वीवीएस लक्ष्मण: बीसीसीआई सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं, आधुनिक क्रिकेट में चोटें अपरिहार्य
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु में 9 अगस्त को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि शीर्ष स्तर के क्रिकेट में चोट लगना एक अनिवार्य वास्तविकता है, न कि किसी की विफलता का संकेत। उन्होंने रेखांकित किया कि बेंगलुरु के बाहरी इलाके में करीब 40 एकड़ में फैले इस हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की भूमिका केवल चोटिल खिलाड़ियों के पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खिलाड़ियों को उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार करने का व्यापक केंद्र है।
सीओई की भूमिका और दायरा
लक्ष्मण ने कहा, 'सीओई सिर्फ एक रिहैब सेंटर नहीं है। क्रिकेटर्स को बेहतरीन प्रदर्शन करने में मदद करने के लिए इसकी भूमिका और भी बड़ी है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज के खिलाड़ियों को उनके समय की तुलना में कहीं अधिक क्रिकेट खेलना पड़ता है — टी20 और तीनों फॉर्मेट के आगमन ने खेल का बोझ उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यही वह जगह है जहाँ सीओई और स्पोर्ट्स साइंस एवं मेडिसिन (एसएसएम) स्टाफ की भूमिका निर्णायक हो जाती है — और यह सुविधा केवल अनुबंधित या चुने हुए खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि राज्य स्तर के खिलाड़ियों के लिए भी उपलब्ध है।
चोट को नकारात्मक नहीं, खेल का हिस्सा मानें
लक्ष्मण ने चोट को लेकर मानसिकता बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'अगर आप चोट से बचने के बारे में सोच रहे हैं, तो आप अपनी पूरी क्षमता से नहीं खेल रहे हैं।' उनके अनुसार, शीर्ष खिलाड़ी एक सीरीज के बाद अगली सीरीज के लिए खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश में अपने शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं — और यह प्रक्रिया ही कभी-कभी चोट का कारण बनती है। उन्होंने कहा, 'चोट लगती है और हमें यह समझना होगा कि यह उस तीव्रता के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का एक हिस्सा है जिसकी हम उनसे उम्मीद करते हैं।'
बुमराह और साई सुदर्शन: कंडीशनल सिलेक्शन की प्रक्रिया
इस समय जसप्रीत बुमराह, बी. साई सुदर्शन, हार्दिक पांड्या, नीतीश कुमार रेड्डी, आकाश दीप, प्रिंस यादव और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ी सीओई में अलग-अलग चोटों से उबर रहे हैं। लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि बुमराह और साई सुदर्शन को श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए 'फिटनेस की शर्त' (एस्टरिस्क) के साथ चुना गया था। उन्होंने कहा, 'उस एस्टरिस्क का मतलब है — फिटनेस पर निर्भर। इसलिए, बुमराह और साई सुदर्शन को श्रीलंका दौरे के लिए फिटनेस क्लीयरेंस मिलने पर ही चुना जाना था।'
सेलेक्शन प्रक्रिया में पारदर्शिता
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि सेलेक्शन मीटिंग आमतौर पर टीम के रवाना होने से कम से कम तीन-चार हफ्ते पहले होती है, इसलिए उस समय किसी खिलाड़ी की सटीक फिटनेस स्थिति का अनुमान लगाना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा, 'यह इंसानी शरीर है, कोई मशीन नहीं। इसलिए, उनके शरीर की बनावट के आधार पर उन्हें ठीक होने में 14 या 28 दिन लग सकते हैं।' लक्ष्मण ने यह भी कहा कि सीओई, दोनों टीमों के मैनेजमेंट, एसएसएम स्टाफ और सिलेक्शन कमेटी के बीच बेहतरीन तालमेल है — और 'दोष' की संस्कृति को सिरे से खारिज किया।
आगे की राह
लक्ष्मण का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय टीम में चोटों की बढ़ती संख्या को लेकर मीडिया और क्रिकेट विशेषज्ञों में चर्चा तेज है। सीओई का उद्देश्य न केवल खिलाड़ियों को चोट से उबारना है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें निगरानी, पुनर्वास और प्रदर्शन सुधार एक साथ चलें — ताकि भारतीय क्रिकेट का भविष्य और मजबूत हो।