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10 साल में 152 पेपर लीक: राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने बिहार सरकार की कमेटी पर उठाए सवाल

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10 साल में 152 पेपर लीक: राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने बिहार सरकार की कमेटी पर उठाए सवाल

सारांश

10 साल में 152 पेपर लीक — और अब सरकार ने एक कमेटी बना दी। राजद विधायक भाई वीरेंद्र का सवाल सीधा है: जब संजीव मुखिया जैसे मामलों में क्लीन चिट मिल जाती है, तो रिटायर्ड जजों की समिति से सुधार की उम्मीद कैसे रखें? बिहार के युवाओं का भरोसा दाँव पर है।

मुख्य बातें

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में पिछले 10 वर्षों में कम से कम 152 पेपर लीक की घटनाएँ हो चुकी हैं।
बिहार सरकार द्वारा गठित पाँच सदस्यीय पैनल पर उन्होंने भरोसा जताने से इनकार किया।
संजीव मुखिया को क्लीन चिट दिए जाने का हवाला देते हुए सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
झारखंड में छात्रों की 'भर्ती सुधार यात्रा' को उनका समर्थन; देशभर के युवा आंदोलनों को जायज बताया।
भागलपुर में गंगा नदी का तटबंध टूटने पर निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोकतांत्रिक दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने 24 अगस्त 2026 को बिहार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में कम से कम 152 पेपर लीक की घटनाएँ हो चुकी हैं और वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। उन्होंने सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए गठित पाँच सदस्यीय पैनल को नाकाफी बताते हुए कहा कि रिटायर्ड जजों की कमेटी बनाने से व्यवस्था में ठोस सुधार की उम्मीद रखना मुश्किल है।

पेपर लीक पर सरकारी कदम पर अविश्वास

भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार सरकार की ओर से परीक्षा सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भरोसा करना आसान नहीं है। उन्होंने संजीव मुखिया को क्लीन चिट दिए जाने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे उदाहरणों के बाद सरकार की नीयत और नए उपायों की विश्वसनीयता दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, देश में जज हों या राजनेता — सभी उसी व्यवस्था का हिस्सा हैं जिसे सुधारने की जरूरत है।

युवाओं के भविष्य और भर्ती सुधार पर जोर

राजद विधायक ने कहा कि देश के युवा अब जाग चुके हैं और वे अपने अधिकारों तथा भविष्य के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं। झारखंड में छात्रों द्वारा निकाली जा रही 'भर्ती सुधार यात्रा' का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि देश के किसी भी राज्य में अगर युवा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर आंदोलन करते हैं, तो उनका साथ दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, रोजगार और परीक्षा में पारदर्शिता युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दे हैं।

भागलपुर बाढ़ और तटबंध टूटने पर सवाल

भागलपुर में गंगा नदी के तटबंध टूटने की घटना पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में बाढ़ और तटबंध टूटना हर साल की त्रासदी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इन तटबंधों के निर्माण और मरम्मत पर हर साल करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आ रहा। विधानसभा में एक पूर्व मंत्री द्वारा तटबंध टूटने के लिए चूहे को जिम्मेदार ठहराए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने व्यंग्य किया कि जहाँ निर्माण में वित्तीय अनियमितताएँ होती हैं, वहाँ दोष हमेशा किसी और पर डाल दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजों के जमाने में बनी इमारतें और पुल आज भी खड़े हैं, जबकि आज के कई पुल पाँच से दस साल में ही जर्जर हो जाते हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चिंता

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी बहस पर भाई वीरेंद्र ने इसे लोकतांत्रिक दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने विपक्ष की उस चिंता को उचित ठहराया कि दस्तावेजों की कमी के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

अयोध्या मछली दावत विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या में स्वागत समारोह के दौरान आयोजित मछली दावत पर पूछे गए सवाल पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि वह स्वयं शाकाहारी हैं, इसलिए इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मांसाहार करने वाले लोगों के लिए सावन के नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएँ हो सकती हैं।

गौरतलब है कि बिहार में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शिक्षक भर्ती को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी जारी हैं। राजद विधायक के इन बयानों के बाद सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह किसी भी नई कमेटी की साख को शुरू से ही कमजोर करता है। जब तक जवाबदेही तंत्र स्वतंत्र और पारदर्शी नहीं होगा, तब तक ऐसी घोषणाएँ केवल राजनीतिक प्रबंधन बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में पिछले 10 साल में कितने पेपर लीक हुए हैं?
राजद विधायक भाई वीरेंद्र के अनुसार, बिहार में पिछले 10 वर्षों में कम से कम 152 पेपर लीक की घटनाएँ हो चुकी हैं और वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। यह आँकड़ा राज्य की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बिहार सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
बिहार सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए एक पाँच सदस्यीय पैनल का गठन किया है, जिसमें रिटायर्ड जजों को शामिल किए जाने की बात कही जा रही है। हालाँकि विपक्षी नेताओं ने इस कदम की पर्याप्तता पर सवाल उठाए हैं।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने संजीव मुखिया का जिक्र क्यों किया?
भाई वीरेंद्र ने संजीव मुखिया को क्लीन चिट दिए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों के बाद सरकार के नए कदमों पर भरोसा करना मुश्किल है। उनके अनुसार यह घटना सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाती है।
भागलपुर में तटबंध टूटने पर भाई वीरेंद्र ने क्या कहा?
भाई वीरेंद्र ने कहा कि भागलपुर में गंगा नदी के तटबंध टूटने जैसी घटनाएँ बिहार में हर साल होती हैं, जबकि निर्माण और मरम्मत पर हर साल करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होते हैं। उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं को इसकी मुख्य वजह बताया।
झारखंड की 'भर्ती सुधार यात्रा' पर राजद का क्या रुख है?
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने झारखंड में छात्रों द्वारा निकाली जा रही 'भर्ती सुधार यात्रा' का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी राज्य में युवा अगर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर आंदोलन करते हैं, तो उनका साथ दिया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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