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अमरनाथ यात्रा फिर शुरू: 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 28वाँ जत्था रवाना

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अमरनाथ यात्रा फिर शुरू: 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 28वाँ जत्था रवाना

सारांश

सुरक्षा कारणों से एक दिन रुकने के बाद अमरनाथ यात्रा 6 अगस्त को फिर शुरू हुई। 3 जुलाई से अब तक 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालु 3,880 मीटर ऊँचे पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। 57 दिनों की यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षा बंधन पर समाप्त होगी।

मुख्य बातें

अमरनाथ यात्रा 6 अगस्त को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से पुनः प्रारंभ हुई।
सुरक्षा कारणों से अनुच्छेद 370 हटाने की सातवीं वर्षगाँठ पर एक दिन के लिए यात्रा स्थगित की गई थी।
28वाँ जत्था — 1,801 तीर्थयात्री , 74 वाहन — तड़के 2:45 बजे बालटाल के लिए रवाना हुआ।
3 जुलाई से अब तक 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने 3,880 मीटर ऊँचे गुफा मंदिर में दर्शन किए।
इस वर्ष हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं ; बालटाल-पहलगाम से आगे 'नो-फ्लाई ज़ोन' लागू।
यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन पर सम्पन्न होगी।

अमरनाथ यात्रा गुरुवार, 6 अगस्त को पुनः प्रारंभ हो गई, जब 1,801 तीर्थयात्रियों का 28वाँ जत्था तड़के 2:45 बजे IST जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। 3 जुलाई को यात्रा के आरंभ से अब तक 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालु कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं।

यात्रा क्यों रोकी गई थी

अधिकारियों के अनुसार, अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने की सातवीं वर्षगाँठ के अवसर पर सुरक्षा कारणों से यात्रा को एक दिन के लिए स्थगित किया गया था। यह निर्णय एहतियाती उपाय के रूप में लिया गया, जो इस क्षेत्र में संवेदनशील तिथियों पर बरती जाने वाली सामान्य सुरक्षा सतर्कता को दर्शाता है।

28वें जत्थे का विवरण

इस जत्थे में 1,347 पुरुष, 351 महिलाएँ, 89 साधु और 14 साध्वियाँ शामिल थीं, जो 74 वाहनों के काफिले में सवार होकर रवाना हुईं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहलगाम बेस कैंप की ओर से फिलहाल कोई काफिला नहीं भेजा गया, क्योंकि यात्रा अभी केवल बालटाल मार्ग से संचालित हो रही है।

सुरक्षा व्यवस्था और हेलीकॉप्टर सेवा

अधिकारियों ने बालटाल और पहलगाम से आगे के मार्गों को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित किया है, जिसके कारण इस वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। पूरे यात्रा मार्ग पर कड़ी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है।

यात्रा मार्ग और धार्मिक महत्त्व

गुफा मंदिर में प्राकृतिक हिम शिवलिंग (स्टैलेग्माइट संरचना) है, जो चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता-बढ़ता है। भक्तों की आस्था है कि यह संरचना भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक है। नुनवान (पहलगाम) के पारंपरिक मार्ग से गुफा तक पहुँचने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि गांदरबल जिले के बालटाल से यात्री उसी दिन दर्शन कर लौट सकते हैं।

यात्रा का समापन

57 दिनों की यह वार्षिक यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन के अवसर पर सम्पन्न होगी। यह संयोग यात्रा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व को और गहरा बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें धार्मिक आस्था और सुरक्षा चुनौतियाँ एक साथ प्रबंधित करनी होती हैं। इस वर्ष हेलीकॉप्टर सेवा का न होना श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त कठिनाई है, लेकिन 4.71 लाख का आँकड़ा बताता है कि आस्था किसी भी बाधा से बड़ी है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पहलगाम मार्ग अभी भी निष्क्रिय है — जो यात्रा के पारंपरिक स्वरूप पर दीर्घकालिक प्रश्न उठाता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा 2026 क्यों रोकी गई थी?
अधिकारियों के अनुसार, अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने की सातवीं वर्षगाँठ पर सुरक्षा कारणों से यात्रा एक दिन के लिए स्थगित की गई थी। 6 अगस्त को यात्रा पुनः शुरू कर दी गई।
अमरनाथ यात्रा 2026 में अब तक कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं?
3 जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से 6 अगस्त तक 4.71 लाख से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं।
अमरनाथ यात्रा 2026 में हेलीकॉप्टर सेवा क्यों बंद है?
अधिकारियों ने बालटाल और पहलगाम से आगे के मार्गों को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित किया है, इसलिए इस वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। सभी श्रद्धालुओं को पैदल या वाहन मार्ग से ही यात्रा करनी होगी।
अमरनाथ यात्रा 2026 कब समाप्त होगी?
57 दिनों की यह वार्षिक यात्रा 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन के अवसर पर सम्पन्न होगी।
बालटाल और पहलगाम मार्ग में क्या अंतर है?
पहलगाम (नुनवान) के पारंपरिक और लंबे मार्ग से गुफा मंदिर तक पहुँचने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि गांदरबल जिले के बालटाल से यात्री उसी दिन दर्शन कर बेस कैंप लौट सकते हैं। इस वर्ष यात्रा केवल बालटाल मार्ग से संचालित हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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