तेजस्विन शंकर घुटने की चोट से हाई जंप से बाहर, डेकाथलॉन पर टिकाई नज़र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय एथलेटिक्स के बहुआयामी खिलाड़ी तेजस्विन शंकर का हाई जंप अभियान 28 जुलाई 2026 को घुटने की पुरानी टेंडोनाइटिस चोट के अचानक भड़कने के कारण पहले ही प्रयास में समाप्त हो गया। 2.05 मीटर की पहली छलांग के दौरान घुटने में तीव्र दर्द महसूस होते ही उन्होंने प्रतियोगिता से हटने का निर्णय लिया, ताकि गुरुवार से आरंभ होने वाले डेकाथलॉन इवेंट के लिए अपनी शारीरिक स्थिति को संरक्षित रख सकें।
चोट का विवरण और तत्काल निर्णय
तेजस्विन ने बताया, "यह चोट ऐसे समय पर आई, जब मुझे अपने प्रदर्शन पर पूरा भरोसा था और एक और बड़ा पदक जीतने के इरादे से मैं मैदान में उतरा था। लेकिन, मैंने 2.05 मीटर की अपनी पहली कोशिश में ही घुटने में दर्द महसूस किया। इसके बाद दूसरी छलांग लगाने का जोखिम नहीं उठाया।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नई चोट नहीं, बल्कि घुटने में लंबे समय से चली आ रही टेंडोनाइटिस की समस्या है जो वार्म-अप के दौरान ही अचानक तेज हो गई।
वार्म-अप की दूसरी कोशिश में ही उन्हें अंदाज़ा हो गया था कि घुटना पूरी तरह साथ देने की स्थिति में नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ एक प्रयास किया। तेजस्विन का मानना था कि ठंड और बारिश जैसे चुनौतीपूर्ण मौसम में वह परंपरागत रूप से अच्छा प्रदर्शन करते हैं, परंतु इस बार शरीर ने साथ नहीं दिया।
डेकाथलॉन को प्राथमिकता
तेजस्विन ने अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हाई जंप में आगे जोखिम न उठाने का फैसला किया। उनके अनुसार, डेकाथलॉन शुरू होने में दो दिन का समय था, इसलिए इन दो दिनों में वह पूरी तरह रिकवरी पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह निर्णय उनकी परिपक्वता और रणनीतिक सोच को दर्शाता है — एक इवेंट में जोखिम उठाकर बड़े लक्ष्य को खतरे में न डालना।
गौरतलब है कि तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी हैं और 8,000 अंकों का आँकड़ा पार करने वाले पहले भारतीय एथलीट हैं। वह एशियाई खेलों में डेकाथलॉन का रजत पदक और एशियाई चैंपियनशिप में दो पदक जीत चुके हैं।
सर्वेश कुशारे का शानदार प्रदर्शन
इस बीच, भारत के एक अन्य हाई जम्पर सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय अंतर-राज्य सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कुशारे ने 2.31 मीटर की छलांग लगाकर तेजस्विन शंकर का आठ वर्ष पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। हालाँकि इस प्रतियोगिता में 2.28 मीटर की तीन असफल कोशिशों के कारण वह स्वर्ण पदक से चूक गए।
खुद चोटिल होने के बावजूद तेजस्विन पूरे समय मैदान पर डटे रहे और सर्वेश का उत्साहवर्धन करते रहे। उन्होंने सर्वेश की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में जिस तरह उन्होंने प्रदर्शन किया, वह भारतीय एथलेटिक्स के लिए गर्व की बात है। तेजस्विन के अनुसार, ट्रैक एवं फील्ड में भारत का पहला पदक एक बड़ी उपलब्धि है।
आगे क्या
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के हाई जंप कांस्य पदक विजेता तेजस्विन शंकर दो दिनों की रिकवरी के बाद डेकाथलॉन में किस स्तर का प्रदर्शन करते हैं। यह स्पर्धा उनके करियर की सबसे महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक होगी — चोट के बाद मानसिक और शारीरिक दोनों मोर्चों पर।