पॉलीसिलिकॉन PLI योजना: चीन पर निर्भरता घटाने के लिए भारत का बड़ा सौर कदम, 10 GW क्षमता का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 9 अगस्त को आयोजित भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने घोषणा की कि भारत पॉलीसिलिकॉन के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना लाने की तैयारी में है। यह कदम सौर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता कम करने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
पॉलीसिलिकॉन क्यों है अहम
पॉलीसिलिकॉन सोलर फोटोवोल्टिक (PV) पैनलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण कच्चा माल है। फिलहाल भारत अपनी पॉलीसिलिकॉन जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है और इस सामग्री के वैश्विक उत्पादन में चीन का एकाधिकार जैसा वर्चस्व है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका है।
प्रस्तावित योजना की मुख्य बातें
सारंगी के अनुसार, "आगामी प्रोत्साहन कार्यक्रम 10 गीगावाट से अधिक पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता को समर्थन दे सकता है, हालांकि वित्तीय सहायता की राशि से जुड़ी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।" नई योजना घरेलू उत्पादन क्षमता में निवेश को बढ़ावा देगी और एक अधिक एकीकृत सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायक होगी।
यह प्रस्ताव उस व्यापक सरकारी रणनीति का हिस्सा है जिसमें मॉड्यूल, सेल, वेफर, इंगॉट और पॉलीसिलिकॉन — यानी सौर विनिर्माण की पूरी आपूर्ति श्रृंखला — को घरेलू स्तर पर विकसित करने का लक्ष्य है।
भारत की मौजूदा सौर विनिर्माण क्षमता
सारंगी ने बताया कि भारत पहले ही 200 गीगावाट से अधिक सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता और 32 गीगावाट से अधिक सौर सेल विनिर्माण क्षमता स्थापित कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले एक वर्ष के भीतर अतिरिक्त 100 गीगावाट सौर सेल विनिर्माण क्षमता के चालू होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि भारत पहले ही सौर सेल और मॉड्यूल उत्पादन के लिए ₹24,000 करोड़ की PLI प्रदान कर चुका है। नवीनतम प्रस्ताव उस श्रृंखला की शेष प्रमुख कमी — पॉलीसिलिकॉन — को दूर करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
आम जनता और उद्योग पर असर
देशभर में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की गति बढ़ने और उपकरणों की माँग लगातार बढ़ने के साथ नीति-निर्माता स्थानीय विनिर्माण को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यदि यह योजना लागू होती है, तो घरेलू सौर उपकरण उद्योग को आयातित कच्चे माल की कीमतों और आपूर्ति अनिश्चितता से राहत मिल सकती है।
आगे क्या होगा
वित्तीय सहायता की राशि और योजना की विस्तृत रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। सारंगी ने संकेत दिया कि प्रस्तावित PLI भारत के विनिर्माण अभियान को सौर मूल्य श्रृंखला में और आगे ले जाएगी तथा देश की दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देगी। उद्योग जगत आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रहा है।