28 अक्टूबर 2026
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बिहार-कर्नाटक एमएलसी चुनाव नतीजों पर अखिलेश प्रसाद सिंह बोले — 'एआईसीसी हर चीज पर नज़र रखती है'

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बिहार-कर्नाटक एमएलसी चुनाव नतीजों पर अखिलेश प्रसाद सिंह बोले — 'एआईसीसी हर चीज पर नज़र रखती है'

सारांश

बिहार और कर्नाटक एमएलसी चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने खुद को बिहार से अलग करते हुए जिम्मेदारी एआईसीसी पर डाल दी। कर्नाटक में एनडीए की चारों सीटें जीतने की व्याख्या 'कैप्टिव वोटर्स' से की और बीजेपी के 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर पलटवार किया।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने 28 अक्टूबर 2026 को बिहार-कर्नाटक एमएलसी नतीजों पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, 'बिहार कांग्रेस में मेरी कोई भूमिका नहीं है' — उम्मीदवार चयन की समीक्षा एआईसीसी करेगी।
कर्नाटक में एनडीए ने चारों एमएलसी सीटें जीतीं; सिंह ने इसे 'कैप्टिव वोटर्स' का परिणाम बताया।
BJP के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च को 'बेबुनियाद' करार दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर 'साइलेंट पार्लियामेंट' कार्यक्रम प्रशासन की अनुमति न मिलने के कारण आयोजित किया जाएगा।

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में बिहार और कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) दोनों राज्यों के परिणामों पर पूरी नज़र बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार चयन में किसी भी गड़बड़ी की समीक्षा एआईसीसी स्तर पर ही होगी।

बिहार एमएलसी नतीजों पर कांग्रेस की स्थिति

बिहार एमएलसी चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि पूरे परिणाम अभी आने बाकी हैं और समीक्षा उसके बाद ही संभव होगी। उन्होंने अपनी भूमिका को सीमित बताते हुए कहा, 'बिहार कांग्रेस में मेरी कोई भूमिका नहीं है, मैं ना तीन में ना तेरह में हूं।' उनके अनुसार, उम्मीदवार चयन या किसी अन्य पहलू में गड़बड़ी का आकलन करने का अधिकार पूरी तरह एआईसीसी के पास है।

कर्नाटक में एनडीए की जीत पर प्रतिक्रिया

कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के व्यापक प्रचार अभियान के बावजूद कांग्रेस की हार और एनडीए द्वारा चारों एमएलसी सीटें जीत लेने पर सिंह ने कहा कि यह जनता का प्रत्यक्ष चुनाव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रकार के चुनावों में 'कैप्टिव वोटर्स' की भूमिका निर्णायक होती है और एनडीए ने संभवतः अधिक कैप्टिव वोटर्स तैयार किए। गौरतलब है कि विधान परिषद चुनाव विधायकों और स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों द्वारा लड़े जाते हैं, न कि सामान्य मतदाताओं द्वारा।

'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर पलटवार

नई दिल्ली के लाल किले से भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा विपक्षी दलों के खिलाफ निकाले जा रहे 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च पर सिंह ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र स्थापित ही कांग्रेस पार्टी ने किया है। हमारे पुरखों ने देश को आज़ादी दिलाई है। इस तरह का सवाल और एजेंडा खड़ा करना बेबुनियाद है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव उच्च स्तर पर बना हुआ है।

वोट चोरी और बीजेपी पर आरोप

सिंह ने आरोप लगाया कि BJP इसलिए 'डरी हुई' है क्योंकि कथित तौर पर 'वोट चोरी' पकड़ी गई है। उनके अनुसार, पहले चुनाव आराम से जीते जाते थे, लेकिन जब यह कथित चोरी उजागर हुई तो पार्टी 'सदमे' में आ गई। हालांकि, उन्होंने इस संदर्भ में कोई ठोस साक्ष्य या विशिष्ट उदाहरण नहीं दिया।

खड़गे आवास पर 'साइलेंट पार्लियामेंट' कार्यक्रम

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित किए जाने वाले 'साइलेंट पार्लियामेंट' कार्यक्रम पर सिंह ने कहा कि जब प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी जाती तो कार्यक्रम के लिए वैकल्पिक स्थान ढूँढना पड़ता है। आगे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार और कर्नाटक एमएलसी चुनाव नतीजों पर कांग्रेस का रुख क्या है?
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा है कि एआईसीसी दोनों राज्यों के नतीजों पर पूरी नज़र बनाए हुए है और उम्मीदवार चयन सहित किसी भी पहलू की समीक्षा एआईसीसी ही करेगी। बिहार के बारे में उन्होंने खुद की कोई भूमिका नहीं बताई।
कर्नाटक एमएलसी चुनाव में एनडीए ने कितनी सीटें जीतीं?
एनडीए ने कर्नाटक की चारों एमएलसी सीटें जीत लीं, जबकि डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस ने जोरदार प्रचार किया था। अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस हार को 'कैप्टिव वोटर्स' की संख्या से जोड़कर देखा।
'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च क्या है?
यह मार्च भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा नई दिल्ली के लाल किले से विपक्षी दलों के खिलाफ निकाला जा रहा है। कांग्रेस ने इसे 'बेबुनियाद' करार दिया है।
कांग्रेस का 'साइलेंट पार्लियामेंट' कार्यक्रम क्या है और यह कहाँ होगा?
यह कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा संसदीय मुद्दों पर आयोजित किया जाने वाला एक विशेष कार्यक्रम है। प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण यह पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित किया जाएगा।
एमएलसी चुनाव और सामान्य विधानसभा चुनाव में क्या फर्क है?
एमएलसी यानी विधान परिषद चुनाव में सामान्य जनता वोट नहीं डालती — इनमें विधायक, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि और अन्य निर्वाचक मंडल के सदस्य मतदान करते हैं। इसीलिए इन्हें 'कैप्टिव वोटर्स' वाला चुनाव कहा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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