क्या पाकिस्तान और ईरान ने एक ही दिन में 4000 अफगान रिफ्यूजी को निकाला?
सारांश
Key Takeaways
- ईरान और पाकिस्तान ने 4000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को निकाला।
- तालिबान ने इस निकासी की जानकारी साझा की।
- अफगान रिफ्यूजी को सिम कार्ड और मानवीय मदद दी गई।
- पुलिस द्वारा अफगान शरणार्थियों पर हिंसा की गई।
- मानवाधिकार समूहों ने इस पर चिंता जताई है।
काबुल, 1 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। 4000 से अधिक अफगान शरणार्थियों को ईरान और पाकिस्तान ने एक दिन में जबरन वापस भेज दिया। यह जानकारी तालिबान के माध्यम से अफगान मीडिया में साझा की गई है।
पझवोक अफगान न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के एक्स पोस्ट का उल्लेख किया। फितरत ने एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रवासियों के मुद्दों को सुलझाने के लिए गठित उच्चायुक्त की रिपोर्ट साझा की, जिसमें रविवार को 4,834 सदस्यों वाले 1,053 परिवारों के अफगानिस्तान लौटने का उल्लेख है।
पोस्ट के अनुसार, शरणार्थी नंगरहार में तोरखम क्रॉसिंग, हेरात में इस्लाम कला क्रॉसिंग, निमरोज में पुल-ए-अब्रेशम, कंधार में स्पिन बोल्डक और हेलमंद में बहरामचा के माध्यम से अफगानिस्तान में प्रवेश किए।
फितरत ने कहा कि 6,566 सदस्यों वाले 1,160 परिवारों को उनके अपने क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया, जबकि 780 परिवारों को मानवीय सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, अफगानिस्तान लौटने वाले रिफ्यूजी को 827 सिम कार्ड भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि शनिवार1,188 परिवारों (जिनमें 6,553 लोग शामिल थे) को जबरदस्ती अफगानिस्तान वापस भेजा गया।
पिछले हफ्ते, अफगान मीडिया ने बताया कि इस्लामाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की राजधानी में अर्जेंटीना पार्क में रातभर छापा मारा। कई अफगान शरणार्थियों और महिला एक्टिविस्टों को पहले पीटा गया, फिर उन्हें हिरासत में लिया गया।
अफगान मीडिया आउटलेट अमू टीवी ने सूत्रों के माध्यम से बताया कि पुलिस ने बिना सूचना के पार्क को घेर लिया और लगभग 200 अफगान परिवारों और एक्टिविस्टों के लगाए तंबू हटा दिए। सभी लगभग चार महीने से वहां रह रहे थे।
एक वीडियो संदेश में, एक प्रवासी ने कहा, "वे आए, सभी को इकट्ठा किया, सारे टेंट हटा दिए और हमें गाड़ियों में भर दिया। कुछ बच्चे घायल हैं। हमें नहीं पता कि वे हमें कहां ले जा रहे हैं।"
एक अन्य समाजसेवी, जिसकी आंख और माथे पर चोट थी, ने कहा कि पुलिस ने उसे पीटा। अमू टीवी ने उसके हवाले से कहा, "मैं अफगान हूं, और क्योंकि मैं एक महिला हूं, इसलिए मैं यहां महिला अधिकारों और मानवाधिकार के लिए हूं।"
अफगान रिफ्यूजी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पुलिस ने लगभग 400 निर्बल परिवारों को जबरदस्ती अफगानिस्तान भेजने की धमकी दी। अधिकार समूहों ने इन कार्रवाइयों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह शरणार्थी संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है।
मानवाधिकार समूहों के कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और मीडिया से अफगान शरणार्थियों के लिए आवाज उठाने की अपील की और इस मुद्दे पर लगातार चुप्पी को खतरनाक बताया। कहा, इस खामोशी का मतलब साफ है कि हम "उन लोगों का साथ छोड़ रहे हैं जिनका एकमात्र हथियार इंसाफ के लिए अपनी आवाज उठाना है।"