योगी सरकार का बड़ा फैसला: आपदा में मृत्यु पर मुआवजा ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख, फसल-पशु सहायता भी दोगुनी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 6 नवंबर 2026 को प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की राशि में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की घोषणा की। राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के मानकों में संशोधन करते हुए अब प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को ₹4 लाख के स्थान पर ₹8 लाख की आर्थिक सहायता मिलेगी। नए मानक वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेंगे।
मृत्यु और पशुधन क्षति पर नई सहायता राशि
राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि मृत्यु मुआवजे को दोगुना करने के साथ-साथ पशुधन क्षति पर मिलने वाली सहायता में भी बदलाव किया गया है। गाय, भैंस, घोड़े या ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु पर सहायता राशि ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए यह राशि ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,500 की गई है।
मुर्गीपालकों को प्रति मुर्गी ₹100 की जगह ₹130 की सहायता मिलेगी, जबकि भार ढोने वाले पशुओं की क्षति पर मुआवजा ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,400 किया गया है।
किसानों को फसल नुकसान पर बढ़ी राहत
योगी सरकार ने किसानों की फसल क्षति के मुआवजे में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान की सहायता ₹17,000 से बढ़ाकर ₹22,000 प्रति हेक्टेयर और वर्षा आधारित क्षेत्रों में ₹8,500 से बढ़ाकर ₹11,000 प्रति हेक्टेयर की गई है। बागवानी और कृषि वानिकी की फसलों पर सहायता ₹22,500 से ₹30,000 प्रति हेक्टेयर हुई है।
रेशम उत्पादन से जुड़ी फसलों के लिए मुआवजा ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,800 प्रति हेक्टेयर और गन्ने की फसल के लिए ₹7,500 से ₹9,800 प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। गौरतलब है कि 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 के बीच प्रदेश के 10,02,684 किसानों की करीब 52 लाख 14 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुँच चुका है।
मकान और सार्वजनिक संस्थानों के लिए नए मानक
आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए मैदानी क्षेत्रों में ₹1.85 लाख और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹2.06 लाख की सहायता का प्रावधान किया गया है। आंशिक नुकसान पर मैदानी इलाकों में ₹93,000 और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹1.03 लाख मिलेंगे। पूरी तरह क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण के लिए ₹15.50 लाख और माध्यमिक विद्यालयों, छात्रावासों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों तथा पॉलिटेक्निक के नुकसान पर ₹26 लाख तक की सहायता निर्धारित की गई है।
राहत शिविर और पारदर्शिता के उपाय
सामान्य परिस्थितियों में आपदा प्रभावित परिवारों को 30 दिनों तक भोजन, कपड़े, अस्थायी आवास और अन्य ज़रूरी सुविधाएँ मिलेंगी; विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 60 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। पेयजल व्यवस्था के लिए सामान्य स्थिति में 30 दिन और सूखे में 90 दिन की सहायता का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग, विस्फोट या दुर्घटना से होने वाले नुकसान को इस सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है।
सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। लाभार्थियों की सूची और पात्रता का आधार सार्वजनिक करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वास्तविक प्रभावितों को ही लाभ मिले। सभी जिलाधिकारियों को 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक के नुकसान का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन संशोधित मानकों से उत्तर प्रदेश के लाखों आपदा-प्रभावित परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।