एशियन गेम्स 2026: अंकुश पंघाल की 5-0 से जीत, 80 किग्रा क्वार्टर फाइनल में एंट्री
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स 2026 में अपना शानदार सफर जारी रखते हुए 23 सितंबर को आइची-नागोया में राउंड ऑफ 16 में बहरीन के हम्सा वोगेल को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराकर 80 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की कर ली। अपने पहले एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे 21 वर्षीय पंघाल के इस प्रदर्शन ने भारत की मेडल उम्मीदें और मज़बूत कर दी हैं।
मुख्य मुकाबले का हाल
पंघाल ने पूरे मुकाबले में अपनी रिंग पर पकड़ बनाए रखी। उन्होंने सटीक कॉम्बिनेशन पंच और नियंत्रित फुटवर्क का इस्तेमाल करते हुए बहरीनी प्रतिद्वंद्वी को कभी भी अपनी लय में नहीं आने दिया। पाँचों जज एकमत रहे, जो युवा मुक्केबाज की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण है।
इससे पहले राउंड ऑफ 32 में पंघाल ने ब्रुनेई के वोगेल को 3-0 से हराया था। उस मुकाबले में उन्होंने पहले राउंड में जजों से परफेक्ट 10 स्कोर हासिल किया था, और आखिरी राउंड में अनुशासित डिफेंस से अपनी बढ़त सुरक्षित रखी थी।
अगला पड़ाव: क्वार्टर फाइनल
क्वार्टर फाइनल में पंघाल का मुकाबला ताजिकिस्तान के नेक्रुज सलिमोव से होगा। यह जीत उन्हें सेमीफाइनल और मेडल से मात्र एक जीत दूर ले जाएगी। गौरतलब है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट पंघाल पिछले साल वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में सिल्वर मेडल भी जीत चुके हैं, जो उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव की गवाही देता है।
भारतीय बॉक्सिंग टीम का प्रदर्शन
आइची-नागोया में अब तक रिंग में उतरे सभी चार भारतीय बॉक्सर अपने-अपने शुरुआती मुकाबले जीत चुके हैं, जो टीम के लिए बेहद उत्साहजनक शुरुआत है।
जदुमणि सिंह ने पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग में नेपाल के चंद्र बहादुर थापा को 5-0 से मात देकर अगले दौर में प्रवेश किया। साक्षी चौधरी ने महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग में फिलीपींस की पेरिस ओलंपियन आइरा विलेगास को 5-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की।
आगे की चुनौती
साक्षी चौधरी का अगला मुकाबला राउंड ऑफ 16 में वर्ल्ड चैंपियन अलुआ बाल्किबेकोवा से होगा, जो उनकी अब तक की सबसे कठिन परीक्षा होगी। वहीं पंघाल यदि सलिमोव को पार कर लेते हैं, तो भारत के लिए 80 किग्रा वर्ग में ऐतिहासिक मेडल लगभग सुनिश्चित हो जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाजी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश की है। एशियन गेम्स में मेडल इस अभियान को नई ऊर्जा देगा।