अमरनाथ यात्रा फिर शुरू: 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 28वाँ जत्था रवाना
सारांश
मुख्य बातें
अमरनाथ यात्रा गुरुवार, 6 अगस्त को पुनः प्रारंभ हो गई, जब 1,801 तीर्थयात्रियों का 28वाँ जत्था तड़के 2:45 बजे IST जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। 3 जुलाई को यात्रा के आरंभ से अब तक 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालु कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं।
यात्रा क्यों रोकी गई थी
अधिकारियों के अनुसार, अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने की सातवीं वर्षगाँठ के अवसर पर सुरक्षा कारणों से यात्रा को एक दिन के लिए स्थगित किया गया था। यह निर्णय एहतियाती उपाय के रूप में लिया गया, जो इस क्षेत्र में संवेदनशील तिथियों पर बरती जाने वाली सामान्य सुरक्षा सतर्कता को दर्शाता है।
28वें जत्थे का विवरण
इस जत्थे में 1,347 पुरुष, 351 महिलाएँ, 89 साधु और 14 साध्वियाँ शामिल थीं, जो 74 वाहनों के काफिले में सवार होकर रवाना हुईं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहलगाम बेस कैंप की ओर से फिलहाल कोई काफिला नहीं भेजा गया, क्योंकि यात्रा अभी केवल बालटाल मार्ग से संचालित हो रही है।
सुरक्षा व्यवस्था और हेलीकॉप्टर सेवा
अधिकारियों ने बालटाल और पहलगाम से आगे के मार्गों को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित किया है, जिसके कारण इस वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है। पूरे यात्रा मार्ग पर कड़ी और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है।
यात्रा मार्ग और धार्मिक महत्त्व
गुफा मंदिर में प्राकृतिक हिम शिवलिंग (स्टैलेग्माइट संरचना) है, जो चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता-बढ़ता है। भक्तों की आस्था है कि यह संरचना भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक है। नुनवान (पहलगाम) के पारंपरिक मार्ग से गुफा तक पहुँचने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि गांदरबल जिले के बालटाल से यात्री उसी दिन दर्शन कर लौट सकते हैं।
यात्रा का समापन
57 दिनों की यह वार्षिक यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन के अवसर पर सम्पन्न होगी। यह संयोग यात्रा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व को और गहरा बनाता है।