ट्रस्टियों और स्थानीय समितियों से अपील की है कि वे 5 जून से पहले उम्मीद पोर्टल पर दोबारा ऑनलाइन आवेदन करें। उन्होंने चेताया कि लापरवाही से ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियाँ कानूनी खतरे में पड़ सकती हैं।
इस मामले का वक्फ (संशोधन) अधिनियम से क्या संबंध है?
यह घटनाक्रम केंद्र सरकार के वक्फ (संशोधन) अधिनियम के बाद वक्फ संपत्तियों के पुनः पंजीकरण की व्यापक प्रक्रिया के तहत हो रहा है। धर्मगुरुओं की चिंता है कि कड़े दस्तावेजीकरण की शर्तें पुरानी संपत्तियों के लिए व्यावहारिक रूप से पूरी करना कठिन है।
राष्ट्र प्रेस
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