पथारकंडी में भाजपा के कृष्णेंदु पॉल ने 46,764 वोटों से जीत दर्ज की, कांग्रेस के कार्तिक सेन सिन्हा को हराया
सारांश
मुख्य बातें
असम के पथारकंडी विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार कृष्णेंदु पॉल ने 4 मई 2026 को घोषित परिणाम में कांग्रेस के कार्तिक सेन सिन्हा को 46,764 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर सीट बरकरार रखी। यह जीत भाजपा की इस अर्ध-शहरी सीट पर लगातार तीसरी विजय है।
मतगणना के प्रमुख आँकड़े
कृष्णेंदु पॉल को कुल 98,101 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के कार्तिक सेन सिन्हा 51,337 मतों पर सिमट गए। इस प्रकार जीत का अंतर 46,764 वोट रहा — जो 2021 के मुकाबले कहीं अधिक है, जब पॉल ने कांग्रेस के सचिन साहू को मात्र 4,467 मतों से हराया था।
इस बार के चुनाव में 9 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) के बिजित सिन्हा, आम आदमी पार्टी (AAP) के सयनुल हक, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के बिजू पॉल और चार निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल थे।
मतदान और निर्वाचन क्षेत्र की स्थिति
पथारकंडी विधानसभा सीट पर 9 अप्रैल को मतदान हुआ, जिसमें 84.85 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। क्षेत्र में कुल 1,78,484 मतदाता हैं — 90,395 पुरुष और 88,085 महिला मतदाता। यह सीट करीमगंज लोकसभा क्षेत्र के छह खंडों में से एक है और सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में आती है।
कृष्णेंदु पॉल: विजेता का परिचय
कृष्णेंदु पॉल असम सरकार में पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री हैं। 2021 में भाजपा सरकार के गठन के बाद उन्हें यह विभाग सौंपा गया था। वे पेशे से व्यवसायी हैं और स्नातक की शैक्षणिक योग्यता रखते हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति ₹10.2 करोड़ है। हलफनामे में उन्होंने घोषित किया कि उनके विरुद्ध कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।
पथारकंडी का राजनीतिक इतिहास
1951 में स्थापित पथारकंडी विधानसभा क्षेत्र अब तक राज्य में हुए सभी 15 विधानसभा चुनावों में मतदान कर चुका है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने यहाँ पाँच-पाँच बार जीत दर्ज की है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों को चार बार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को एक बार सफलता मिली है। 2016 में भाजपा ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) से यह सीट छीनी थी, जब पॉल ने AIUDF के देबेंदु कुमार सिन्हा को 9,268 मतों से हराया था। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा पूर्वोत्तर भारत में अपनी पकड़ लगातार मज़बूत कर रही है और कांग्रेस इस क्षेत्र में अपना पुराना जनाधार पुनः प्राप्त करने के लिए संघर्षरत है। आगे भाजपा के लिए चुनौती इस भारी जनादेश को ज़मीनी विकास कार्यों में बदलने की होगी।