पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों ने डीए के भुगतान में देरी के खिलाफ की हड़ताल

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पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों ने डीए के भुगतान में देरी के खिलाफ की हड़ताल

सारांश

कोलकाता में पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों ने डीए भुगतान में देरी के खिलाफ हड़ताल की है। यह हड़ताल सरकार के प्रति असंतोष को दर्शाती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया है।

Key Takeaways

  • पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का व्यापक हड़ताल
  • महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान में देरी
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न होना
  • राज्य सरकार की कार्रवाई और नीतियाँ
  • सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

कोलकाता, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला संग्रामी युवतो मंच (जॉइंट मूवमेंट फोरम) के अंतर्गत विभिन्न संघों ने आज एक व्यापक हड़ताल की शुरुआत की है। इस हड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ता (डीए) के भुगतान में हो रही देरी और इसके प्रति असंतोष व्यक्त करना है।

संग्रामी युवतो मंच के मुताबिक, राज्य सरकार ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की है, जिसमें 2008 से 2019 तक के महंगाई भत्ते का 25 प्रतिशत 31 मार्च तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि कर्मचारियों को मिलने वाला डीए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान होना चाहिए और 2008 से बकाया की किश्तों में भुगतान किया जाए, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।

फोरम के संयोजक भास्कर घोष ने कहा, “हालांकि, राज्य सरकार ने 2008 से 2019 तक के 25 प्रतिशत डीए बकाया का भुगतान करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसके बजाय, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फिर से समय मांगा है, ताकि इस वर्ष दिसंबर तक 25 प्रतिशत डीए बकाया का भुगतान किया जा सके। यही कारण है कि हमने आज पूरे हड़ताल का निर्णय लिया है।”

घोष ने आगे कहा कि केवल राज्य सरकार के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्य-शासित और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक, नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों के कर्मचारी भी इस हड़ताल में भाग लेंगे।

उन्होंने यह भी कहा, “यह हड़ताल ऐतिहासिक होगी और पिछले डेढ़ दशक में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा गया।”

हालांकि, राज्य सरकार इस हड़ताल को रोकने के लिए सक्रिय है। उसने पहले ही शुक्रवार को कर्मचारियों की हाजिरी अनिवार्य कराने का नोटिफिकेशन जारी किया है।

सरकार ने यह निर्णय लिया है कि किसी भी कर्मचारी को शुक्रवार को कैज़ुअल लीव या अन्य छुट्टी नहीं दी जाएगी, चाहे वह किसी भी पाली में हो।

हालांकि, कुछ विशेष मामलों में छूट रहेगी, जैसे कि कर्मचारियों का अस्पताल में भर्ती होना या परिवार में शोक।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अनुपस्थिति इन कारणों में से नहीं आती है और छुट्टी स्वीकृत नहीं हुई है, तो इसे ‘डाइस-नॉन’ माना जाएगा और उस दिन का वेतन नहीं मिलेगा।

“जो कर्मचारी शो-कारण नोटिस का जवाब नहीं देंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के तहत सभी कार्रवाई 31 मार्च तक पूरी होनी चाहिए।”

Point of View

जो महंगाई भत्ते के भुगतान में देरी को दर्शाती है। यह आंदोलन न केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

इस हड़ताल का मुख्य कारण क्या है?
हड़ताल का मुख्य कारण महंगाई भत्ता (डीए) के भुगतान में देरी है।
कौन-कौन से कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं?
इस हड़ताल में राज्य सरकार के कर्मचारी, स्कूल शिक्षक, नगर निगम और पंचायत के कर्मचारी शामिल हैं।
सरकार ने हड़ताल को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने कर्मचारियों की हाजिरी अनिवार्य करने का नोटिफिकेशन जारी किया है।
क्या कर्मचारियों को छुट्टी लेने की अनुमति है?
किसी भी कर्मचारी को शुक्रवार को छुट्टी नहीं दी जाएगी, सिवाय कुछ विशेष मामलों के।
हड़ताल का परिणाम क्या हो सकता है?
हड़ताल का परिणाम सरकारी कर्मचारियों के बकाया भुगतान में देरी और राजनीतिक स्थिरता पर असर डाल सकता है।
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