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तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में जीता ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को 9वें दिन 6 मेडल

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तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में जीता ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को 9वें दिन 6 मेडल

सारांश

तेजस्विन शंकर ने ग्लासगो में 7,976 अंकों के साथ डेकाथलॉन ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रच दिया — वे इस सबसे कठिन ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। 9वें दिन भारत को कुल 6 मेडल मिले, जिनमें दो गोल्ड भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
उन्होंने 7,976 अंक हासिल कर तीसरा स्थान पाया।
तेजस्विन डेकाथलॉन में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने।
1 अगस्त 2026 को भारत ने 9वें दिन कुल 6 मेडल जीते, जिनमें 2 गोल्ड शामिल हैं।
तेजस्विन ने यह मेडल अपने प्रशंसकों और समर्थकों को समर्पित किया।

तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन ग्लासगो में डेकाथलॉन स्पर्धा में 7,976 अंक हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल जीता और ट्रैक एंड फील्ड के इस सबसे कठिन इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। 1 अगस्त 2026 को भारत की झोली में एक ही दिन में दो गोल्ड सहित कुल 6 मेडल आए, जिससे यह दिन इन खेलों में भारत के लिए सबसे यादगार दिनों में से एक बन गया।

ऐतिहासिक उपलब्धि का सफर

डेकाथलॉन ट्रैक एंड फील्ड की दस स्पर्धाओं का संयुक्त आयोजन होता है, जिसे एथलेटिक्स का सबसे चुनौतीपूर्ण इवेंट माना जाता है। तेजस्विन शंकर ने 48 घंटों तक चली इस प्रतिस्पर्धा में 7,976 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। यह भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया अध्याय है, क्योंकि इससे पहले कोई भारतीय खिलाड़ी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर डेकाथलॉन में पदक नहीं जीत पाया था।

तेजस्विन के शब्दों में जीत का एहसास

पदक जीतने के बाद तेजस्विन ने कहा, 'यह मेरे लिए बेहद खास है। जाहिर तौर पर भारत के लिए मेडल जीतना गर्व की बात है। जब आप पोडियम पर खड़े होते हैं, तो इससे बेहतर एहसास और कुछ नहीं होता।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे बड़ी संतुष्टि यह थी कि वे परिणाम की चिंता किए बिना भारत की जर्सी पहनकर खेल सके।

डेकाथलॉन और जीवन का दर्शन

तेजस्विन ने इस खेल को जीवन के दर्शन से जोड़ते हुए कहा, 'डेकाथलॉन एक ऐसा खेल है, जो आपको जिंदगी के बारे में सिखाता है। इस खेल में हर मोड़ पर काफी उतार-चढ़ाव होते हैं। जब तक आखिरी रेस खत्म नहीं हो जाती, तब तक आपको नहीं पता होता कि क्या होने वाला है।' उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों में 'एक समय पर एक ही चीज पर ध्यान देने' की सीख ने उन्हें पदक तक पहुँचाया।

भारत का 9वें दिन का प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भारत ने दो गोल्ड सहित कुल 6 मेडल जीते, जो इन खेलों में भारत के लिए किसी एक दिन का शानदार प्रदर्शन रहा। तेजस्विन ने यह मेडल अपने समर्थकों और प्रशंसकों को समर्पित किया।

आगे की राह

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद तेजस्विन शंकर भारतीय डेकाथलॉन का चेहरा बन गए हैं। यह जीत आने वाले एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स में डेकाथलॉन को नई पहचान दिलाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय एथलेटिक्स की सोच में बदलाव का संकेत है — देश अब केवल दौड़ और कूद की एकल स्पर्धाओं से आगे बढ़कर बहु-स्पर्धा इवेंट में भी दावेदारी कर रहा है। डेकाथलॉन जैसे खेल में, जहाँ 48 घंटे में दस अलग-अलग इवेंट में निरंतरता बनाए रखनी होती है, भारतीय प्रशिक्षण ढाँचे की परिपक्वता दिखती है। सवाल यह है कि क्या यह व्यक्तिगत प्रतिभा की उपज है या संस्थागत तैयारी का नतीजा — और अगर दूसरा है, तो अगले ओलंपिक चक्र में भारत इस मोर्चे पर और कितने तेजस्विन तैयार कर सकता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्या उपलब्धि हासिल की?
तेजस्विन शंकर ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7,976 अंकों के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। वे इस इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने।
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कितने अंक हासिल किए?
तेजस्विन शंकर ने 7,976 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह प्रदर्शन 48 घंटों में दस अलग-अलग ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में किया गया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भारत ने कितने मेडल जीते?
1 अगस्त 2026 को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 9वें दिन भारत ने कुल 6 मेडल जीते, जिनमें 2 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं।
डेकाथलॉन में भारत के लिए यह जीत ऐतिहासिक क्यों है?
डेकाथलॉन ट्रैक एंड फील्ड का सबसे कठिन इवेंट माना जाता है, जिसमें दस अलग-अलग स्पर्धाएँ होती हैं। इससे पहले कोई भारतीय एथलीट किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस इवेंट में पदक नहीं जीत पाया था, इसलिए तेजस्विन की यह जीत ऐतिहासिक है।
तेजस्विन शंकर ने यह मेडल किसे समर्पित किया?
तेजस्विन शंकर ने अपना ब्रॉन्ज मेडल अपने प्रशंसकों और समर्थकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि भारत की जर्सी पहनकर पोडियम पर खड़े होने से बेहतर कोई एहसास नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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