एसओ-12 गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच तक भूख हड़ताल जारी रहेगी: रणजोद सिंह, 10वाँ दिन
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में खेल कोटे की भर्ती में कथित धांधली के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे रणजोद सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि एसओ-12 सूची में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच शुरू होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 16 अगस्त 2026 को उनकी भूख हड़ताल का 10वाँ दिन था और प्रदर्शनकारियों का हौसला बरकरार रहा।
मुख्य माँगें और आरोप
रणजोद सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर खेल परिषद की सचिव नुजहत गुल के तत्काल स्थानांतरण की माँग की है। आरोप है कि नुजहत गुल पिछले छह वर्षों से इसी पद पर बनी हुई हैं, जबकि उनकी देखरेख में आए कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के इस दौरान तीन से चार बार तक तबादले हो चुके हैं।
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि खेल मंत्रालय की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक धांधली हुई है और ओलंपिक खेलों की बजाय पैंसिसलाड जैसे खेलों को प्राथमिकता दी जा रही है — एक ऐसा खेल जिसे कथित तौर पर भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) भी मान्यता नहीं देता।
रणजोद सिंह का बयान
रणजोद सिंह ने कहा कि उनकी भूख हड़ताल तब तक समाप्त नहीं होगी जब तक खिलाड़ियों को 'अंधकार में डालने वाली' नीति का खात्मा नहीं होता और एसओ-12 में हुई गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगी।
युवा कांग्रेस का समर्थन
भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब भी इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुँचे। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और खेल मंत्री सतीश शर्मा से रणजोद की माँगों पर ध्यान देने और निष्पक्ष जांच का समर्थन करने की अपील की। उदय भानु चिब ने कहा कि इस मामले में विभागीय जांच से कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलेगा।
उन्होंने नुजहत गुल के स्थानांतरण की माँग का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि इस भूख हड़ताल को दबाने के लिए रणजोद और प्रदर्शनकारी युवाओं पर लगातार दबाव डाला जा रहा है — जिसमें कथित तौर पर एफआईआर दर्ज करना और सोशल मीडिया पोस्ट हटवाना भी शामिल है।
क्या होगा आगे
यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर में खेल कोटे की भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र शासित प्रदेश में खेल प्रशासन सुधार की माँगें पहले से उठती रही हैं। सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और आंदोलन के अगले कदम की नज़र प्रशासन के रुख पर टिकी है।