13 सितंबर 2026
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कच्चे तेल की तेजी से महंगाई 6.5% के पार जाने का खतरा, SBI रिसर्च ने RBI से 50 बेसिस पॉइंट रेपो रेट बढ़ाने की सिफारिश की

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कच्चे तेल की तेजी से महंगाई 6.5% के पार जाने का खतरा, SBI रिसर्च ने RBI से 50 बेसिस पॉइंट रेपो रेट बढ़ाने की सिफारिश की

सारांश

कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल पार करने और 123 डॉलर तक जाने की आशंका के बीच, SBI रिसर्च ने RBI से अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 आधार अंक की रेपो रेट बढ़ोतरी की सिफारिश की है। महंगाई 6.5% के पार जा सकती है — जो RBI की सहनशीलता सीमा से ऊपर होगा।

मुख्य बातें

SBI रिसर्च ने RBI से अक्टूबर में 25 bps और दिसंबर में अतिरिक्त 25 bps रेपो रेट बढ़ाने की सिफारिश की।
कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर चुका है, 15 दिनों में 123 डॉलर तक पहुँचने का अनुमान।
अक्टूबर-नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे ऊपर जा सकती है।
10 साल के भारतीय बॉन्ड यील्ड 7.15 प्रतिशत या उससे ऊपर जाने का अनुमान।
मार्च 2027 तक सिस्टम लिक्विडिटी ₹6 लाख करोड़ के स्तर पर आने की उम्मीद।
पेट्रोलियम, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और बेवरेज सेक्टर में लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल के चलते भारत में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर-नवंबर तक 6.5 प्रतिशत या उससे भी ऊपर पहुँच सकती है। रिपोर्ट में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अक्टूबर में 25 आधार अंक और दिसंबर में अतिरिक्त 25 आधार अंक — कुल मिलाकर 50 बेसिस पॉइंट — की रेपो रेट बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है। 12 सितंबर को जारी यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भू-राजनीतिक अस्थिरता ने ऊर्जा बाज़ारों में भारी उथल-पुथल मचा रखी है।

कच्चे तेल के दाम और महंगाई का सीधा संबंध

रिपोर्ट में बताया गया है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल का बेंचमार्क पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुका है। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि अगले 15 दिनों में यह 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकता है। यदि कच्चा तेल इन ऊँचे स्तरों पर बना रहता है, तो अक्टूबर और नवंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 6.5 प्रतिशत के पार जा सकती है — जो RBI के 6 प्रतिशत के सहनशीलता स्तर से ऊपर होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में महंगाई दर लगभग 4.8 से 4.9 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, लेकिन आने वाले महीनों में तेल की कीमतों का दबाव इसे तेज़ी से ऊपर धकेल सकता है।

किन क्षेत्रों पर पड़ रहा असर

खुदरा महंगाई बढ़ने के शुरुआती संकेत कई क्षेत्रों में दिखने लगे हैं। पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस, बेवरेज, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स — इन सभी सेक्टरों में इनपुट लागत का बढ़ता बोझ अब सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कोई भी तेज़ उछाल घरेलू अर्थव्यवस्था पर त्वरित प्रभाव डालता है।

लिक्विडिटी और बॉन्ड यील्ड पर दबाव

लिक्विडिटी के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया कि हाल ही में जुटाए गए फंड काफ़ी हद तक बैंकिंग सिस्टम की फंडिंग की कमी को पूरा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 'क्रेडिट की मज़बूत माँग और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के मज़बूत आँकड़ों को देखते हुए, अभी जो तेज़ी आई है, उसमें स्वाभाविक रूप से कमी आएगी।' एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि मार्च 2027 तक सिस्टम में लिक्विडिटी ₹6 लाख करोड़ के स्तर पर होनी चाहिए।

बॉन्ड बाज़ार की बात करें तो रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 10 साल के बेंचमार्क भारतीय यील्ड 7.15 प्रतिशत या उससे भी ऊपर जा सकते हैं। वैश्विक स्तर पर भी यील्ड पिछले दस वर्षों के उच्चतम स्तर को पार कर रहे हैं — अमेरिकी 10 साल का यील्ड अब 5 प्रतिशत के करीब है, जबकि 30 साल का यील्ड घटकर 5.40 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है।

RBI के लिए क्या हैं विकल्प

एसबीआई रिसर्च की सिफारिश के अनुसार, ये सभी कारक — ऊँचा तेल, बढ़ती महंगाई, घटती लिक्विडिटी और वैश्विक यील्ड में उछाल — मिलकर ब्याज दरों को 50 आधार अंक तक बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब RBI ने हाल के मौद्रिक नीति चक्र में रेपो रेट में कटौती की दिशा में कदम बढ़ाए थे। यदि तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं, तो केंद्रीय बैंक को अपनी नीतिगत दिशा पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

आम जनता पर असर

रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई पर पड़ेगा। इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें पेट्रोल-डीज़ल, एलपीजी और परिवहन लागत को बढ़ाकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी को और महँगा बना सकती हैं। आने वाले हफ्तों में RBI की अक्टूबर मौद्रिक नीति बैठक और कच्चे तेल की चाल — दोनों पर बाज़ार की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल माँग को दबाकर विकास दर को नुकसान पहुँचाएगी। गौरतलब है कि 2022 के तेल-झटके में भी RBI ने 250 bps की बढ़ोतरी की थी, लेकिन खाद्य महंगाई काफ़ी हद तक मौद्रिक नीति से स्वतंत्र रही। बिना राजकोषीय उपायों — जैसे उत्पाद शुल्क में कटौती — के, अकेले रेपो रेट बढ़ाना अधूरा नुस्खा साबित हो सकता है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SBI रिसर्च ने RBI से कितनी रेपो रेट बढ़ोतरी की सिफारिश की है?
SBI रिसर्च ने RBI से कुल 50 आधार अंक (बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी की सिफारिश की है — अक्टूबर में 25 bps और दिसंबर में अतिरिक्त 25 bps। यह सिफारिश कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के 6.5 प्रतिशत से ऊपर जाने की आशंका के मद्देनज़र दी गई है।
कच्चे तेल की कीमतें कितनी ऊँची जा सकती हैं?
SBI रिसर्च के अनुसार, कच्चे तेल का बेंचमार्क पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुका है और अगले 15 दिनों में 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक अस्थिरता इस उछाल का प्रमुख कारण बताया गया है।
रेपो रेट बढ़ने से आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ सकती है। इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें पेट्रोल-डीज़ल, एलपीजी और परिवहन लागत को बढ़ाकर रोज़मर्रा के खर्च में इज़ाफ़ा कर सकती हैं।
भारतीय बॉन्ड यील्ड कहाँ तक जा सकती है?
SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, 10 साल के बेंचमार्क भारतीय यील्ड 7.15 प्रतिशत या उससे भी ऊपर जा सकते हैं। वैश्विक स्तर पर भी यील्ड पिछले दस वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच रहे हैं।
अगस्त में महंगाई दर कितनी रहने का अनुमान है?
SBI रिसर्च के अनुसार, अगस्त में खुदरा महंगाई दर लगभग 4.8 से 4.9 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। हालाँकि, तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं तो अक्टूबर-नवंबर तक यह 6.5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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