पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी योजना तैयार कर रही सरकार, सोलर पैनल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने शुक्रवार, 21 अगस्त को स्पष्ट किया कि सरकार सोलर पैनल निर्माण में उपयोग होने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण घटक पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी प्रदान करने के लिए एक नई योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। नई दिल्ली में आयोजित एक समिट के साइडलाइन में मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह जानकारी दी, हालाँकि योजना के विस्तृत ब्यौरे साझा करने से उन्होंने यह कहते हुए इनकार किया कि फिलहाल काम जारी है।
पीएलआई की सीमाएँ और नई पहल की ज़रूरत
सारंगी ने बताया कि सरकार पहले पॉलीसिलिकॉन कंपोनेंट के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीम ला चुकी थी, लेकिन इसके तहत देश में अपेक्षित उत्पादन क्षमता नहीं आ सकी। यही कारण है कि अब पॉलीसिलिकॉन पर सीधी सब्सिडी देने का विकल्प तलाशा जा रहा है। गौरतलब है कि भारत अभी भी अपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग ज़रूरतों के लिए पॉलीसिलिकॉन आयात पर बड़े पैमाने पर निर्भर है, जो घरेलू सोलर उद्योग की आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण और आजीविका की शर्त
सचिव ने फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के संदर्भ में एक अहम नीतिगत शर्त का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा करने से पहले एक व्यापक मैनेजमेंट प्लान तैयार करना अनिवार्य है। इस योजना में उस क्षेत्र के वनस्पति, जीव-जंतु, जल परिस्थितियाँ और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को ध्यान में रखना होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और स्थानीय समुदायों पर उनके प्रभाव को लेकर चिंताएँ भी उठ रही हैं।
रांची के गेटलसुद बांध में मिसाल
सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने हाल ही में रांची के गेटलसुद बांध में 100 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना शुरू की है। सारंगी ने बताया कि इस परियोजना में स्थानीय मछुआरों की आजीविका के लिए एक व्यापक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया और केज फिशरीज (पिंजरे में मछली पालन) को भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे मछुआरों की आमदनी में सुधार की उम्मीद है। यह मॉडल भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।
बैटरी स्टोरेज में निवेश पर ज़ोर
वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत सोलर ऊर्जा क्षमता को दीर्घकालिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए बैटरी स्टोरेज में निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सोलर ऊर्जा की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अपरिहार्य माना जा रहा है। आगे यह देखना होगा कि पॉलीसिलिकॉन सब्सिडी योजना किस रूप में सामने आती है और क्या यह घरेलू उत्पादन क्षमता में वह बदलाव ला पाती है जो PLI नहीं ला सका।