बांद्रा गरीब नगर में 400 परिवारों के घर तोड़े गए: वारिस पठान ने मानसून से पहले वैकल्पिक आवास की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 24 मई 2025 को मुंबई के बांद्रा (पूर्व) स्थित गरीब नगर का दौरा किया, जहाँ एक बड़े तोड़फोड़ अभियान के बाद सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं। पठान के अनुसार, इस कार्रवाई में करीब 400 गरीब परिवारों के आशियाने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिए गए, जिससे महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पठान ने प्रभावित परिवारों से सीधे मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि विस्थापित लोगों को पीने के पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। वारिस पठान ने कहा, 'करीब 400 गरीब परिवारों के घर तोड़े गए हैं, जिसके कारण महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों ने उन्हें बिजली बिल, घर के दस्तावेज और अन्य अभिलेख दिखाए, जो यह प्रमाणित करते हैं कि वे लंबे समय से उस इलाके में निवासरत थे।
प्रशासन पर जवाबदेही का सवाल
पठान ने प्रशासनिक जिम्मेदारी का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जिन अधिकारियों ने इन परिवारों को वर्षों तक वहाँ रहने की अनुमति दी, उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। उनके अनुसार, केवल गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाना न्यायसंगत नहीं है — जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से माँग की कि जिन निवासियों के दस्तावेज वैध पाए जाएँ, उन्हें मानसून से पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें बारिश के मौसम में और अधिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
देवनार बकरी मंडी का दौरा
इसी दौरे के दौरान वारिस पठान ने देवनार बकरी मंडी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहाँ मौजूद व्यापारियों, नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से मुलाकात कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। पठान ने बताया कि दूर-दराज के इलाकों से बकरियाँ लेकर आने वाले व्यापारियों को पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मंडी की अनुमति तो दे दी है, लेकिन पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम नहीं किया गया। AIMIM की टीम और स्थानीय पार्षद इस मामले को राज्य सरकार के समक्ष उठाएँगे और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
राष्ट्रीय पशु विवाद पर पठान का रुख
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग पर वारिस पठान ने कहा कि मुसलमान कानून और संविधान का सम्मान करते हैं तथा उसी के दायरे में रहकर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहती है, तो उसे ऐसा करने से कोई नहीं रोक रहा — इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी पक्षों को संवैधानिक दायरे में रहकर समाधान निकालना चाहिए।
आगे क्या होगा
AIMIM नेताओं और स्थानीय पार्षदों द्वारा राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपे जाने की तैयारी है। मानसून के नजदीक आते ही विस्थापित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की माँग और तेज होने की संभावना है।