9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पॉलीसिलिकॉन PLI योजना: चीन पर निर्भरता घटाने के लिए भारत का बड़ा सौर कदम, 10 GW क्षमता का लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पॉलीसिलिकॉन PLI योजना: चीन पर निर्भरता घटाने के लिए भारत का बड़ा सौर कदम, 10 GW क्षमता का लक्ष्य

सारांश

पॉलीसिलिकॉन — सौर पैनलों की नींव — अब तक भारत की सबसे बड़ी आयात कमज़ोरी रही है। नई PLI योजना इसी कड़ी को भरने की कोशिश है: 10 GW से अधिक घरेलू क्षमता, चीन पर निर्भरता में कटौती, और 2030 के 500 GW लक्ष्य को ज़मीन पर उतारने की असली परीक्षा।

मुख्य बातें

भारत पॉलीसिलिकॉन के घरेलू उत्पादन के लिए नई PLI योजना लाने की तैयारी में है।
प्रस्तावित योजना 10 गीगावाट से अधिक पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता को समर्थन दे सकती है; वित्तीय राशि अभी घोषित नहीं।
भारत फिलहाल पॉलीसिलिकॉन के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है, जिसमें चीन का वैश्विक उत्पादन पर दबदबा है।
भारत पहले ही सौर सेल और मॉड्यूल PLI में ₹24,000 करोड़ दे चुका है; 200 GW मॉड्यूल और 32 GW सेल क्षमता स्थापित।
अगले एक वर्ष में अतिरिक्त 100 GW सौर सेल क्षमता चालू होने की उम्मीद।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता हासिल करना है।

नई दिल्ली में 9 अगस्त को आयोजित भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने घोषणा की कि भारत पॉलीसिलिकॉन के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना लाने की तैयारी में है। यह कदम सौर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता कम करने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

पॉलीसिलिकॉन क्यों है अहम

पॉलीसिलिकॉन सोलर फोटोवोल्टिक (PV) पैनलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण कच्चा माल है। फिलहाल भारत अपनी पॉलीसिलिकॉन जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है और इस सामग्री के वैश्विक उत्पादन में चीन का एकाधिकार जैसा वर्चस्व है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका है।

प्रस्तावित योजना की मुख्य बातें

सारंगी के अनुसार, "आगामी प्रोत्साहन कार्यक्रम 10 गीगावाट से अधिक पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता को समर्थन दे सकता है, हालांकि वित्तीय सहायता की राशि से जुड़ी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।" नई योजना घरेलू उत्पादन क्षमता में निवेश को बढ़ावा देगी और एक अधिक एकीकृत सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायक होगी।

यह प्रस्ताव उस व्यापक सरकारी रणनीति का हिस्सा है जिसमें मॉड्यूल, सेल, वेफर, इंगॉट और पॉलीसिलिकॉन — यानी सौर विनिर्माण की पूरी आपूर्ति श्रृंखला — को घरेलू स्तर पर विकसित करने का लक्ष्य है।

भारत की मौजूदा सौर विनिर्माण क्षमता

सारंगी ने बताया कि भारत पहले ही 200 गीगावाट से अधिक सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता और 32 गीगावाट से अधिक सौर सेल विनिर्माण क्षमता स्थापित कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले एक वर्ष के भीतर अतिरिक्त 100 गीगावाट सौर सेल विनिर्माण क्षमता के चालू होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि भारत पहले ही सौर सेल और मॉड्यूल उत्पादन के लिए ₹24,000 करोड़ की PLI प्रदान कर चुका है। नवीनतम प्रस्ताव उस श्रृंखला की शेष प्रमुख कमी — पॉलीसिलिकॉन — को दूर करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

आम जनता और उद्योग पर असर

देशभर में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की गति बढ़ने और उपकरणों की माँग लगातार बढ़ने के साथ नीति-निर्माता स्थानीय विनिर्माण को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यदि यह योजना लागू होती है, तो घरेलू सौर उपकरण उद्योग को आयातित कच्चे माल की कीमतों और आपूर्ति अनिश्चितता से राहत मिल सकती है।

आगे क्या होगा

वित्तीय सहायता की राशि और योजना की विस्तृत रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। सारंगी ने संकेत दिया कि प्रस्तावित PLI भारत के विनिर्माण अभियान को सौर मूल्य श्रृंखला में और आगे ले जाएगी तथा देश की दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देगी। उद्योग जगत आधिकारिक अधिसूचना का इंतज़ार कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती तकनीकी और वित्तीय है — पॉलीसिलिकॉन उत्पादन अत्यंत ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है और चीन की लागत-कुशलता से प्रतिस्पर्धा करना आसान नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की ₹24,000 करोड़ की पहली सौर PLI के रोज़गार और क्षमता परिणामों का स्वतंत्र सत्यापन अभी भी अपूर्ण है। वित्तीय राशि और क्रियान्वयन ढाँचे की अनुपस्थिति में यह घोषणा अभी इरादे की अभिव्यक्ति है, नीति नहीं — और बिना पारदर्शी मापन तंत्र के, 10 GW का लक्ष्य महज़ एक और आँकड़ा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पॉलीसिलिकॉन PLI योजना क्या है और यह क्यों लाई जा रही है?
यह एक प्रस्तावित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना है जिसका उद्देश्य भारत में पॉलीसिलिकॉन — सोलर PV पैनलों का प्रमुख कच्चा माल — का घरेलू उत्पादन शुरू करना है। भारत फिलहाल इस सामग्री के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है और चीन का वैश्विक उत्पादन पर वर्चस्व है, इसलिए सरकार आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना चाहती है।
नई पॉलीसिलिकॉन PLI योजना से कितनी क्षमता विकसित होगी?
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी के अनुसार, प्रस्तावित योजना 10 गीगावाट से अधिक पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता को समर्थन दे सकती है। हालांकि, वित्तीय सहायता की राशि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
भारत की मौजूदा सौर विनिर्माण क्षमता कितनी है?
भारत ने अब तक 200 गीगावाट से अधिक सौर मॉड्यूल और 32 गीगावाट से अधिक सौर सेल विनिर्माण क्षमता स्थापित कर ली है। अगले एक वर्ष में अतिरिक्त 100 गीगावाट सौर सेल क्षमता चालू होने की उम्मीद है।
भारत ने सौर PLI में अब तक कितना निवेश किया है?
भारत पहले ही सौर सेल और मॉड्यूल उत्पादन के लिए ₹24,000 करोड़ की PLI प्रदान कर चुका है। नई पॉलीसिलिकॉन PLI उस श्रृंखला की शेष महत्वपूर्ण कमी को दूर करने का प्रयास है।
2030 तक भारत का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है और इसमें सौर की क्या भूमिका है?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें सौर ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका होगी। पॉलीसिलिकॉन PLI इस लक्ष्य को घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के ज़रिए हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले