इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए डीएम-एसएसपी, होगा गैर जमानती वारंट
सारांश
Key Takeaways
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज बरेली के डीएम और एसएसपी की सुनवाई है।
- यदि अधिकारी पेश नहीं हुए, तो गैर-जमानती वारंट जारी किया जाएगा।
- यह मामला सामूहिक नमाज पढ़ने के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़ा है।
- कोर्ट ने प्रशासनिक आदेशों का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
प्रयागराज, २३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बरेली के एक घर में सामूहिक नमाज पढ़ने के मामले में आज एक महत्वपूर्ण सुनवाईडीएम और एसएसपी को अदालत में उपस्थित होना अनिवार्य है।
पिछली सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दोनों अधिकारियों को कोर्ट में उपस्थित होना चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि वे २३ मार्च को पेश नहीं हुए, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया जाएगा।
यह मामला याचिकाकर्ता तारिक खान की याचिका से संबंधित है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके घर में सामूहिक नमाज पढ़ने के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और नमाज अदा कर रहे व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और असंवैधानिक थी।
हाईकोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि किसी भी निजी स्थान पर प्रार्थना करने के लिए प्रशासनिक अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद, याचिकाकर्ता और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कोर्ट ने इस व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अदालत के आदेश का पालन करना आवश्यक है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सुनवाई में बरेली के डीएम और एसएसपी को २३ मार्च को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। यदि आज दोनों अधिकारी कोर्ट में उपस्थित नहीं होते हैं, तो कोर्ट उनके खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर सकता है।
गौरतलब है कि बरेली में जुमे के दिन एक निजी मकान में मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्र होकर नमाज अदा कर रहे थे। एक हिंदू संगठन ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर नमाजियों को गिरफ्तार किया। हालांकि, किसी निजी स्थान पर एकत्र होकर नमाज पढ़ने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।