10 साल में 152 पेपर लीक: राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने बिहार सरकार की कमेटी पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने 24 अगस्त 2026 को बिहार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में कम से कम 152 पेपर लीक की घटनाएँ हो चुकी हैं और वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। उन्होंने सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए गठित पाँच सदस्यीय पैनल को नाकाफी बताते हुए कहा कि रिटायर्ड जजों की कमेटी बनाने से व्यवस्था में ठोस सुधार की उम्मीद रखना मुश्किल है।
पेपर लीक पर सरकारी कदम पर अविश्वास
भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार सरकार की ओर से परीक्षा सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भरोसा करना आसान नहीं है। उन्होंने संजीव मुखिया को क्लीन चिट दिए जाने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे उदाहरणों के बाद सरकार की नीयत और नए उपायों की विश्वसनीयता दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, देश में जज हों या राजनेता — सभी उसी व्यवस्था का हिस्सा हैं जिसे सुधारने की जरूरत है।
युवाओं के भविष्य और भर्ती सुधार पर जोर
राजद विधायक ने कहा कि देश के युवा अब जाग चुके हैं और वे अपने अधिकारों तथा भविष्य के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं। झारखंड में छात्रों द्वारा निकाली जा रही 'भर्ती सुधार यात्रा' का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि देश के किसी भी राज्य में अगर युवा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर आंदोलन करते हैं, तो उनका साथ दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, रोजगार और परीक्षा में पारदर्शिता युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दे हैं।
भागलपुर बाढ़ और तटबंध टूटने पर सवाल
भागलपुर में गंगा नदी के तटबंध टूटने की घटना पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में बाढ़ और तटबंध टूटना हर साल की त्रासदी बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इन तटबंधों के निर्माण और मरम्मत पर हर साल करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आ रहा। विधानसभा में एक पूर्व मंत्री द्वारा तटबंध टूटने के लिए चूहे को जिम्मेदार ठहराए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने व्यंग्य किया कि जहाँ निर्माण में वित्तीय अनियमितताएँ होती हैं, वहाँ दोष हमेशा किसी और पर डाल दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजों के जमाने में बनी इमारतें और पुल आज भी खड़े हैं, जबकि आज के कई पुल पाँच से दस साल में ही जर्जर हो जाते हैं।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चिंता
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी बहस पर भाई वीरेंद्र ने इसे लोकतांत्रिक दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने विपक्ष की उस चिंता को उचित ठहराया कि दस्तावेजों की कमी के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
अयोध्या मछली दावत विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या में स्वागत समारोह के दौरान आयोजित मछली दावत पर पूछे गए सवाल पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि वह स्वयं शाकाहारी हैं, इसलिए इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मांसाहार करने वाले लोगों के लिए सावन के नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएँ हो सकती हैं।
गौरतलब है कि बिहार में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शिक्षक भर्ती को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी जारी हैं। राजद विधायक के इन बयानों के बाद सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।