पश्चिम बंगाल में 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' के खिलाफ कड़ा कानून लाएगी सरकार: मंत्री दिलीप घोष
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 27 जून को राजरहाट में पत्रकारों से बात करते हुए ऐलान किया कि राज्य में 'लव जिहाद', 'लैंड जिहाद' और जबरन मतांतरण के खिलाफ शीघ्र ही सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक अपराधों पर किसी भी कीमत पर नरमी नहीं बरती जाएगी।
मंत्री का बयान: क्या कहा दिलीप घोष ने
मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'लंबे समय तक बंगाल में लव जिहाद, लैंड जिहाद गतिविधियों के लिए खुला मैदान बना रहा, लेकिन अब सरकार इन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि बंगाल की धरती पर राष्ट्रविरोधी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं होगी।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले पर प्रतिक्रिया
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि जांच शुरू हो चुकी है और सरकार पूरे मामले पर बारीकी से नज़र रख रही है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए पवित्र चंदे में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जाएगा और जांच पूरी निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ की जाएगी। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
आपदा प्रबंधन: 200 कर्मियों का स्थायी राहत बल
आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर भी मंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने 15 वर्षों के शासनकाल में राज्य के लिए एनडीआरएफ की अलग टीम तक नहीं बनाई थी, जिसके कारण आपदा के समय ओडिशा से टीम बुलानी पड़ती थी। अब मुख्यमंत्री ने 200 कर्मियों का स्थायी रिजर्व आपदा राहत बल तैयार करने की घोषणा की है।
इस बल की तीन टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात की जाएंगी — पहली टीम सुंदरबन में, जहां चक्रवात का खतरा सर्वाधिक रहता है; दूसरी टीम कोलकाता में; और तीसरी टीम तटीय क्षेत्रों में, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संभव हो सके।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। प्रस्तावित कानून लागू होने पर 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। गौरतलब है कि इस तरह के कानून उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में पहले ही लागू किए जा चुके हैं और उनकी संवैधानिक वैधता को लेकर न्यायिक समीक्षा जारी है।
आगे क्या होगा
मंत्री दिलीप घोष के अनुसार, राज्य सरकार सामाजिक अपराधों पर सख्ती और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रस्तावित कानून का मसौदा कब तक विधानसभा में पेश किया जाएगा, इसकी कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है। राज्य सरकार की इन घोषणाओं पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकती है।