कालियाबोर विधानसभा: एजीपी के केशव महंत ने 17,890 वोटों से जीत दर्ज की, निर्दलीय जितेन गौड़ को हराया
सारांश
मुख्य बातें
असम गण परिषद (एजीपी) के वरिष्ठ नेता केशव महंत ने कालियाबोर विधानसभा क्षेत्र से 17,890 मतों के अंतर से जीत हासिल कर अपनी सीट एक बार फिर बरकरार रखी है। 4 मई 2026 को घोषित परिणाम में महंत को 74,029 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार जितेन गौड़ को 56,139 मत प्राप्त हुए। यह जीत एजीपी की कालियाबोर में निरंतर पकड़ को और मज़बूत करती है।
मतदान और मतदाता आँकड़े
कालियाबोर विधानसभा क्षेत्र में 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ, जिसमें 86.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 1,89,648 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 94,311 पुरुष और 95,331 महिला मतदाता शामिल हैं। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में 89 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो इस बार की तुलना में थोड़ा अधिक था।
चुनावी मैदान में कौन-कौन थे
इस बार कालियाबोर से कुल 4 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आज़माई। एजीपी की ओर से केशव महंत, रायजोर दल से प्रदीप कुमार बरुआ और दो अन्य निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। उल्लेखनीय है कि इस बार कांग्रेस ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा, जो पिछले कई चुनावों में एजीपी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही है।
केशव महंत का राजनीतिक सफर
केशव महंत ने पहली बार 2006 में कालियाबोर सीट जीती थी और 2011 में भी इस पर अपना कब्जा बरकरार रखा। 2016 में उन्होंने कांग्रेस की बिंदु गंजू को हराया, जबकि 2021 में कांग्रेस के प्रशांत कुमार सैकिया को शिकस्त दी। इस प्रकार यह उनकी लगातार पाँचवीं विधानसभा जीत है। पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षित महंत ने अपना पेशा समाज सेवक और राजनेता बताया है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास ₹5.3 करोड़ की संपत्ति है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।
कालियाबोर की राजनीतिक पृष्ठभूमि
1951 में स्थापित कालियाबोर विधानसभा क्षेत्र में अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1986 का उपचुनाव भी शामिल है। यह निर्वाचन क्षेत्र काजीरंगा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है। ऐतिहासिक रूप से यहाँ कांग्रेस और असम गण परिषद का ही दबदबा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब असम की राजनीति में भाजपा-एजीपी गठबंधन की पकड़ लगातार मज़बूत हो रही है और कांग्रेस कई परंपरागत सीटों पर उम्मीदवार उतारने में भी पीछे हट रही है।
आगे क्या
केशव महंत की यह जीत कालियाबोर में एजीपी की दीर्घकालिक राजनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की अनुपस्थिति और निर्दलीय उम्मीदवारों में मतों के बिखराव ने भी महंत की जीत के अंतर को प्रभावित किया। आने वाले दिनों में नवनिर्वाचित विधायक के रूप में उनकी प्राथमिकताएँ और विधानसभा में उनकी भूमिका केंद्र में रहेगी।