7 नवंबर 2026 का पंचांग: राहुकाल सुबह 9:25 से 10:47 बजे तक, पूर्व दिशा में यात्रा वर्जित
सारांश
मुख्य बातें
शनिवार, 7 नवंबर 2026 को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का पंचांग कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आया है। राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा, जिस दौरान किसी भी नए शुभ कार्य की शुरुआत से बचना उचित माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा, अतः पूर्व दिशा की ओर यात्रा न करने की ज्योतिष सलाह है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति
कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से आरंभ होकर शनिवार सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी।
शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:39 बजे और सूर्यास्त शाम 5:41 बजे होगा। चंद्रोदय तड़के 4:39 बजे और चंद्रास्त शाम 4:18 बजे निर्धारित है।
नक्षत्र, योग और ग्रह स्थिति
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव विशाखा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में विशाखा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता इंद्र और अग्नि माने जाते हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की उपस्थिति व्यक्ति को उच्च पद प्राप्ति, नेतृत्व और प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों — जैसे राजनीति, प्रशासन, कानून और प्रबंधन — में उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रेरणा देती है।
शनिवार को प्रीति योग रहेगा, जो अगले दिन तड़के 3:27 बजे तक बना रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। प्रीति योग को 27 नित्य योगों में से दूसरा स्थान प्राप्त है। इसके अधिष्ठाता भगवान विष्णु और प्रमुख ग्रह बुध हैं। इस योग में जन्मे जातक सौम्य, मिलनसार और मधुरभाषी होते हैं।
सूर्य देव तुला राशि में रहेंगे — जिसे ज्योतिष में सूर्य का नीचस्थ स्थान कहा जाता है। तुला वायु तत्व और शुक्र के अधीन है, जो सूर्य के अग्नि स्वभाव से विपरीत है। इस कारण आत्मबल और निर्णय क्षमता पर हल्का प्रभाव संभव है।
चंद्र देव इस दिन प्रातः से कन्या राशि में रहेंगे और शाम 5:15 बजे तुला राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या (जिसके स्वामी बुध हैं) में चंद्रमा की स्थिति मन को भावनात्मक की जगह तार्किक और विश्लेषणात्मक बनाती है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा — लगभग 44 मिनट का यह समय दिन का सर्वाधिक शुभ माना जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार इस दौरान किए गए कार्यों में सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल रात 11:09 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। इसे अत्यंत मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि माना जाता है। नया व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्राओं के लिए यह समय श्रेष्ठ कहलाता है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। इस लगभग 90 मिनट के अशुभ काल में कोई नया कार्य आरंभ न करें — हालाँकि पूर्व से चले आ रहे काम जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल दोपहर 1:33 बजे से 2:56 बजे तक रहेगा। यह समय यमराज से संबद्ध माना जाता है, इसलिए नया व्यापार, यात्रा और वित्तीय लेन-देन से परहेज की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल सुबह 6:39 बजे से 8:02 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। नया काम आरंभ न करें, परंतु बैंक में धनराशि जमा करना, दान देना या नियमित निवेश इस काल में उचित माना जाता है।
दिशाशूल और यात्रा परामर्श
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में उस दिन विशेष रूप से यात्रा आरंभ करना अशुभ माना जाता है। यदि पूर्व दिशा में यात्रा अत्यावश्यक हो, तो कुछ उपाय कर यात्रा की जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त या अमृतकाल में योजनाबद्ध कार्यों को संपन्न करना इस दिन सर्वाधिक फलदायी रहेगा।