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ZED सर्टिफिकेशन: 6.67 लाख एमएसएमई को ब्रॉन्ज-सिल्वर-गोल्ड प्रमाण, महिला उद्यमियों को 100% सब्सिडी

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ZED सर्टिफिकेशन: 6.67 लाख एमएसएमई को ब्रॉन्ज-सिल्वर-गोल्ड प्रमाण, महिला उद्यमियों को 100% सब्सिडी

सारांश

एमएसएमई मंत्रालय की ZED योजना अब 9.49 लाख पंजीकृत उद्यमों और ₹913 करोड़ की सहायता के साथ गुणवत्ता क्रांति की ओर बढ़ रही है। महिला उद्यमियों को 100% सब्सिडी और 22 राज्यों की भागीदारी इसे महज़ एक सरकारी योजना से आगे ले जाती है।

मुख्य बातें

9.49 लाख एमएसएमई ZED सर्टिफिकेशन योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं।
6.67 लाख को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर और 4,800 को गोल्ड सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया।
योजना के तहत अब तक ₹913 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित।
महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को ZED प्रमाणन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ZED को अपनी औद्योगिक नीतियों में शामिल किया; 19 वित्तीय संस्थान ब्याज और शुल्क में रियायत दे रहे हैं।
पात्र एमएसएमई को परामर्श के लिए ₹2 लाख और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए ₹3 लाख तक की सहायता उपलब्ध।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) सर्टिफिकेशन योजना के तहत अब तक 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 6.67 लाख से अधिक उद्यमों को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर और 4,800 को गोल्ड सर्टिफिकेशन प्रदान किया जा चुका है। 4 अगस्त को जारी मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत अब तक ₹913 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है। महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को ZED सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, जिससे उनके लिए प्रमाणन की लागत पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

ZED योजना क्या है और इसका उद्देश्य

जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) पहल का मूल लक्ष्य छोटे और मध्यम उद्योगों को गुणवत्ता-आधारित एवं पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण प्रक्रियाएं अपनाने के लिए प्रेरित करना है। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के जरिए उद्यमों को तकनीक, प्रबंधन प्रणाली और उत्पादन प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार हेतु प्रोत्साहन मिलता है। इससे भारतीय एमएसएमई घरेलू और वैश्विक बाज़ारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ कर सकते हैं।

गौरतलब है कि यह योजना केवल प्रमाणन तक सीमित नहीं है — यह उद्यमों को गुणवत्ता, उत्पादकता और पर्यावरणीय स्थिरता के त्रिकोण पर एक साथ काम करने का ढाँचा देती है।

वित्तीय सहायता का ढाँचा

पात्र एमएसएमई को ZED योजना के तहत कई स्तरों पर वित्तीय मदद उपलब्ध है। परीक्षण, सिस्टम या उत्पाद सर्टिफिकेशन की लागत का 75 प्रतिशत (अधिकतम ₹50,000) अनुदान के रूप में मिलता है। परामर्श और हैंडहोल्डिंग सहायता के लिए ₹2 लाख तक तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों, स्वच्छ तकनीकों और जीरो इफेक्ट समाधान अपनाने के लिए ₹3 लाख तक की सहायता दी जाती है।

इसके अतिरिक्त, 19 वित्तीय संस्थान ZED प्रमाणित उद्यमों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे उन्हें सस्ती और सुलभ वित्तीय सहायता मिल सके।

महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान

मंत्रालय के अनुसार, महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को ZED सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी देकर प्रमाणन की पूरी लागत समाप्त कर दी गई है। यह कदम महिला उद्यमियों को गुणवत्ता मानकों से जोड़ने और उनके कारोबार को औपचारिक, प्रतिस्पर्धी ढाँचे में लाने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को मुख्यधारा की औद्योगिक नीति में शामिल करने पर ज़ोर दे रही है।

राज्यों की भागीदारी और व्यापक प्रभाव

ZED योजना का प्रभाव अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगा है। 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इसे अपनी औद्योगिक नीतियों का हिस्सा बनाया है और ZED प्रमाणित एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह व्यापक भागीदारी दर्शाती है कि बड़ी संख्या में छोटे उद्योग गुणवत्ता और पर्यावरणीय मानकों को स्वेच्छा से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आने वाले समय में ZED योजना का विस्तार और अधिक राज्यों तक होने की संभावना है, जिससे भारतीय एमएसएमई क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और मज़बूत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने उद्यम ZED मानकों को व्यवहार में लागू कर रहे हैं — और कितने महज़ सब्सिडी के लिए पंजीकृत हुए। ब्रॉन्ज स्तर पर 6.67 लाख और गोल्ड पर केवल 4,800 — यह अनुपात बताता है कि गुणवत्ता की ऊपरी सीढ़ी अभी भी खाली है। 22 राज्यों की भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन बिना स्वतंत्र ऑडिट और परिणाम-आधारित मूल्यांकन के, यह योजना प्रमाणपत्र बाँटने का अभियान बनकर रह सकती है — न कि वास्तविक गुणवत्ता क्रांति।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ZED सर्टिफिकेशन योजना क्या है?
ZED यानी जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट, एमएसएमई मंत्रालय की एक योजना है जो छोटे और मध्यम उद्योगों को गुणवत्ता-आधारित और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण प्रक्रियाएं अपनाने के लिए प्रेरित करती है। इसके तहत उद्यमों को ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड — तीन स्तरों पर प्रमाणन दिया जाता है।
महिला उद्यमियों को ZED योजना में क्या विशेष लाभ मिलता है?
महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को ZED सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जिससे प्रमाणन की पूरी लागत समाप्त हो जाती है। यह प्रावधान अधिक से अधिक महिला उद्यमियों को गुणवत्ता मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया है।
ZED योजना के तहत कितनी वित्तीय सहायता मिल सकती है?
पात्र एमएसएमई को परीक्षण और सर्टिफिकेशन लागत का 75 प्रतिशत (अधिकतम ₹50,000), परामर्श के लिए ₹2 लाख तक और प्रदूषण नियंत्रण व स्वच्छ तकनीक अपनाने के लिए ₹3 लाख तक की सहायता मिलती है। अब तक कुल ₹913 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है।
ZED योजना में अब तक कितने एमएसएमई शामिल हुए हैं?
4 अगस्त को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 9.49 लाख एमएसएमई ZED योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 6.67 लाख को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर और 4,800 को गोल्ड सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है।
ZED प्रमाणित एमएसएमई को राज्यों और बैंकों से क्या अतिरिक्त लाभ मिलते हैं?
22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ZED को अपनी औद्योगिक नीतियों में शामिल कर प्रमाणित एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन देना शुरू किया है। इसके अलावा 19 वित्तीय संस्थान ऐसे उद्यमों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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