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योगी सरकार का बड़ा फैसला: आपदा में मृत्यु पर मुआवजा ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख, फसल-पशु सहायता भी दोगुनी

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योगी सरकार का बड़ा फैसला: आपदा में मृत्यु पर मुआवजा ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख, फसल-पशु सहायता भी दोगुनी

सारांश

योगी सरकार ने SDRF-NDRF के तहत आपदा मृत्यु मुआवजा दोगुना कर ₹8 लाख किया — साथ ही फसल, पशुधन और मकान क्षति की सहायता राशि भी बढ़ाई। नए मानक 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेंगे और राशि सीधे DBT से मिलेगी।

मुख्य बातें

योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदा में मृत्यु पर मुआवजा ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख किया।
नए SDRF-NDRF मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे।
सिंचित फसल नुकसान सहायता ₹17,000 से ₹22,000 प्रति हेक्टेयर ; बागवानी के लिए ₹30,000 प्रति हेक्टेयर ।
बड़े पशुओं की मृत्यु पर मुआवजा ₹40,000 से ₹50,000 ; छोटे पशुओं के लिए ₹4,000 से ₹5,500 ।
1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 के बीच 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित।
सहायता राशि अनिवार्य रूप से DBT के ज़रिए सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 6 नवंबर 2026 को प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की राशि में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की घोषणा की। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के मानकों में संशोधन करते हुए अब प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को ₹4 लाख के स्थान पर ₹8 लाख की आर्थिक सहायता मिलेगी। नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे।

मृत्यु और पशुधन क्षति पर नई सहायता राशि

राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि मृत्यु मुआवजे को दोगुना करने के साथ-साथ पशुधन क्षति पर मिलने वाली सहायता में भी बदलाव किया गया है। गाय, भैंस, घोड़े या ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु पर सहायता राशि ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए यह राशि ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,500 की गई है।

मुर्गीपालकों को प्रति मुर्गी ₹100 की जगह ₹130 की सहायता मिलेगी, जबकि भार ढोने वाले पशुओं की क्षति पर मुआवजा ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,400 किया गया है।

किसानों को फसल नुकसान पर बढ़ी राहत

योगी सरकार ने किसानों की फसल क्षति के मुआवजे में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान की सहायता ₹17,000 से बढ़ाकर ₹22,000 प्रति हेक्टेयर और वर्षा आधारित क्षेत्रों में ₹8,500 से बढ़ाकर ₹11,000 प्रति हेक्टेयर की गई है। बागवानी और कृषि वानिकी की फसलों पर सहायता ₹22,500 से ₹30,000 प्रति हेक्टेयर हुई है।

रेशम उत्पादन से जुड़ी फसलों के लिए मुआवजा ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,800 प्रति हेक्टेयर और गन्ने की फसल के लिए ₹7,500 से ₹9,800 प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 के बीच प्रदेश के 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुँच चुका है।

मकान और सार्वजनिक संस्थानों के लिए नए मानक

आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए मैदानी क्षेत्रों में ₹1.85 लाख और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹2.06 लाख की सहायता का प्रावधान किया गया है। आंशिक नुकसान पर मैदानी इलाकों में ₹93,000 और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹1.03 लाख मिलेंगे। पूरी तरह क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण के लिए ₹15.50 लाख और माध्यमिक विद्यालयों, छात्रावासों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों तथा पॉलिटेक्निक के नुकसान पर ₹26 लाख तक की सहायता निर्धारित की गई है।

राहत शिविर और पारदर्शिता के उपाय

सामान्य परिस्थितियों में आपदा प्रभावित परिवारों को 30 दिनों तक भोजन, कपड़े, अस्थायी आवास और अन्य ज़रूरी सुविधाएँ मिलेंगी; विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 60 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। पेयजल व्यवस्था के लिए सामान्य स्थिति में 30 दिन और सूखे में 90 दिन की सहायता का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग, विस्फोट या दुर्घटना से होने वाले नुकसान को इस सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है।

सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। लाभार्थियों की सूची और पात्रता का आधार सार्वजनिक करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वास्तविक प्रभावितों को ही लाभ मिले। सभी जिलाधिकारियों को 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक के नुकसान का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन संशोधित मानकों से उत्तर प्रदेश के लाखों आपदा-प्रभावित परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि यह राशि वास्तव में कितनी तेज़ी से पीड़ित परिवारों तक पहुँचती है — उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में DBT की घोषणाओं के बावजूद वितरण में देरी की शिकायतें दर्ज होती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चालू वित्त वर्ष में ही 10 लाख से अधिक किसान प्रभावित हो चुके हैं, जो राज्य की आपदा-भेद्यता को रेखांकित करता है। पारदर्शिता के लिए लाभार्थी सूची सार्वजनिक करने का प्रावधान सराहनीय है, लेकिन इसकी निगरानी की स्वतंत्र व्यवस्था के बिना यह महज़ कागज़ी वादा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार ने आपदा में मृत्यु पर मुआवजा कितना बढ़ाया है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदा में मृत्यु पर मिलने वाली सहायता राशि ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख कर दी है। यह संशोधन SDRF और NDRF के मानकों के तहत किया गया है और वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा।
नए आपदा मुआवजे के मानक कब से लागू होंगे?
नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे। राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने इसकी पुष्टि की है।
किसानों को फसल नुकसान पर अब कितनी सहायता मिलेगी?
सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान की सहायता ₹17,000 से बढ़ाकर ₹22,000 प्रति हेक्टेयर, वर्षा आधारित क्षेत्र में ₹8,500 से ₹11,000 प्रति हेक्टेयर और बागवानी फसलों के लिए ₹22,500 से ₹30,000 प्रति हेक्टेयर की गई है।
आपदा सहायता राशि लाभार्थियों को कैसे मिलेगी?
व्यक्तिगत लाभार्थियों को सहायता राशि अनिवार्य रूप से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। लाभार्थियों की सूची और पात्रता का आधार भी सार्वजनिक किया जाएगा।
पशुधन क्षति पर उत्तर प्रदेश में अब कितनी मदद मिलेगी?
गाय, भैंस, घोड़े या ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु पर ₹50,000, बकरी-भेड़-सूअर जैसे छोटे पशुओं पर ₹5,500, भार ढोने वाले पशुओं पर ₹25,400 और प्रति मुर्गी ₹130 की सहायता मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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