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पुंछ में एलओसी के पास जिंदा मोर्टार शेल मिला, सेना के बीडीएस ने मनकोट सेक्टर में सुरक्षित नष्ट किया

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पुंछ में एलओसी के पास जिंदा मोर्टार शेल मिला, सेना के बीडीएस ने मनकोट सेक्टर में सुरक्षित नष्ट किया

सारांश

पुंछ के मनकोट सेक्टर में एलओसी के पास मिला जिंदा मोर्टार शेल एक बार फिर याद दिलाता है कि सीमावर्ती इलाकों में दशकों पुरानी गोलाबारी के अवशेष आज भी आम नागरिकों के लिए खतरा बने हुए हैं। सेना के बीडीएस ने डबराज में नियंत्रित विस्फोट से इसे नष्ट कर बड़ा हादसा टाला।

मुख्य बातें

21 अगस्त को पुंछ के मनकोट सेक्टर में एलओसी के पास एक जिंदा मोर्टार शेल बरामद हुआ।
सेना के बम डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) ने डबराज इलाके में कंट्रोल्ड डिस्पोजल ऑपरेशन से शेल को सुरक्षित नष्ट किया।
ऑपरेशन में कोई हताहत नहीं और कोई संपत्ति क्षति नहीं हुई।
पुंछ, राजौरी, बारामूला और अखनूर जैसे सीमावर्ती इलाकों में बिना फटे हथियार आम नागरिकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
मानसून और बारिश के कारण दबे हुए शेल व लैंडमाइन अपनी जगह से हटकर खेतों तक पहुँच जाते हैं।
अधिकारियों ने नागरिकों से संदिग्ध वस्तु मिलने पर तुरंत नज़दीकी आर्मी कैंप या पुलिस स्टेशन को सूचित करने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के मनकोट सेक्टर में 21 अगस्त को एक जिंदा मोर्टार शेल बरामद हुआ, जिसे सेना के बम डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) ने डबराज इलाके में नियंत्रित विस्फोट के ज़रिए सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया। अधिकारियों के अनुसार इस ऑपरेशन में न कोई हताहत हुआ और न ही किसी संपत्ति को नुकसान पहुँचा।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों ने बताया कि पुंछ के मनकोट सेक्टर में एलओसी के निकट यह जिंदा मोर्टार शेल मिला। सूचना मिलते ही सेना की बीडीएस टीम मौके पर पहुँची और डबराज क्षेत्र में एक कंट्रोल्ड डिस्पोजल ऑपरेशन के तहत शेल को निष्क्रिय किया। यह पूरी कार्रवाई बिना किसी दुर्घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

एलओसी के पास बिना फटे हथियारों की चुनौती

जम्मू-कश्मीर में एलओसी से लगे इलाकों में ग्रामीणों और किसानों को अक्सर बिना फटे मोर्टार शेल मिलते हैं। ये शेल खेती के दौरान या भारी बारिश के कारण जमीन से बाहर निकल आते हैं और पहले हुई सीमा-पार गोलाबारी के अवशेष होते हैं। पुंछ, राजौरी, बारामूला (उरी) और अखनूर जैसे इलाकों में भारी निगरानी वाले माइनफील्ड हैं, जहाँ मौसमी बाढ़ और तेज़ बारिश के कारण लैंडमाइन अपनी निर्धारित जगहों से हटकर खेतों या ढलानों तक पहुँच जाते हैं।

लैंडमाइन का खतरा और सेना की भूमिका

एलओसी के पास रहने वाले आम नागरिकों और सुरक्षा बलों, दोनों के लिए लैंडमाइन एक गंभीर खतरा बने हुए हैं। सेना अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर रणनीतिक सुरक्षा घेरे के तौर पर लैंडमाइन का उपयोग करती है। गर्मी और पतझड़ के मौसम में जीरो लाइन के पास जंगल में लगने वाली आग से भी विस्थापित माइन अनायास विस्फोट कर सकते हैं। सेना के बीडीएस दस्ते नियमित रूप से ऐसे खतरनाक अवशेषों को नियंत्रित तरीके से नष्ट करते हैं।

आम जनता के लिए सुरक्षा निर्देश

अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को सलाह दी है कि वे बिना फटे किसी भी शेल या संदिग्ध वस्तु को न छुएँ, न हिलाएँ, न लात मारें और न ही उठाएँ। ऐसी किसी भी वस्तु के मिलने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखें, आसपास के लोगों को सचेत करें और तत्काल नज़दीकी आर्मी कैंप या स्थानीय पुलिस स्टेशन को सूचित करें, ताकि बीडीएस की टीम समय पर पहुँचकर उसे सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर सके।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल एलओसी के निकटवर्ती इलाकों में निगरानी और बम निरोधक अभियान तेज़ किए हुए हैं। गौरतलब है कि मानसून के दौरान इस तरह की घटनाएँ बढ़ जाती हैं, क्योंकि बारिश का पानी मिट्टी में दबे पुराने हथियारों को सतह पर ले आता है। सेना का बीडीएस इस क्षेत्र में सतर्कता से गश्त और निगरानी जारी रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हर मानसून में नए सिरे से सतह पर आ जाते हैं। सेना का बीडीएस निस्संदेह सराहनीय काम करता है, लेकिन असली सवाल यह है कि सीमावर्ती गाँवों में जागरूकता अभियान और माइनफील्ड मैपिंग की पारदर्शिता कितनी है। जब तक स्थानीय नागरिकों को व्यवस्थित प्रशिक्षण और सक्रिय सूचना तंत्र नहीं मिलता, तब तक यह खतरा हर बरसात के साथ लौटता रहेगा।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुंछ में एलओसी के पास जिंदा मोर्टार शेल कहाँ और कब मिला?
यह जिंदा मोर्टार शेल 21 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल के मनकोट सेक्टर में मिला। सेना के बम डिस्पोजल स्क्वाड ने डबराज इलाके में इसे नियंत्रित विस्फोट से नष्ट किया।
सेना के बम डिस्पोजल स्क्वाड ने शेल को कैसे नष्ट किया?
सेना के बम डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) ने डबराज इलाके में एक कंट्रोल्ड डिस्पोजल ऑपरेशन के ज़रिए मोर्टार शेल को निष्क्रिय किया। इस ऑपरेशन में कोई हताहत नहीं हुआ और न ही किसी संपत्ति को नुकसान पहुँचा।
एलओसी के पास बिना फटे मोर्टार शेल क्यों मिलते हैं?
ये शेल पहले हुई सीमा-पार गोलाबारी के अवशेष होते हैं जो वर्षों से जमीन में दबे रहते हैं। खेती के दौरान या भारी बारिश और मानसून के कारण ये जमीन से बाहर आ जाते हैं और नागरिकों के लिए खतरा बन जाते हैं।
जिंदा शेल या संदिग्ध वस्तु मिलने पर नागरिकों को क्या करना चाहिए?
अधिकारियों की सलाह है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु को न छुएँ, न हिलाएँ और न उठाएँ । सुरक्षित दूरी बनाए रखें, आसपास के लोगों को सचेत करें और तुरंत नज़दीकी आर्मी कैंप या पुलिस स्टेशन को सूचित करें।
जम्मू-कश्मीर में लैंडमाइन का खतरा किन इलाकों में सबसे अधिक है?
पुंछ, राजौरी, बारामूला (उरी) और अखनूर जैसे सीमावर्ती इलाकों में भारी निगरानी वाले माइनफील्ड हैं। मौसमी बाढ़ और तेज़ बारिश के कारण लैंडमाइन अपनी निर्धारित जगहों से हटकर खेतों और ढलानों तक पहुँच जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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