एसओ-12 गड़बड़ी की जांच तक भूख हड़ताल जारी रखेंगे रणजोद सिंह, 10वें दिन भी अड़े
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू में रणजोद सिंह की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर के खेल कोटे में कथित भ्रष्टाचार और एसओ-12 सूची में हुई कथित गड़बड़ी के विरोध में चल रही भूख हड़ताल रविवार, 17 अगस्त 2025 को अपने 10वें दिन में प्रवेश कर गई। रणजोद सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जब तक एसओ-12 में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
मुख्य मांगें और आरोप
प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर खेल परिषद की सचिव नुजहत गुल का तत्काल स्थानांतरण करने की मांग रखी है, जो कथित तौर पर पिछले छह वर्षों से इसी पद पर बनी हुई हैं। रणजोद ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके अधीन काम करने वाले कई आईएएस अधिकारियों के तीन से चार बार तक तबादले हो चुके हैं, जबकि नुजहत गुल का कोई स्थानांतरण नहीं हुआ।
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि खेल मंत्रालय की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक धांधली हुई है और ओलंपिक खेलों की जगह पैंसिसलाड जैसे खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) तक मान्यता नहीं देता।
रणजोद सिंह का बयान
रणजोद सिंह ने कहा कि उनकी भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक खिलाड़ियों को अंधकार में रखने वाली नीति को समाप्त नहीं किया जाता और एसओ-12 में हुई कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच नहीं होती। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगी।
युवा कांग्रेस का समर्थन
भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब भी इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और खेल मंत्री सतीश शर्मा से रणजोद की निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन करने की अपील की। उदय भानु चिब ने कहा कि इस मामले में केवल विभागीय जांच से कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलेगा।
दबाव और एफआईआर के आरोप
उदय भानु चिब ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस भूख हड़ताल को समाप्त कराने के लिए रणजोद सिंह और प्रदर्शनकारी युवाओं पर लगातार दबाव डाला जा रहा है। कथित तौर पर इसमें एफआईआर दर्ज करना और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने जैसे कदम शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में खेल भर्ती पारदर्शिता पहले से ही सवालों के घेरे में है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि रणजोद सिंह की भूख हड़ताल के 10 दिन पूरे होने के बावजूद सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।