21 अगस्त 2026
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पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी योजना तैयार कर रही सरकार, सोलर पैनल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार

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पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी योजना तैयार कर रही सरकार, सोलर पैनल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार

सारांश

सोलर पैनल बनाने के लिए ज़रूरी पॉलीसिलिकॉन पर भारत अभी भी आयात पर निर्भर है और PLI स्कीम अपेक्षित क्षमता नहीं जुटा सकी। अब सरकार सीधी सब्सिडी के रास्ते पर है — यह कदम घरेलू सोलर आपूर्ति श्रृंखला की सबसे बड़ी कमज़ोर कड़ी को मज़बूत करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने 21 अगस्त को पुष्टि की कि सरकार पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी योजना तैयार कर रही है।
पॉलीसिलिकॉन के लिए पहले लाई गई PLI स्कीम के तहत देश में पर्याप्त उत्पादन क्षमता नहीं आ सकी।
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के लिए DPR से पहले पर्यावरण और मछुआरों की आजीविका का मैनेजमेंट प्लान अनिवार्य किया गया।
SECI ने रांची के गेटलसुद बांध में 100 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना में केज फिशरीज मॉडल अपनाया।
भारत सोलर ऊर्जा क्षमता को स्थिर बनाने के लिए बैटरी स्टोरेज में निवेश बढ़ाने पर काम कर रहा है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने शुक्रवार, 21 अगस्त को स्पष्ट किया कि सरकार सोलर पैनल निर्माण में उपयोग होने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण घटक पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी प्रदान करने के लिए एक नई योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। नई दिल्ली में आयोजित एक समिट के साइडलाइन में मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह जानकारी दी, हालाँकि योजना के विस्तृत ब्यौरे साझा करने से उन्होंने यह कहते हुए इनकार किया कि फिलहाल काम जारी है।

पीएलआई की सीमाएँ और नई पहल की ज़रूरत

सारंगी ने बताया कि सरकार पहले पॉलीसिलिकॉन कंपोनेंट के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीम ला चुकी थी, लेकिन इसके तहत देश में अपेक्षित उत्पादन क्षमता नहीं आ सकी। यही कारण है कि अब पॉलीसिलिकॉन पर सीधी सब्सिडी देने का विकल्प तलाशा जा रहा है। गौरतलब है कि भारत अभी भी अपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग ज़रूरतों के लिए पॉलीसिलिकॉन आयात पर बड़े पैमाने पर निर्भर है, जो घरेलू सोलर उद्योग की आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण और आजीविका की शर्त

सचिव ने फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के संदर्भ में एक अहम नीतिगत शर्त का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा करने से पहले एक व्यापक मैनेजमेंट प्लान तैयार करना अनिवार्य है। इस योजना में उस क्षेत्र के वनस्पति, जीव-जंतु, जल परिस्थितियाँ और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को ध्यान में रखना होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और स्थानीय समुदायों पर उनके प्रभाव को लेकर चिंताएँ भी उठ रही हैं।

रांची के गेटलसुद बांध में मिसाल

सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने हाल ही में रांची के गेटलसुद बांध में 100 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना शुरू की है। सारंगी ने बताया कि इस परियोजना में स्थानीय मछुआरों की आजीविका के लिए एक व्यापक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया और केज फिशरीज (पिंजरे में मछली पालन) को भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे मछुआरों की आमदनी में सुधार की उम्मीद है। यह मॉडल भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।

बैटरी स्टोरेज में निवेश पर ज़ोर

वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत सोलर ऊर्जा क्षमता को दीर्घकालिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए बैटरी स्टोरेज में निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सोलर ऊर्जा की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अपरिहार्य माना जा रहा है। आगे यह देखना होगा कि पॉलीसिलिकॉन सब्सिडी योजना किस रूप में सामने आती है और क्या यह घरेलू उत्पादन क्षमता में वह बदलाव ला पाती है जो PLI नहीं ला सका।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि सब्सिडी का मॉडल वहाँ क्यों सफल होगा जहाँ उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन नाकाम रहा। चीन की पॉलीसिलिकॉन लागत भारत की किसी भी संभावित सब्सिडी से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी है, और बिना स्पष्ट लागत-लाभ ढाँचे के यह योजना एक और अधूरी पहल बन सकती है। फ्लोटिंग सोलर में मछुआरों की आजीविका को अनिवार्य शर्त बनाना सराहनीय है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की निगरानी का कोई स्वतंत्र तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पॉलीसिलिकॉन सब्सिडी योजना क्या है और यह क्यों लाई जा रही है?
यह केंद्र सरकार की एक प्रस्तावित योजना है जिसके तहत सोलर पैनल बनाने में काम आने वाले कच्चे माल पॉलीसिलिकॉन के घरेलू उत्पादन को सब्सिडी दी जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि पहले लाई गई PLI स्कीम के तहत अपेक्षित उत्पादन क्षमता देश में नहीं आ सकी।
PLI स्कीम पॉलीसिलिकॉन के लिए क्यों नाकाम रही?
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी के अनुसार, पॉलीसिलिकॉन के लिए PLI के तहत देश में बड़ी उत्पादन क्षमता स्थापित नहीं हो पाई। इसकी वजह से सरकार अब सीधी सब्सिडी के विकल्प पर विचार कर रही है।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार ने क्या नई शर्त रखी है?
सरकार ने अनिवार्य किया है कि फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की DPR जमा करने से पहले एक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाए। इस प्लान में स्थानीय वनस्पति, जीव-जंतु, जल परिस्थितियाँ और मछुआरों की आजीविका का ध्यान रखना अनिवार्य होगा।
रांची के गेटलसुद बांध की फ्लोटिंग सोलर परियोजना क्या है?
SECI ने रांची के गेटलसुद बांध में 100 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना शुरू की है। इसमें स्थानीय मछुआरों के लिए केज फिशरीज यानी पिंजरे में मछली पालन को बढ़ावा दिया गया है ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
बैटरी स्टोरेज में निवेश से सोलर ऊर्जा को कैसे फायदा होगा?
सोलर ऊर्जा केवल दिन में और अनुकूल मौसम में उत्पन्न होती है, इसलिए बैटरी स्टोरेज इसे 24 घंटे उपलब्ध कराने में मदद करती है। भारत बैटरी स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाकर अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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