महिला दिवस पर भंसाली की फिल्मों में दिखे महिला किरदारों का प्रभावी योगदान
सारांश
Key Takeaways
- महिला दिवस पर संजय लीला भंसाली की फिल्मों का महत्व।
- महिलाओं के किरदारों में सशक्तता और गहराई।
- भंसाली द्वारा प्रस्तुत महिला अनुभव की विविधता।
- फिल्मों में पहचान की खोज और संघर्ष।
- महिलाओं की समाज में भूमिका को उजागर करना।
मुंबई, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आज विश्व स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है, जो महिलाओं को सम्मानित करने के लिए एक विशेष दिन है। हिंदी सिनेमा में महिलाओं को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है।
पहले महिलाओं को अक्सर सहायक पात्र और मात्र ग्लैमर के रूप में देखा जाता था, लेकिन कुछ अभिनेत्रियों और फिल्म निर्माताओं की मेहनत के कारण उनकी स्थिति में धीरे-धीरे परिवर्तन आया। ऐसे ही एक निर्माता-निर्देशक हैं संजय लीला भंसाली, जिनकी हर फिल्म महिला केंद्रित होती है।
भंसाली एक ऐसे निर्देशक हैं, जिनकी फिल्मों में फीमेल लीड किरदार, चाहे वे सकारात्मक हो या नकारात्मक, को अलग शैली और गरिमा के साथ प्रस्तुत किया जाता है। उनके किरदारों की प्रस्तुति बेहद रोचक और प्रभावी होती है, जिसमें उनके कपड़ों और संवादों पर भी ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि उनकी फिल्म के हर किरदार जीवंत प्रतीत होते हैं। संजय लीला भंसाली की फिल्मों में हमेशा महिलाओं का स्पर्श देखने को मिलता है, क्योंकि उन्होंने खुद अपनी मां से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने अपनी मां को समाज की कठिनाइयों का सामना करते हुए देखा है, और यही कारण है कि उनकी फिल्मों में महिला किरदारों के लिए भव्य सेट बनाए जाते हैं।
सबसे पहले आती है फिल्म 'खामोशी-द म्यूजिकल'। इस फिल्म में मनीषा कोइराला का किरदार एनी एक ऐसी महिला की कहानी है जो अपने सपनों को छोड़कर अपने विकलांग माता-पिता की सेवा में खुद को समर्पित कर देती है। वह अपने प्यार समीर से मिलने के बावजूद परिवार का चयन करती है और माता-पिता द्वारा घर से निकालने के बाद भी मजबूती से जीवन जीती है।
फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' में ऐश्वर्या राय को एक जीवंत और बहुआयामी महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो स्वतंत्रता की खोज में है। नंदिनी अपने प्यार के लिए परिवार से लड़ने की क्षमता रखती है, चाहे वह किसी और से विवाह कर चुकी हो।
फिल्म 'ब्लैक' भी महिलाओं पर आधारित है, जिसमें एक नेत्रहीन और बधिर महिला के दृष्टिकोण से दुनिया को दर्शाया गया है। इस फिल्म में रानी का किरदार निभाना बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उसे न देख पाने और न सुन पाने की कहानी को जीवंत करना था।
फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' में मस्तानी और काशीबाई दोनों ही किरदारों को सराहा गया। मस्तानी अपने प्यार के लिए जंग करने से नहीं चूकती, वहीं काशीबाई अपने परिवार की रक्षा के लिए हर परिस्थिति का सामना करती हैं। दोनों ही किरदार सशक्त और आत्मनिर्भर हैं।
भंसाली की 'पद्मावती' में दीपिका पादुकोण का महारानी का किरदार भी अद्वितीय है। यह फिल्म राजपूती शान और शौर्य पर आधारित है, जहां दीपिका अपने नारीत्व की रक्षा के लिए कठिनाइयों का सामना करती हैं।
आलिया भट्ट का गंगूबाई का किरदार भी उल्लेखनीय था, जहां नारी को शक्ति और कठोरता का प्रतीक प्रस्तुत किया गया। इस फिल्म में महिलाओं के संघर्ष को दिखाया गया है, जिसमें हर किरदार अपने अधिकारों के लिए लड़ा।