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अनुच्छेद 370 हटाने की 7वीं बरसी पर अमरनाथ यात्रा रोकी, महबूबा मुफ्ती नजरबंद

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अनुच्छेद 370 हटाने की 7वीं बरसी पर अमरनाथ यात्रा रोकी, महबूबा मुफ्ती नजरबंद

सारांश

अनुच्छेद 370 हटाने की 7वीं बरसी पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी हो गई — अमरनाथ यात्रा रोकी गई, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती नजरबंद। पीडीपी ने ब्लैकआउट और जिला-वार विरोध की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया।

मुख्य बातें

5 अगस्त 2026 को अनुच्छेद 370 हटाने की 7वीं बरसी पर सुरक्षा कारणों से अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई।
घाटी की ओर तीर्थयात्रियों की आवाजाही बंद; बालटाल बेस कैंप से गुफा मंदिर तक आंशिक अनुमति बरकरार रही।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई वरिष्ठ नेताओं को कथित तौर पर नजरबंद किया गया।
पीडीपी ने अनुच्छेद 370 बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की माँग के साथ 15 मिनट के सांकेतिक ब्लैकआउट का प्रस्ताव दिया था।
सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस पूर्ण राज्य दर्जे की माँग कर रही है, जबकि पीडीपी ने इसका विरोध किया — विपक्षी खेमे में आंतरिक दरार स्पष्ट।

अमरनाथ यात्रा को 5 अगस्त 2026 को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जब अधिकारियों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की 7वीं बरसी पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, घाटी की ओर तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया और यात्रा पूरी करके लौट रहे किसी भी काफिले को जम्मू की दिशा में जाने की अनुमति नहीं दी गई।

यात्रा पर क्या रोक लगाई गई

सूत्रों के अनुसार, उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप से पवित्र गुफा मंदिर की ओर जाने वाले तीर्थयात्रियों को आंशिक छूट दी गई — वे मंदिर तक जा सकते हैं, लेकिन नए काफिलों की घाटी में एंट्री और वापसी दोनों पर रोक रही। यह निर्णय बरसी के अवसर पर संभावित विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर लिया गया।

पीडीपी का विरोध और नेताओं की नजरबंदी

विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने 5 अगस्त को पूरे जम्मू-कश्मीर में जिला-वार विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की थी, जिसमें अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की माँग शामिल थी। पार्टी ने 15 मिनट के सांकेतिक ब्लैकआउट का भी प्रस्ताव दिया था।

रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई वरिष्ठ नेताओं को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से रोकने के लिए नजरबंद कर दिया गया। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था की संभावित समस्याओं का हवाला देते हुए विरोध की अनुमति पहले ही अस्वीकार कर दी थी।

सुरक्षा बंदोबस्त

पीडीपी मुख्यालय और संवेदनशील इलाकों के आसपास पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की भारी तैनाती की गई। आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए और औपचारिक विरोध की अनुमति नहीं दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब घाटी में सुरक्षा बलों की मौजूदगी पहले से ही बढ़ी हुई है।

अनुच्छेद 370 हटाने की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संसद के माध्यम से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त किया था, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष स्वायत्त दर्जा रद्द हो गया। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किया गया।

राजनीतिक विरोधाभास

एक दिलचस्प राजनीतिक स्थिति यह है कि जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग कर रही है, जबकि अनुच्छेद 370 की बहाली के पक्ष में आवाज उठा रही पीडीपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की इस माँग का विरोध किया है — यह विपक्षी खेमे के भीतर गहरी दरार को उजागर करता है। आगे आने वाले दिनों में यह राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच की खाई यह दर्शाती है कि अनुच्छेद 370 के बाद की राजनीति में विपक्ष एकजुट नहीं है — जो केंद्र सरकार के लिए एक सुविधाजनक स्थिति है।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा 5 अगस्त 2026 को क्यों रोकी गई?
अनुच्छेद 370 हटाने की 7वीं बरसी पर संभावित विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर अधिकारियों ने यात्रा अस्थायी रूप से रोकी। घाटी की ओर तीर्थयात्रियों की आवाजाही बंद कर दी गई, हालाँकि बालटाल से गुफा मंदिर तक आंशिक अनुमति बरकरार रही।
महबूबा मुफ्ती को क्यों नजरबंद किया गया?
रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को 5 अगस्त को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से रोकने के लिए नजरबंद किया गया। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला देते हुए विरोध की अनुमति पहले ही अस्वीकार कर दी थी।
पीडीपी ने 5 अगस्त को क्या माँगें रखी थीं?
पीडीपी ने अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की माँग करते हुए पूरे जम्मू-कश्मीर में जिला-वार विरोध प्रदर्शन और 15 मिनट के सांकेतिक ब्लैकआउट का प्रस्ताव दिया था।
अनुच्छेद 370 कब और कैसे हटाया गया था?
केंद्र की BJP सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संसद के माध्यम से अनुच्छेद 370 समाप्त किया, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष स्वायत्त दर्जा रद्द हो गया। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किया गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच क्या मतभेद है?
जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग कर रही है, जबकि अनुच्छेद 370 की बहाली की वकालत करने वाली पीडीपी ने इस माँग का विरोध किया है — यह विपक्षी खेमे के भीतर गहरे राजनीतिक मतभेद को उजागर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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