टी20 वर्ल्ड कप 2026: गौतम गंभीर का 'मास्टर स्ट्रोक' टीम इंडिया के लिए बन गया सफलता का मंत्र
सारांश
Key Takeaways
- गौतम गंभीर का कोचिंग में योगदान महत्वपूर्ण रहा।
- संजू सैमसन की शानदार बैटिंग ने टीम को जीत दिलाई।
- टीम इंडिया ने 96 रनों से न्यूजीलैंड को हराया।
- संजू को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिला।
- कोच ने खिलाड़ियों पर भरोसा करके उन्हें सही समय पर मौका दिया।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 वर्ल्ड कप का खिताब रिकॉर्ड तीसरी बार अपने नाम किया। रविवार को नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए फाइनल में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया। इस टूर्नामेंट में मुख्य कोच गौतम गंभीर का 'मास्टर स्ट्रोक' टीम के लिए एक महत्वपूर्ण वरदान साबित हुआ।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत से पहले संजू सैमसन खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेली गई टी20 श्रृंखला में उन्हें केवल एक पारी का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 22 गेंदों पर 37 रन बनाये। उनकी फॉर्म कमजोर थी और टीम में उनकी जगह बनती नहीं दिख रही थी। फिर भी, कोच गौतम गंभीर ने उन्हें विश्व कप के लिए चुनी गई टीम में शामिल किया।
टी20 विश्व कप 2026 से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला में संजू का बल्ला खामोश रहा। उन्होंने 5 मुकाबलों में केवल 46 रन बनाये। विश्व कप के पहले मैचों में ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने पारी की शुरुआत की, लेकिन अभिषेक ग्रुप स्टेज के 3 मैचों में खाता भी नहीं खोल सके। उनकी सलामी जोड़ी विफलता का सामना कर रही थी।
सुपर-8 राउंड में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारतीय टीम की प्लेइंग 11 में बदलाव किया गया और संजू सैमसन को पहला मौका मिला। उन्होंने 15 गेंदों में 24 रन बनाये, जिसमें उनका आत्मविश्वास उभरकर आया, जो टीम के लिए आवश्यक था।
वेस्टइंडीज के खिलाफ कोच गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने फिर से संजू को बैक किया और उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में उतारा। 'करो या मरो' मुकाबले में संजू ने 50 गेंदों में 97 रन बनाकर अपनी काबिलियत साबित की।
सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ संजू ने 42 गेंदों में 89 रन बनाकर टीम को 253 रनों तक पहुंचाया। उनकी इन शानदार पारियों ने साबित किया कि क्यों कोच गौतम गंभीर और टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा किया।
फाइनल में, संजू ने मानो अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए 46 गेंदों में 89 रन बनाये और मुकाबले को एकतरफा कर दिया। उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। संजू और टीम की सफलता के पीछे कोच गंभीर का बड़ा हाथ था, जिन्होंने निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद उन पर भरोसा रखा और उनका सही समय पर उपयोग किया, जिससे भारतीय टीम को लाभ मिला।